इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में बुधवार को उच्च शिक्षा संस्थानों में मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज यानी MOOCs को लागू करने को लेकर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन कंसोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन (CEC) और एजुकेशनल मल्टीमीडिया रिसर्च सेंटर (EMRC) के सहयोग से किया गया। इसमें DAVV के साथ मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालय से संबद्ध सरकारी और निजी कॉलेजों के करीब 110 फैकल्टी सदस्यों ने भाग लिया।

राष्ट्रीय कार्यशाला का विषय "UGC रेगुलेशन 2021 के तहत HEI में मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज (MOOCs) को लागू करना" रहा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के प्रभावी उपयोग, उनके क्रियान्वयन और विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत में EMRC के डायरेक्टर चंदन गुप्ता ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने ऑनलाइन शिक्षा के बदलते स्वरूप और उच्च शिक्षा में डिजिटल माध्यमों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के बाद ऑनलाइन शिक्षा की जरूरत और स्वीकार्यता में आए बदलावों का उल्लेख किया गया।

चंदन गुप्ता ने कहा कि कोविड-19 के बाद शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। महामारी के दौरान जब पारंपरिक कक्षाओं का संचालन प्रभावित हुआ तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच महत्वपूर्ण माध्यम बनकर सामने आए। इसके बाद ऑनलाइन शिक्षा को केवल वैकल्पिक व्यवस्था के बजाय नियमित शैक्षणिक प्रणाली के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जाने लगा।

उन्होंने SWAYAM MOOCs को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। SWAYAM प्लेटफॉर्म के माध्यम से विद्यार्थी विभिन्न विषयों से जुड़े ऑनलाइन पाठ्यक्रमों तक पहुंच सकते हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता और रुचि के अनुसार गुणवत्तापूर्ण पाठ्यक्रम उपलब्ध कराना तथा उच्च शिक्षा में डिजिटल लर्निंग के अवसरों का विस्तार करना है।

कार्यशाला में UGC रेगुलेशन 2021 के तहत MOOCs को उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू करने की प्रक्रिया पर चर्चा की गई। इसमें यह समझाने का प्रयास किया गया कि विश्वविद्यालय और कॉलेज ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को अपने शैक्षणिक ढांचे में किस प्रकार शामिल कर सकते हैं और विद्यार्थियों को इसका अधिकतम लाभ कैसे दिया जा सकता है।

कार्यक्रम में शामिल करीब 110 फैकल्टी सदस्यों के लिए यह कार्यशाला ऑनलाइन शिक्षा और MOOCs से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर बनी। सरकारी और निजी दोनों तरह के कॉलेजों के शिक्षकों की भागीदारी से उच्च शिक्षा में डिजिटल पाठ्यक्रमों के व्यापक उपयोग पर विचार-विमर्श किया गया।

MOOCs का सबसे बड़ा लाभ यह है कि विद्यार्थी स्थान और समय की सीमाओं से काफी हद तक मुक्त होकर विभिन्न पाठ्यक्रमों का अध्ययन कर सकते हैं। किसी विशेष विषय में अतिरिक्त ज्ञान हासिल करने या अपने नियमित पाठ्यक्रम से अलग नई स्किल सीखने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए भी ऑनलाइन कोर्स महत्वपूर्ण विकल्प बन सकते हैं।

उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप में डिजिटल संसाधनों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। पारंपरिक कक्षा शिक्षण के साथ ऑनलाइन सामग्री का इस्तेमाल विद्यार्थियों को अतिरिक्त अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने में मदद करता है। वीडियो लेक्चर, डिजिटल स्टडी मटेरियल और ऑनलाइन मूल्यांकन जैसी सुविधाओं ने पढ़ाई के तरीकों को भी बदला है।

CEC और EMRC जैसे संस्थानों की भूमिका इस संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जाती है। शैक्षणिक मल्टीमीडिया सामग्री तैयार करने और उसे विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल ऑनलाइन शिक्षा को अधिक उपयोगी बना सकता है। गुणवत्तापूर्ण डिजिटल सामग्री उपलब्ध होने से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थी भी विशेषज्ञ शिक्षकों और विभिन्न पाठ्यक्रमों तक पहुंच बना सकते हैं।

कार्यशाला में शिक्षकों की भूमिका पर भी विशेष ध्यान रहा। MOOCs को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। शिक्षकों को भी ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की संरचना, सामग्री, विद्यार्थियों की भागीदारी और मूल्यांकन की प्रक्रिया को समझना जरूरी है। इसी कारण फैकल्टी सदस्यों को ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उच्च शिक्षा संस्थानों में MOOCs लागू होने से विद्यार्थियों को अपने नियमित पाठ्यक्रम के साथ अतिरिक्त विषयों की पढ़ाई का अवसर मिल सकता है। साथ ही विभिन्न संस्थानों की विशेषज्ञता का लाभ भी अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है। डिजिटल शिक्षा की यही विशेषता इसे पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण पूरक बनाती है।

कोविड महामारी के बाद से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों ने डिजिटल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को भी तेजी से विकसित किया है। ऑनलाइन कक्षाओं से शुरू हुआ बदलाव अब डिजिटल पाठ्यक्रम, वर्चुअल लर्निंग और ऑनलाइन मूल्यांकन तक पहुंच चुका है। ऐसे में MOOCs को उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यवस्थित रूप से शामिल करना भविष्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

DAVV में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को UGC के नियमों और MOOCs के क्रियान्वयन से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। इससे शिक्षक अपने संस्थानों में विद्यार्थियों को ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के बारे में बेहतर मार्गदर्शन दे सकेंगे।

कार्यक्रम में DAVV और उससे संबद्ध सरकारी तथा निजी कॉलेजों की व्यापक भागीदारी ने यह भी दिखाया कि ऑनलाइन शिक्षा को लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों में रुचि बढ़ रही है। डिजिटल माध्यमों के जरिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के जरिए उच्च शिक्षा में तकनीक और ऑनलाइन लर्निंग के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया गया। UGC रेगुलेशन 2021 के तहत MOOCs को लागू करने और SWAYAM जैसे प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने की दिशा में यह आयोजन शिक्षकों को जानकारी और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम बना।

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