BMC ने फायर सेफ्टी अप्रूवल नियमों में बदलाव किया

Update: 2026-05-23 04:32 GMT

Mumbai मुंबई: मुंबई में भवन निर्माण और अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने महाराष्ट्र फायर प्रिवेंशन एंड लाइफ सेफ्टी मेज़र्स एक्ट, 2006 (अमेंडमेंट 2026) के तहत अपने फायर सेफ्टी अप्रूवल फ्रेमवर्क को संशोधित किया है। नए प्रावधानों के अनुसार, बिल्डिंग प्लान अप्रूवल चरण में जारी किया जाने वाला “प्रोविजनल फायर सेफ्टी अप्रूवल” अब केवल एक सिफारिश (रिकमेंडेशन) माना जाएगा, न कि आधिकारिक फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट।

नगर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह प्रोविजनल मंजूरी किसी भी स्थिति में अंतिम फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र का स्थान नहीं ले सकती। इसका उद्देश्य केवल प्रारंभिक स्तर पर परियोजना की फायर सेफ्टी आवश्यकताओं का आकलन करना होता है, जबकि वास्तविक निर्माण कार्य और अंतिम निरीक्षण के बाद ही फाइनल फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है।

सिविक अधिकारियों के अनुसार, हाल के समय में कई मामलों में यह देखा गया कि प्रोविजनल फायर सेफ्टी अप्रूवल को ही अंतिम मंजूरी मान लिया जा रहा था। इससे निर्माण परियोजनाओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी और नियमों की व्याख्या गलत तरीके से की जा रही थी। कुछ मामलों में बिना उचित प्रक्रिया पूरी किए ही निर्माण कार्य आगे बढ़ने की शिकायतें भी सामने आई थीं।

इन स्थितियों को देखते हुए BMC ने अपने फायर सेफ्टी अप्रूवल सिस्टम में स्पष्टता लाने का निर्णय लिया है। संशोधित फ्रेमवर्क का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर स्तर पर फायर सेफ्टी नियमों का सही पालन हो और किसी भी तरह की गलत व्याख्या या दुरुपयोग को रोका जा सके।

अधिकारियों ने बताया कि नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रोविजनल अप्रूवल केवल एक तकनीकी मार्गदर्शन के रूप में कार्य करेगा, जिसका उपयोग निर्माण की योजना तैयार करने में किया जा सकता है। लेकिन इसे अंतिम अनुमति या प्रमाणपत्र के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी।

BMC का कहना है कि यह कदम शहर में भवन सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना या लापरवाही से बचने के लिए उठाया गया है। फायर सेफ्टी से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से बिल्डिंग डेवलपर्स और आर्किटेक्ट्स को नियमों की बेहतर समझ मिलेगी और निर्माण प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी। साथ ही, यह सुनिश्चित होगा कि फायर सेफ्टी मानकों का पालन केवल कागजी औपचारिकता न रहकर वास्तविक सुरक्षा उपायों में लागू हो।

नगर निकाय ने सभी संबंधित विभागों और डेवलपर्स को नए नियमों की जानकारी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की गलतफहमी से बचा जा सके।

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