मुंबई। प्रधानमंत्री के मुंबई दौरे से पहले सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 24 वर्षीय संदिग्ध रोहन पारेख पर आरोप है कि उसने अपने बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे के साथ मिलकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का कथित फर्जी पहचान पत्र इस्तेमाल कर बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा में प्रवेश किया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, फर्जी पहचान पत्र तैयार करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल्स का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने भी पूछताछ शुरू की। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) और एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) के अधिकारियों की टीम ने रोहन पारेख और उसके बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान पारेख ने कथित तौर पर AI टूल्स की मदद से फर्जी पहचान पत्र तैयार करने की बात स्वीकार की है।
प्रधानमंत्री के दौरे से पहले हुई घटना
बताया जा रहा है कि यह घटना प्रधानमंत्री के मुंबई दौरे से पहले हुई। प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहती है और संवेदनशील स्थानों पर प्रवेश को लेकर विशेष जांच की जाती है। ऐसे में PMO से जुड़ा कथित फर्जी पहचान पत्र दिखाकर एक प्रमुख परिसर में प्रवेश करने की कोशिश ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
जियो वर्ल्ड प्लाजा BKC जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक परिसर में इस तरह की कथित गतिविधि को सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। यही वजह है कि मामले की जांच केवल स्थानीय पुलिस स्तर तक सीमित नहीं रही और केंद्रीय तथा राज्य की सुरक्षा एजेंसियां भी पूछताछ में शामिल हुईं।
AI से फर्जी कार्ड तैयार करने का आरोप
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, रोहन पारेख ने कथित तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल कर PMO का फर्जी पहचान पत्र तैयार किया। AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच फर्जी दस्तावेज तैयार करने में इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता पहले से बढ़ी हुई है।
पारेख से पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने कथित फर्जी पहचान पत्र तैयार करने के तरीके और उसके इस्तेमाल के उद्देश्य को लेकर जानकारी जुटाई। हालांकि, मामले में सामने आई जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि कार्ड को किस स्तर तक वास्तविक दिखाने की कोशिश की गई थी और उसे तैयार करने में कौन-कौन से डिजिटल साधनों का इस्तेमाल हुआ।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि फर्जी पहचान पत्र केवल प्रवेश हासिल करने के लिए तैयार किया गया था या इसके पीछे कोई अन्य उद्देश्य भी था।
कथित मतिभ्रम की बात भी सामने आई
मामले से जुड़ी जानकारी में यह भी कहा गया है कि पारेख की कथित गतिविधियां मतिभ्रम (hallucinations) से जुड़ी हो सकती हैं। बताया गया है कि पूछताछ के दौरान उसके व्यवहार और दावों को लेकर अधिकारियों ने कई पहलुओं पर जानकारी जुटाई।
हालांकि, किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति से जुड़े निष्कर्ष केवल चिकित्सकीय और विशेषज्ञ मूल्यांकन के आधार पर ही निकाले जा सकते हैं। इसलिए जांच एजेंसियां उसके दावों और घटनाक्रम के सभी पहलुओं की स्वतंत्र रूप से पड़ताल कर रही हैं।
बॉडीगार्ड से भी हुई पूछताछ
मामले में पारेख के साथ मौजूद उसके बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सुरक्षा एजेंसियों ने दोनों से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश की कि वे परिसर में किस उद्देश्य से पहुंचे थे और प्रवेश के लिए कथित पहचान पत्र का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कुंडे को पहचान पत्र की वास्तविकता के बारे में जानकारी थी या नहीं। इसके अलावा दोनों के बीच घटना से पहले और बाद में हुई बातचीत तथा उनकी गतिविधियों की भी जांच की जा सकती है।
सुरक्षा एजेंसियों ने शुरू की पड़ताल
IB, RAW और ATS के अधिकारियों द्वारा पूछताछ किए जाने से मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि घटना केवल एक व्यक्ति की कथित हरकत थी या इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति या समूह की भूमिका भी हो सकती है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह जानना भी अहम है कि फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल किस तरह सुरक्षा जांच को पार करने के लिए किया गया। यदि किसी संवेदनशील परिसर में कथित फर्जी दस्तावेज के आधार पर प्रवेश संभव हुआ, तो सुरक्षा व्यवस्था की कमियों की भी समीक्षा की जा सकती है।
डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग पर चिंता
इस मामले ने AI तकनीक के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। AI टूल्स के जरिए फोटो, दस्तावेज और डिजिटल सामग्री तैयार करना पहले की तुलना में आसान हुआ है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों और संस्थानों के सामने डिजिटल पहचान की प्रामाणिकता जांचने की चुनौती बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के लिए यह भी महत्वपूर्ण विषय है कि किसी संवेदनशील सरकारी संस्थान के नाम या पहचान का इस्तेमाल कर तैयार किए गए दस्तावेज की जांच किस तरह की जाए। भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए डिजिटल सत्यापन प्रणाली को मजबूत करना आवश्यक हो सकता है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल रोहन पारेख से जुड़े इस मामले में जांच जारी है। पूछताछ में AI की मदद से कथित फर्जी PMO पहचान पत्र तैयार करने की बात सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी होगा कि पारेख ने कथित फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल क्यों किया, उसे तैयार करने के पीछे उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था और इस घटना में उसके बॉडीगार्ड की भूमिका कितनी थी।
प्रधानमंत्री के दौरे से पहले हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ AI के दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब जांच एजेंसियों की पड़ताल से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि यह मामला महज एक व्यक्ति की कथित हरकत थी या इसके पीछे कोई बड़ा मकसद या नेटवर्क भी मौजूद था।