इंदौर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर के शोधकर्ताओं ने मल्टीलिंगुअल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम में लंबे समय से मौजूद एक महत्वपूर्ण समस्या के समाधान की दिशा में नया AI आधारित स्पीच ट्रांसलेशन टूल विकसित किया है। इस तकनीक का नाम HGAST यानी Hierarchical Gender Arbitration for Speech Translation रखा गया है। इसका उद्देश्य अंग्रेजी से हिंदी, मराठी और गुजराती जैसी भारतीय भाषाओं में अनुवाद के दौरान होने वाली जेंडर संबंधी गलतियों को कम करना है।

स्पीच ट्रांसलेशन सिस्टम आमतौर पर किसी व्यक्ति की आवाज को पहचानकर उसे दूसरी भाषा में बदलते हैं। लेकिन कई बार यह सिस्टम बोलने वाले व्यक्ति के जेंडर की सही पहचान नहीं कर पाता। इसका असर खासतौर पर उन भाषाओं में ज्यादा दिखाई देता है, जहां वाक्य की संरचना, क्रिया और शब्दों का रूप बोलने वाले के जेंडर के आधार पर बदलता है।

हिंदी, मराठी और गुजराती जैसी कई भारतीय भाषाओं में पुरुष और महिला वक्ता के लिए क्रियाओं के रूप अलग-अलग हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर हिंदी में “मैं गया” और “मैं गई” दोनों का अर्थ लगभग समान परिस्थिति से जुड़ा हो सकता है, लेकिन इनमें वक्ता के जेंडर का स्पष्ट अंतर होता है। यदि AI सिस्टम इस अंतर को सही तरीके से नहीं पहचानता तो अनुवाद व्याकरणिक रूप से गलत या संदर्भ से बाहर हो सकता है।

IIT इंदौर के शोधकर्ताओं का कहना है कि यही समस्या मौजूदा मल्टीलिंगुअल AI मॉडल में अक्सर नजरअंदाज हो जाती है। अंग्रेजी जैसी भाषा में कई वाक्यों में बोलने वाले का जेंडर स्पष्ट नहीं होता, जबकि भारतीय भाषाओं में उसी वाक्य का अनुवाद करते समय सही जेंडर चुनना जरूरी हो सकता है।

HGAST को इसी चुनौती से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। यह सिस्टम केवल शब्दों और वाक्यों का अनुवाद करने पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि स्पीच से मिलने वाली जानकारी को भी शामिल करता है। आवाज से जुड़े संकेतों का इस्तेमाल करके यह समझने की कोशिश की जाती है कि वक्ता का जेंडर क्या हो सकता है और अनुवाद में किस व्याकरणिक रूप का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य AI सिस्टम में जेंडर बायस को कम करना है। कई बार AI मॉडल अपने प्रशिक्षण डेटा में मौजूद पैटर्न के आधार पर कुछ पेशों, भूमिकाओं या वाक्यों को किसी खास जेंडर से जोड़ देते हैं। इससे अनुवाद में ऐसी गलतियां हो सकती हैं, जिनका मूल वाक्य में कोई आधार नहीं होता।

शोधकर्ताओं ने इस समस्या को केवल भाषा संबंधी गलती के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे AI की निष्पक्षता और विश्वसनीयता से भी जोड़ा है। यदि किसी व्यक्ति की कही हुई बात का अनुवाद उसके जेंडर को गलत तरीके से बदल देता है तो इससे संदेश का अर्थ और संदर्भ दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

HGAST की खासियत इसका हायरार्किकल यानी चरणबद्ध निर्णय तंत्र है। इसका मतलब है कि सिस्टम जेंडर तय करने के लिए किसी एक संकेत पर निर्भर नहीं रहता। यह अलग-अलग स्तरों से मिलने वाली जानकारी को मिलाकर अंतिम निर्णय लेने की कोशिश करता है।

इस प्रक्रिया में स्पीच सिग्नल, भाषा की संरचना और अनुवाद के संदर्भ जैसे कई संकेतों को शामिल किया जा सकता है। इससे मॉडल को उन मामलों में भी बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है जहां केवल लिखित टेक्स्ट से वक्ता का जेंडर समझना मुश्किल होता है।

भारतीय भाषाओं में इस तरह की तकनीक का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यहां कई भाषाओं में व्याकरणिक जेंडर का प्रभाव व्यापक है। केवल सर्वनाम ही नहीं, बल्कि क्रियाएं, विशेषण और कई दूसरे शब्द भी जेंडर के मुताबिक बदल सकते हैं।

ऐसी स्थिति में यदि AI सिस्टम शुरुआती स्तर पर जेंडर की गलत पहचान कर ले तो पूरी अनुवादित लाइन में कई व्याकरणिक गलतियां हो सकती हैं। HGAST इस तरह की लगातार होने वाली त्रुटियों को रोकने की दिशा में काम करता है।

शोध का एक बड़ा फोकस अंग्रेजी से भारतीय भाषाओं में स्पीच ट्रांसलेशन पर रखा गया है। अंग्रेजी में कई ऐसे वाक्य होते हैं जिनमें बोलने वाले के जेंडर का पता सीधे शब्दों से नहीं चलता। दूसरी ओर हिंदी या मराठी में उनका स्वाभाविक अनुवाद तैयार करने के लिए वक्ता का जेंडर जानना जरूरी हो सकता है।

ऐसे मामलों में सामान्य AI मॉडल अनुमान लगा सकते हैं और यही अनुमान कई बार गलत साबित होता है। शोधकर्ताओं ने HGAST के जरिए इस अनुमान को अधिक व्यवस्थित और सटीक बनाने की कोशिश की है।

तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में वर्चुअल असिस्टेंट, लाइव ट्रांसलेशन सिस्टम, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, शिक्षा, डिजिटल कंटेंट और बहुभाषी संचार प्लेटफॉर्म में किया जा सकता है। जहां अलग-अलग भाषाओं के बीच रियल टाइम अनुवाद की जरूरत होती है, वहां जेंडर संबंधी सटीकता उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बना सकती है।

भारत जैसे बहुभाषी देश में स्पीच ट्रांसलेशन तकनीक का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। सरकारी सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राहक सहायता और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग भाषाओं के बीच संवाद की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल शब्दों का सही अनुवाद पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक और व्याकरणिक संदर्भ को भी सही रखना जरूरी है।

HGAST का विकास इसी दिशा में एक प्रयास माना जा रहा है। शोधकर्ताओं का लक्ष्य ऐसा AI सिस्टम तैयार करना है जो भाषा की संरचना को अधिक संवेदनशील तरीके से समझे और अनावश्यक जेंडर अनुमान से बचे।

यह शोध व्यापक AI बायस की समस्या से भी जुड़ा है। दुनिया भर में AI मॉडल में जेंडर, भाषा और सांस्कृतिक पक्षपात को लेकर लगातार अध्ययन किए जा रहे हैं। प्रशिक्षण डेटा में मौजूद असंतुलन कई बार मॉडल के जवाबों में भी दिखाई देता है।

IIT इंदौर की इस तकनीक का फोकस खासतौर पर स्पीच ट्रांसलेशन में ऐसी गलतियों को नियंत्रित करना है। यदि यह मॉडल बड़े स्तर पर सफल रहता है तो भविष्य के बहुभाषी AI सिस्टम को अधिक सटीक और निष्पक्ष बनाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल HGAST को अंग्रेजी से हिंदी, मराठी और गुजराती जैसी भाषाओं के संदर्भ में विकसित किया गया है। आगे इस तरह की तकनीक को अन्य भारतीय भाषाओं तक भी विस्तारित किया जा सकता है, खासकर उन भाषाओं में जहां जेंडर आधारित व्याकरणिक बदलाव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

IIT इंदौर के शोधकर्ताओं का यह प्रयास दिखाता है कि AI के विकास में केवल गति और अनुवाद क्षमता ही नहीं, बल्कि भाषा की सामाजिक और व्याकरणिक बारीकियों को समझना भी जरूरी है। HGAST इसी दिशा में बनाया गया एक ऐसा उपकरण है, जो स्पीच ट्रांसलेशन को अधिक सटीक, संवेदनशील और भरोसेमंद बनाने की कोशिश करता है।

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