नवी मुंबई। पंजाब से लेकर महाराष्ट्र तक फैले नशीले पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क की जांच में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट का खुलासा हुआ है। इस नेटवर्क के तार पाकिस्तान और दुबई से जुड़े होने की बात सामने आई है। नवी मुंबई पुलिस के एंटी-नारकोटिक्स सेल ने पिछले साल के अंत में शुरू की गई जांच के दौरान तस्करी के संगठित नेटवर्क का पता लगाया। पुलिस की कार्रवाई में अब तक 10 मामले दर्ज किए गए हैं और 75 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा 6.34 करोड़ रुपये मूल्य के नशीले पदार्थों, हथियारों और अन्य संपत्तियों को जब्त किया गया है।
जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए पाकिस्तान से ड्रोन की मदद से नशीले पदार्थों को पंजाब पहुंचाया जाता था। इसके बाद तस्करी के सामान को ट्रेन और ट्रकों के माध्यम से मुंबई तथा नवी मुंबई तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी। इस पूरे नेटवर्क में अलग-अलग स्तर पर काम करने वाले लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस की कार्रवाई से न केवल स्थानीय स्तर पर सक्रिय तस्करी के नेटवर्क का पता चला है, बल्कि सीमा पार से संचालित होने वाली आपूर्ति व्यवस्था की कड़ियां भी सामने आई हैं।
ड्रोन से सीमा पार, फिर देश के भीतर परिवहन
पुलिस की जांच में सामने आया कि तस्करी का नेटवर्क कई चरणों में काम करता था। शुरुआती चरण में पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों को पंजाब पहुंचाया जाता था। सीमा पार से खेप पहुंचने के बाद उसे देश के भीतर अलग-अलग स्थानों तक ले जाने की व्यवस्था की जाती थी। इसके लिए रेल और सड़क परिवहन का इस्तेमाल किया जाता था।
जांच एजेंसियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सीमा पार से आने वाली खेप किस तरह पंजाब से आगे बढ़कर मुंबई और नवी मुंबई जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों तक पहुंच रही थी। ट्रेन और ट्रकों के इस्तेमाल से तस्करी के नेटवर्क को लंबी दूरी तक फैलाने में मदद मिलती थी। पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि परिवहन की इस व्यवस्था में कौन-कौन लोग शामिल थे और अलग-अलग स्थानों पर खेप की जिम्मेदारी किसके पास रहती थी।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ड्रोन से कितनी खेप पहुंचाई गईं, तस्करी कितने समय से चल रही थी और नेटवर्क के प्रत्येक चरण में कितने लोग सक्रिय थे। इन पहलुओं पर जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
75 आरोपियों की गिरफ्तारी, 10 मामले दर्ज
नवी मुंबई पुलिस के एंटी-नारकोटिक्स सेल ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 10 अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों के तहत कुल 75 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां इस बात की ओर संकेत करती हैं कि जांच के दायरे में नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को शामिल किया गया है।
नशीले पदार्थों की तस्करी में अक्सर आपूर्ति, परिवहन और वितरण की अलग-अलग जिम्मेदारियां होती हैं। हालांकि, इस मामले में गिरफ्तार प्रत्येक आरोपी की भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी गिरफ्तार आरोपी सीधे तौर पर सीमा पार से तस्करी में शामिल थे। उनकी भूमिका का निर्धारण जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
पुलिस की कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य नेटवर्क के उन हिस्सों की पहचान करना भी है, जो नशीले पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और आगे वितरण करने में मदद करते थे। इस तरह की जांच में केवल खेप जब्त करना ही नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की संरचना समझना भी अहम होता है।
6.34 करोड़ रुपये की जब्ती
इस अभियान के दौरान पुलिस ने 6.34 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त किए जाने की जानकारी दी है। जब्त किए गए सामान में 1,770.22 ग्राम हेरोइन और अफीम के साथ हथियार तथा अन्य संपत्तियां शामिल हैं।
नशीले पदार्थों की जब्ती इस जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हेरोइन और अफीम जैसे पदार्थों की अवैध तस्करी से जुड़े नेटवर्क को रोकने के लिए पुलिस को आपूर्ति के स्रोत से लेकर अंतिम वितरण तक की कड़ियों का पता लगाना पड़ता है। इस मामले में जब्त किए गए पदार्थों की मात्रा, उनकी आपूर्ति से जुड़े लोगों और अन्य बरामद सामान के संबंध में विस्तृत जानकारी जांच के आगे बढ़ने के साथ सामने आ सकती है।
जब्ती में शामिल हथियारों और अन्य संपत्तियों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता था, इसकी भी पुष्टि संबंधित जांच से ही होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि कितने हथियार जब्त किए गए और वे किन आरोपियों से बरामद हुए।
पाकिस्तान और दुबई से जुड़े तार
इस पूरे मामले का अंतरराष्ट्रीय पहलू जांच को और महत्वपूर्ण बनाता है। पुलिस की जांच में नेटवर्क के तार पाकिस्तान और दुबई से जुड़े होने की बात सामने आई है। पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए पंजाब में नशीले पदार्थ पहुंचाने और फिर उन्हें देश के दूसरे हिस्सों में ले जाने का तरीका सीमा पार तस्करी तथा देश के भीतर परिवहन के बीच संबंध की ओर इशारा करता है।
दुबई से जुड़े संपर्कों की सटीक भूमिका के बारे में अभी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि वहां से नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था, आर्थिक लेनदेन हो रहा था या तस्करी की किसी अन्य गतिविधि में संपर्कों का इस्तेमाल किया जाता था। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच के लिए वित्तीय लेनदेन, संचार और आरोपियों के आपसी संबंधों की पड़ताल महत्वपूर्ण होती है।
पुलिस के लिए यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि नेटवर्क का संचालन किन लोगों के हाथ में था और क्या इसके पीछे एक संगठित समूह काम कर रहा था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े सभी संपर्कों की भूमिका जांच पूरी होने और साक्ष्य सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बड़े शहरों तक पहुंचती नशीले पदार्थों की खेप
मुंबई और नवी मुंबई जैसे बड़े शहरी क्षेत्र परिवहन तथा व्यापार के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ऐसे क्षेत्रों तक नशीले पदार्थों की खेप पहुंचने का मामला कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती पेश करता है। इस मामले में पंजाब से महाराष्ट्र तक सामने आया कथित आपूर्ति मार्ग बताता है कि जांच केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रह सकती।
रेल और सड़क परिवहन के माध्यम से नशीले पदार्थों को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने की आशंका के कारण विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की आवश्यकता भी बढ़ जाती है। सीमा पर निगरानी, संदिग्ध परिवहन गतिविधियों की पहचान और तस्करी से जुड़े आर्थिक नेटवर्क की जांच इस तरह के मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
नवी मुंबई पुलिस की कार्रवाई से इस नेटवर्क के कई कथित सदस्यों तक पहुंचने में सफलता मिली है। हालांकि, पूरे रैकेट की संरचना, जब्त हथियारों का इस्तेमाल, दुबई से जुड़े संपर्कों की भूमिका और नशीले पदार्थों की अंतिम वितरण व्यवस्था जैसे सवालों के जवाब जांच के आगे बढ़ने के साथ सामने आएंगे।