इंदौर। मध्य प्रदेश के सहकारी डेयरी ब्रांड ‘सांची’ ने अपनी 45 साल पुरानी विरासत को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इंदौर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में सांची की नई ब्रांड पहचान और नए पैकेजिंग डिजाइन को आधिकारिक रूप से पेश किया गया। नई पहचान में परंपरा, आधुनिकता और मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का समावेश किया गया है। पैकेजिंग में किए गए बदलाव का उद्देश्य उपभोक्ताओं के बीच सांची की पहचान को और मजबूत करना तथा बदलते बाजार के अनुरूप ब्रांड को नया स्वरूप देना है।

इंदौर के एग्रीकल्चर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में डेयरी क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख अधिकारी, प्रतिनिधि, डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर मौजूद रहे। कार्यक्रम में जॉइंट कमिश्नर पुरुषोत्तम पाटीदार, मध्य प्रदेश कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (MPCDF) के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर संजय गोवानी, इंदौर दुग्ध संघ के CEO विशाल मिश्रा और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के ग्रुप हेड (मार्केटिंग) स्वप्निल सिन्हा सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान सांची की नई ब्रांड पहचान, पैकेजिंग की अवधारणा और इसके पीछे की सोच के बारे में जानकारी दी गई।

नई पैकेजिंग में सांची के पारंपरिक स्वरूप को बरकरार रखते हुए उसे आधुनिक और आकर्षक डिजाइन से जोड़ा गया है। पैकेजिंग में आधुनिक रंगों के साथ एक समान लेआउट अपनाया गया है, जिससे अलग-अलग उत्पादों के बीच ब्रांड की एकरूपता नजर आएगी। नए डिजाइन का उद्देश्य बाजार में सांची के उत्पादों को आसानी से पहचाने जाने योग्य बनाना है। पैकेजिंग को इस तरह तैयार किया गया है कि वह खुदरा बाजार के साथ-साथ आधुनिक रिटेल और नए उपभोक्ता वर्ग की पसंद के अनुरूप भी दिखाई दे।

इस नई पहचान की खास बात इसमें शामिल गोंड कला से प्रेरित डिजाइन हैं। पैकेजिंग पर मध्य प्रदेश की लोक एवं जनजातीय कला की झलक दिखाई गई है। डिजाइन में गाय, ग्रामीण जीवन, दूध उत्पादन और महिला डेयरी किसानों जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई है। इसके जरिए सांची ने केवल उत्पाद को आकर्षक बनाने की कोशिश नहीं की है, बल्कि दूध उत्पादन से जुड़े ग्रामीण समाज और किसानों की भूमिका को भी ब्रांड की पहचान का हिस्सा बनाया है।

नई पैकेजिंग में महिला डेयरी किसानों को विशेष रूप से दर्शाया जाना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य प्रदेश के डेयरी सहकारी क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार दूध उत्पादन से जुड़े हैं और महिलाओं की इसमें अहम भूमिका रहती है। ऐसे में पैकेजिंग के माध्यम से महिला किसानों को स्थान देना सांची के सहकारी मॉडल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े उसके आधार को सामने लाता है। गाय और ग्रामीण जीवन से जुड़े चित्र सांची की जड़ों को भी रेखांकित करते हैं।

सांची की नई ब्रांड पहचान ऐसे समय में सामने आई है, जब डेयरी बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। उपभोक्ता अब केवल उत्पाद की गुणवत्ता और कीमत ही नहीं, बल्कि उसकी पैकेजिंग, ब्रांड पहचान और प्रस्तुति को भी महत्व देते हैं। ऐसे में लंबे समय से बाजार में मौजूद सहकारी ब्रांडों के लिए अपनी पारंपरिक पहचान को बनाए रखते हुए आधुनिक उपभोक्ताओं के साथ जुड़ना महत्वपूर्ण हो गया है। सांची की नई पैकेजिंग को इसी बदलाव की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

45 वर्षों की विरासत के साथ सांची मध्य प्रदेश में डेयरी सहकारिता की पहचान बन चुका है। गांवों से दूध संग्रहण से लेकर उसे प्रसंस्कृत कर उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था में सहकारी ढांचे की महत्वपूर्ण भूमिका है। नई ब्रांड पहचान के माध्यम से इस लंबे सफर को आधुनिक बाजार की जरूरतों के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है। ब्रांड की पुरानी पहचान को पूरी तरह बदलने के बजाय उसके मूल भाव को बरकरार रखते हुए दृश्य स्वरूप में बदलाव किया गया है।

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने नई पहचान को लेकर चर्चा की। डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर की मौजूदगी इस बदलाव को बाजार स्तर तक पहुंचाने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रही। नई पैकेजिंग के माध्यम से सांची के विभिन्न उत्पादों को एक समान ब्रांड भाषा देने पर जोर दिखाई दिया। इससे उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग उत्पाद श्रेणियों में सांची की पहचान करना आसान होने की उम्मीद है।

नई ब्रांडिंग में स्थानीय संस्कृति को शामिल करना भी सांची के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। गोंड कला से प्रेरित चित्रों के जरिए ब्रांड ने मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को अपने उत्पादों से जोड़ने की कोशिश की है। इससे पैकेजिंग को केवल व्यावसायिक प्रस्तुति के बजाय क्षेत्रीय विरासत और ग्रामीण जीवन की कहानी बताने वाला स्वरूप मिलता है।

सांची की नई पहचान में आधुनिक डिजाइन और स्थानीय संस्कृति का यह मेल आने वाले समय में ब्रांड की बाजार रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। एक ओर जहां आकर्षक और एकरूप पैकेजिंग आधुनिक उपभोक्ताओं का ध्यान खींचने में मदद करेगी, वहीं दूसरी ओर गोंड कला और ग्रामीण जीवन से जुड़े चित्र ब्रांड को उसकी स्थानीय जड़ों से जोड़े रखेंगे।

कुल मिलाकर, इंदौर में नई ब्रांड पहचान और पैकेजिंग का अनावरण सांची के लिए केवल डिजाइन में बदलाव नहीं, बल्कि 45 वर्षों की सहकारी विरासत को नए दौर के उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की पहल के रूप में देखा जा सकता है। दूध, किसान, ग्रामीण जीवन और मध्य प्रदेश की कला को केंद्र में रखकर तैयार की गई यह नई पहचान सांची को आधुनिक बाजार में एक नया और अधिक समकालीन स्वरूप देने की कोशिश है।

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