महू। मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (MCTE) महू में 2 सितंबर को ग्रेजुएट एंट्री इक्विपमेंट ओरिएंटेशन-59 यानी GEEO-59 कोर्स का दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। समारोह में प्रशिक्षण पूरा करने वाले 24 अधिकारियों को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) नागपुर की ओर से इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा प्रदान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिग्नल ऑफिसर-इन-चीफ और कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल विवेक डोगरा (SM) ने की।

दीक्षांत समारोह सैन्य संचार और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। GEEO-59 कोर्स पूरा करने वाले अधिकारियों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उन्नत प्रशिक्षण दिया गया है। बदलती सैन्य चुनौतियों के बीच आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम, डिजिटल नेटवर्क और नई तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इस तरह के प्रशिक्षण को भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

समारोह को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल विवेक डोगरा ने नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर में संचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में सूचना और संचार नेटवर्क का महत्व तेजी से बढ़ा है। युद्ध के मैदान में विभिन्न सैन्य इकाइयों और कमांड स्तरों के बीच सुरक्षित तथा तेज संचार प्रभावी सैन्य कार्रवाई के लिए बेहद जरूरी है।

नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर में अलग-अलग सैन्य संसाधनों, कमांड सेंटरों, सैनिकों और तकनीकी प्रणालियों को एक नेटवर्क के माध्यम से जोड़ने पर जोर दिया जाता है। इससे युद्धक्षेत्र की सूचनाओं को तेजी से साझा करने और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने में मदद मिलती है। ऐसे माहौल में कम्युनिकेशन सिस्टम की विश्वसनीयता और सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

लेफ्टिनेंट जनरल डोगरा ने उभरती हुई तकनीकों के कन्वर्जेंस यानी अलग-अलग आधुनिक तकनीकों के एक साथ आने की प्रक्रिया को भी महत्वपूर्ण बताया। वर्तमान समय में संचार प्रौद्योगिकी केवल पारंपरिक रेडियो या नेटवर्क तक सीमित नहीं रह गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्रोसेसिंग, साइबर तकनीक, आधुनिक नेटवर्किंग और अन्य डिजिटल प्रणालियों के बढ़ते उपयोग ने सैन्य संचार के स्वरूप को बदल दिया है।

इसी बदलाव को देखते हुए सैन्य अधिकारियों के लिए तकनीकी कौशल को लगातार अपडेट करना आवश्यक हो गया है। MCTE में संचालित होने वाले पाठ्यक्रम अधिकारियों को आधुनिक संचार प्रणालियों और बदलते तकनीकी वातावरण के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। GEEO-59 कोर्स भी इसी दिशा में अधिकारियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने से जुड़ा है।

इस कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले सभी 24 अधिकारियों को IIIT नागपुर से इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा दिया गया। सैन्य प्रशिक्षण संस्थान और उच्च शिक्षण संस्थान के बीच इस तरह का अकादमिक जुड़ाव अधिकारियों को सैन्य आवश्यकताओं के साथ आधुनिक तकनीकी शिक्षा का लाभ प्रदान करता है।

सूचना और संचार प्रौद्योगिकी आज रक्षा क्षेत्र का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। सैन्य अभियानों के दौरान सुरक्षित संचार, रियल टाइम सूचना का आदान-प्रदान और अलग-अलग इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय किसी भी अभियान की सफलता में अहम भूमिका निभाते हैं। तकनीक में तेजी से हो रहे बदलाव के कारण सेनाओं को अपने संचार नेटवर्क को भी लगातार आधुनिक बनाना पड़ रहा है।

कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स की जिम्मेदारी भारतीय सेना के लिए सुरक्षित और प्रभावी संचार व्यवस्था उपलब्ध कराने से जुड़ी है। आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप में इसकी भूमिका और व्यापक हुई है। डिजिटल नेटवर्क और अत्याधुनिक संचार प्रणालियों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ तकनीकी रूप से प्रशिक्षित अधिकारियों की जरूरत भी बढ़ी है।

दीक्षांत समारोह के दौरान अधिकारियों की प्रशिक्षण यात्रा और उनकी उपलब्धियों को भी रेखांकित किया गया। कठिन प्रशिक्षण और अकादमिक आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद अधिकारियों को पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा प्रदान किया जाना उनके पेशेवर जीवन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब उनसे अपने प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल सेना की विभिन्न जिम्मेदारियों में करने की अपेक्षा होगी।

MCTE देश के प्रमुख सैन्य तकनीकी प्रशिक्षण संस्थानों में शामिल है। यहां सेना के अधिकारियों को टेलीकम्युनिकेशन, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और संबंधित आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया जाता है। बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए संस्थान में प्रशिक्षण के दौरान नई तकनीकों और उनके सैन्य उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

आधुनिक युद्ध केवल हथियारों और सैनिकों की संख्या पर निर्भर नहीं रह गया है। सूचना की गति, नेटवर्क की सुरक्षा और वास्तविक समय में सही जानकारी उपलब्ध होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर दुनिया की सेनाओं की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।

लेफ्टिनेंट जनरल विवेक डोगरा ने अधिकारियों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। उनका जोर इस बात पर रहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है और सैन्य अधिकारियों को भी लगातार सीखने तथा अपने कौशल को विकसित करने की जरूरत है। विभिन्न उभरती तकनीकों के आपसी समन्वय को समझना भविष्य के सैन्य अभियानों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

GEEO-59 के दीक्षांत समारोह ने सैन्य प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकी शिक्षा के समन्वय को भी रेखांकित किया। IIIT नागपुर से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा हासिल करने वाले 24 अधिकारी अब अपने तकनीकी ज्ञान को भारतीय सेना की संचार और नेटवर्क क्षमताओं को मजबूत करने में इस्तेमाल कर सकेंगे।

महू स्थित MCTE में आयोजित समारोह के साथ GEEO-59 कोर्स का महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ। नेटवर्क आधारित युद्ध में कम्युनिकेशन की बढ़ती भूमिका और नई तकनीकों के कन्वर्जेंस पर दिए गए संदेश ने स्पष्ट किया कि भविष्य की सैन्य तैयारियों में तकनीकी दक्षता और सुरक्षित संचार व्यवस्था की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है।

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