इंदौर। श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी SAIMS में स्थित IRCADE-इंडिया सेंटर एडवांस्ड मेडिकल ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा कॉन्फ्रेंस के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। इसी क्रम में यहां आयोजित ‘EndospineCon 2026’ में भारत और विदेश से आए 100 से अधिक डेलीगेट्स ने हिस्सा लिया। कॉन्फ्रेंस में एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रही तकनीकों, सर्जिकल प्रक्रियाओं और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

इस सम्मेलन का आयोजन इंदौर स्पाइनल वेलफेयर सोसाइटी और इंदौर स्पाइन सर्जन्स एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से किया। कॉन्फ्रेंस की थीम “From Learning Curve to Global Excellence” यानी “लर्निंग कर्व से ग्लोबल एक्सीलेंस तक” रखी गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में काम कर रहे डॉक्टरों और विशेषज्ञों को एंडोस्कोपिक तकनीकों से जुड़ी आधुनिक जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना था।

आयोजकों के मुताबिक सम्मेलन में देश-विदेश से आए जाने-माने स्पाइन सर्जन और विशेषज्ञ शामिल हुए। उन्होंने एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी में हाल के वर्षों में हुई प्रगति, मरीजों के चयन, ऑपरेशन की योजना, संभावित जटिलताओं और बेहतर परिणाम हासिल करने के तरीकों पर अपने अनुभव साझा किए।

एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी को न्यूनतम चीरे वाली सर्जिकल तकनीकों में गिना जाता है। इस प्रक्रिया में आधुनिक एंडोस्कोपिक उपकरणों की मदद से रीढ़ से संबंधित कुछ बीमारियों का उपचार किया जाता है। सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने इस तकनीक को सुरक्षित और प्रभावी तरीके से अपनाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया।

EndospineCon 2026 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में ‘हैंड्स-ऑन कैडेवरिक वर्कशॉप’ शामिल रही। इस कार्यशाला में सर्जनों को नियंत्रित प्रशिक्षण वातावरण में एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। इसका उद्देश्य वास्तविक ऑपरेशन थिएटर में किसी तकनीक का उपयोग करने से पहले सर्जनों को उसकी बारीकियों से अच्छी तरह परिचित कराना था।

वर्कशॉप के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न सर्जिकल अप्रोच के बारे में बताया गया। विशेषज्ञों ने यह समझाया कि अलग-अलग स्थितियों में किस रास्ते से सर्जिकल क्षेत्र तक पहुंचना अधिक उपयुक्त हो सकता है। इसके साथ ही उपकरणों की सही स्थिति, कैमरे के इस्तेमाल और सर्जरी के दौरान आवश्यक सावधानियों पर भी प्रशिक्षण दिया गया।

तकनीकी बारीकियों के साथ संभावित चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। आयोजकों के अनुसार एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी में सटीकता बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए केवल सैद्धांतिक जानकारी पर्याप्त नहीं है। सर्जन को उपकरणों को संभालने, शरीर की संरचना को स्पष्ट रूप से पहचानने और अप्रत्याशित परिस्थिति आने पर सही निर्णय लेने का अनुभव भी होना चाहिए।

कैडेवरिक ट्रेनिंग का उद्देश्य इसी अंतर को कम करना है। इससे डॉक्टरों को ऑपरेशन थिएटर के बाहर अभ्यास करने और नई तकनीकों को समझने का अवसर मिलता है। प्रशिक्षण के दौरान वरिष्ठ विशेषज्ञों की मौजूदगी में प्रतिभागियों ने विभिन्न प्रक्रियाओं का अभ्यास किया और उनसे जुड़े सवाल भी पूछे।

सम्मेलन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में तकनीक तेजी से बदल रही है। नए उपकरण, बेहतर इमेजिंग सिस्टम और कम इनवेसिव तकनीकों के कारण कई मामलों में उपचार के विकल्प बढ़े हैं। ऐसे में डॉक्टरों के लिए लगातार प्रशिक्षण और नई तकनीकों से अपडेट रहना जरूरी हो गया है।

IRCADE-इंडिया सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर भी दिया। भारतीय सर्जनों ने विदेशी विशेषज्ञों के अनुभवों और तकनीकों को समझा, जबकि अलग-अलग देशों से आए प्रतिनिधियों को भारत में विकसित हो रहे मेडिकल ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जानकारी मिली।

आयोजकों का कहना है कि इस तरह की कॉन्फ्रेंस केवल व्याख्यान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। चिकित्सा के क्षेत्र में व्यावहारिक प्रशिक्षण का महत्व काफी अधिक है। इसी वजह से EndospineCon 2026 में लेक्चर, विशेषज्ञ चर्चा और हैंड्स-ऑन वर्कशॉप को एक साथ जोड़ा गया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्लीनिकल परिस्थितियों पर भी विशेषज्ञों के बीच चर्चा हुई। मरीज के लिए सही प्रक्रिया का चुनाव कैसे किया जाए, किन मामलों में एंडोस्कोपिक तकनीक उपयोगी हो सकती है और किन परिस्थितियों में पारंपरिक सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है, जैसे विषयों पर विचार साझा किए गए।

सर्जरी के बाद मरीज की देखभाल और परिणामों के मूल्यांकन को भी कॉन्फ्रेंस का हिस्सा बनाया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी नई सर्जिकल तकनीक की सफलता केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं होती। मरीज की रिकवरी, दर्द में कमी और सामान्य गतिविधियों में वापसी जैसे पहलुओं का भी लगातार आकलन जरूरी है।

EndospineCon 2026 में 100 से अधिक भारतीय और विदेशी प्रतिनिधियों की भागीदारी ने कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप दिया। अलग-अलग संस्थानों और क्षेत्रों से आए डॉक्टरों को अपने अनुभव साझा करने और नेटवर्क बनाने का अवसर मिला।

SAIMS स्थित IRCADE-इंडिया में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन से इंदौर भी उन्नत चिकित्सा शिक्षा और सर्जिकल ट्रेनिंग के केंद्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। आयोजकों के अनुसार भविष्य में भी आधुनिक चिकित्सा तकनीकों पर आधारित प्रशिक्षण, कार्यशालाएं और अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित करने पर जोर रहेगा।

EndospineCon 2026 का मुख्य संदेश आधुनिक तकनीक के साथ मजबूत प्रशिक्षण को जोड़ना रहा। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी जैसी तकनीकों में बेहतर परिणाम के लिए व्यवस्थित ट्रेनिंग, लगातार अभ्यास और अनुभवी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका है।

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