'ऑपरेशन म्यूल हंट' के तहत 152 गिरफ्तार, साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर पुलिस का बड़ा प्रहार

Update: 2026-08-01 14:43 GMT
Pune पुणे। साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों के खिलाफ पुणे पुलिस ने बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए 'ऑपरेशन म्यूल हंट' अभियान के तहत अब तक 132 म्यूल अकाउंट धारकों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं और 152 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह अभियान पुणे पुलिस और महाराष्ट्र साइबर के संयुक्त समन्वय से चलाया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी ऑनलाइन ठगी से हासिल रकम को छिपाने और एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए म्यूल खातों का इस्तेमाल करते हैं। इन्हीं खातों के जरिए साइबर अपराधियों का आर्थिक नेटवर्क संचालित होता है। अभियान का उद्देश्य इस नेटवर्क को तोड़कर साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
पुणे पुलिस ने बताया कि समन्वय पोर्टल के माध्यम से अन्य राज्यों से प्राप्त 1,705 नोटिसों पर कार्रवाई जारी है। वहीं, पुणे से दूसरे राज्यों के म्यूल अकाउंट धारकों को 2,099 नोटिस भेजे गए हैं। जांच के दौरान पुणे, मुंबई, नवी मुंबई, छत्रपति संभाजीनगर सहित अन्य राज्यों से आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और कई मामलों में अदालत में आरोप पत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जांच के दौरान बैंक लेन-देन, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजैक्शन और साइबर अपराधियों से जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जो लोग पैसे या किसी लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड या अन्य दस्तावेज साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते हैं, उन्हें भी सह-आरोपी बनाकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुणे पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, नेट बैंकिंग की जानकारी, ओटीपी, सिम कार्ड, मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी, आधार या पैन कार्ड जैसी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। पुलिस ने कहा कि साइबर अपराधियों की मदद करने वालों की जानकारी तत्काल नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस को दें।
पुलिस के मुताबिक वर्ष 2026 में शहर में साइबर सुरक्षा को लेकर 1,142 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से करीब तीन लाख लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया। इसके अलावा 'कैंपस कनेक्ट सेफ होराइजन' अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, आईटी कंपनियों, हाउसिंग सोसायटियों और सरकारी कार्यालयों में भी व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
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