मुंबई: आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की याद में आयोजित कैंडल मार्च में शामिल होने पहुंचे स्टैंड-अप कॉमेडियन मासूम रजवानी समेत कई लोगों को मुंबई पुलिस ने रविवार को हिरासत में ले लिया। यह सभा दादर स्थित चैत्यभूमि में आयोजित की गई थी। पुलिस के अनुसार, कार्यक्रम के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से एहतियाती कदम उठाने की बात कही है। साहिल की पिछले महीने मृत्यु हुई थी, जिसके बाद उनके परिवार और छात्र संगठनों की ओर से न्याय की मांग उठाई जा रही है। 
पुलिस अधिकारी के अनुसार, चैत्यभूमि में कैंडल मार्च के लिए जुटे लगभग 20 से 25 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें मासूम रजवानी भी शामिल थे। इसके अलावा शिवाजी पार्क में एक अलग प्रदर्शन के लिए एकत्र करीब 120 लोगों को रोका गया। दोनों स्थानों से हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या पुलिस ने लगभग 140 बताई है। इसलिए सभी 140 लोगों को केवल साहिल की याद में आयोजित कैंडल मार्च का हिस्सा बताना सही नहीं होगा। दोनों सभाओं के उद्देश्य अलग थे। 
चैत्यभूमि में जुटे लोग साहिल को श्रद्धांजलि देने और उनके मामले में न्याय की मांग उठाने पहुंचे थे। पुलिस ने सभा को बिना अनुमति आयोजित कार्यक्रम बताया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने के लिए औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जा रही थी। हालांकि, सभी लोगों की रिहाई के समय और अंतिम स्थिति का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया था। इस कार्रवाई के संबंध में मासूम रजवानी का विस्तृत पक्ष भी उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं दिया गया है। 
दूसरी ओर, शिवाजी पार्क में आदिवासी युवाओं के ‘आदिवासी जेन-जी’ प्रदर्शन के लिए लोग जुट रहे थे। युवा कार्यकर्ताओं के मुताबिक, प्रस्तावित ‘जनाक्रोश मोर्चा’ में महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके, विभाग के आयुक्त और सचिव के इस्तीफे की मांग उठाई जानी थी। पुलिस ने वहां एकत्र लोगों को हिरासत में लेकर स्थानीय थाने पहुंचाया। इस प्रदर्शन से जुड़ी मांगों और साहिल की स्मृति में आयोजित सभा को अलग-अलग घटनाक्रम के रूप में समझना आवश्यक है। 
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ छात्रों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से पहले ही दादर रेलवे स्टेशन और तिलक भवन के पास रोक लिया गया। उनके अनुसार, शिवाजी पार्क की ओर जाने वाले रेलवे स्टेशनों और बस स्टॉप पर भी पुलिस तैनात थी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने पहले आजाद मैदान और बाद में शिवाजी पार्क में कार्यक्रम की अनुमति मांगी थी, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने अपनी मांगें उठाने के लिए आगे बढ़ने का निर्णय लिया था। ये विवरण कार्यकर्ताओं के दावों पर आधारित हैं। 
आदिवासी छात्रों के आंदोलन की प्रमुख मांगों में स्कूलों की स्थिति सुधारना और आवासीय विद्यालयों की केंद्रीकृत रसोई व्यवस्था में लागू ठेका प्रणाली समाप्त करना शामिल है। कार्यकर्ताओं के अनुसार, इन मुद्दों पर पिछले करीब दो महीने से आंदोलन चल रहा है। रविवार का प्रस्तावित मोर्चा इसी अभियान की अगली कड़ी था। पुलिस द्वारा लोगों को रोके जाने के बाद कार्यक्रम नियोजित तरीके से आगे नहीं बढ़ सका। शिक्षा और छात्र सुविधाओं से संबंधित ये मांगें आंदोलन के केंद्र में बनी हुई हैं। 
साहिल वाकोडे की मृत्यु 18 सितंबर को हुई थी। इसके बाद उनके परिवार और कुछ छात्र संगठनों ने प्रताड़ना तथा जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए। इन आरोपों की जांच की मांग को लेकर अलग-अलग स्तर पर प्रदर्शन हुए हैं। परिवार का कहना है कि मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए। हालांकि, किसी छात्र की मृत्यु के कारण को एक घटना या आरोप तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। मामले से जुड़ी परिस्थितियों और शिकायतों पर जांच का अंतिम निष्कर्ष महत्वपूर्ण होगा।
इस मामले में एक प्रोफेसर का नाम लेते हुए शिकायत किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। शिकायत में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम और आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने जांच के दौरान 40 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए हैं। शिकायत में लगाए गए आरोप अभी जांच का विषय हैं; इन्हें किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध हो जाने के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
साहिल की मृत्यु के बाद संस्थान में छात्र कल्याण, अनुशासनात्मक प्रक्रिया की पारदर्शिता और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को लेकर भी सवाल उठे हैं। छात्र प्रदर्शनों में स्वतंत्र जांच और बेहतर सहायता व्यवस्था की मांग सामने आई है। वहीं, संस्थान ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। ऐसे में परिवार और छात्रों के आरोपों के साथ संस्थान का पक्ष भी मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जांच से ही संबंधित दावों और परिस्थितियों पर स्पष्टता आ सकेगी। रविवार की कार्रवाई के बाद फिलहाल दो बातें प्रमुख हैं—साहिल के मामले की निष्पक्ष जांच की मांग और सार्वजनिक सभाओं की अनुमति पर पुलिस का रुख। पुलिस ने हिरासत को एहतियाती कदम बताया है, जबकि कार्यक्रम में पहुंचे लोग श्रद्धांजलि और अपनी मांगें रखने के लिए जुटे थे। आगे की आधिकारिक जानकारी से हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई तथा संबंधित कार्रवाई की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
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