Raisen, रायसेन। गरीबों को राशन पानी के लिए अभी भी राशन दुकानों के बाहर घंटे खड़ा होना पड़ रहा है। जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और अनदेखी की वजह से समय पर जिले के इन राशन दुकानों पर राशन नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसी स्थिति में जल्द राशन पहुंचाने के उद्देश्य अन्नदूत वाहनों में ओवरलोडिंग परिवहन भी किया जा रहा है। जो कि नियम विरुद्ध है।
तमाम नियम कायदों को ताक पर रखकर क्षमता से ज्यादा राशन इन अन्नदूत वाहनों में लादा जा रहा है।इसके पूर्व इस ओवरलोडिंग की शिकायत सीएम डॉ मोहन यादव तक गई। लेकिन जिले के अफसर आंखें मूंदे बैठे हुए हैं। गौर तलब है कि राशन दुकानों में राशन के परिवहन के लिए प्रदेश की डॉ मोहन सरकार द्वारा गांव के युवाओं को रोजगार देने के लिए अन्नदूतध योजना शुरू की है। जिसके तहत फूड विभाग रायसेन ने सेक्टर बार वाहन किराए पर भी लगाए हैं।
लेकिन पर्याप्त मात्रा में अनाज उपलब्ध नहीं होने के कारण राशन परिवहन में देरी हो रही है। कम समय में ज्यादा राशन परिवहन करने इन अनिरुद्ध वाहनों में ज्यादा राशन भेजा जा रहा है। वह भी ओवरलोडिंग अनाज। अन्नदूत के वाहनों का संचालन करने वाले मुखियाओं नए जिले की परिवहन व्यवस्था वह अपने हाथ में ले लिया है। जहां एक तरफ नियमों को तात्पर्य रखकर निर्धारित क्षमता से अधिक अनाज धड़ल्ले से परिवहन किया जा रहा है। वही राशन का परिवहन जल्द कराने अतिरिक्त वहां भी खड़े किए गए हैं।
क्षमता 7:30 टन, अन्नदूत वाहनों में ट्रांसपोर्ट हो रहा दुगना राशन...
एएफओ संदीप भार्गव ने बताया कि अन्नदूत वाहन योजना के तहत वाहनों की लोडिंग क्षमता 7 टन होती है।लेकिन जिले में संचालित अन्नदूत वाहन में 17 टन राशन दुकानों पर भेजा जा रहा है। जिम्मेदार विभाग के अफसर की अंधे की और लापरवाही की वजह से ओवरलोड राशन से भारी वाहन सड़कों पर सरपट दौड़ रहे हैं।
अतिरिक्त वाहनों में कोई नियम नहीं....
जिले में पूर्व में राशन परिवहन की व्यवस्था ट्रांसपोटरों के हाथों पर आधारित थी। क्योंकि वर्तमान में अब जिला खाद एवं आपूर्ति विभाग को मिल गई है। ऐसे में अब पूर्व ट्रांसपोर्टर बैक डोर से इसमें घुस गए हैं। वह अपने वाहनों को संबंधित संबंधित विभाग में अतिरिक्त वाहनों के रूप में प्रवेश कर चुके हैं। जबकि इस विभाग में अतिरिक्त वाहन लगाना नियम में शामिल नहीं है।
किराए के वाहन चालक चला रहे अन्नदूत वाहन ...…
दरअसल शासन ने बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से यह अन्नदूत योजना संचालित की थी। लेकिन इन वाहनों को पाने वाले हितग्राहियों ने अपने लायसेंस लगाकर हर महीने किराए पर ड्राइवर रख लिए हैं।