भोपाल में तीन साल से अधूरा नाला निर्माण BMC ने लापरवाही पर इंजीनियर को किया सस्पेंड
भोपाल। नरेला विधानसभा क्षेत्र में पिछले तीन सालों से अधूरे पड़े नाला निर्माण कार्य को लेकर भोपाल नगर निगम (BMC) ने बड़ी कार्रवाई की है। सुंदर नगर और उड़िया बस्ती के बीच प्रस्तावित नाले का निर्माण पूरा नहीं होने पर नगर निगम ने एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बृजेश कौशल को कथित लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, यह नाला निर्माण परियोजना लंबे समय से अधूरी पड़ी हुई थी, जिसके कारण स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। बारिश के मौसम में जल निकासी की समस्या बढ़ने और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं।
बताया जा रहा है कि इस नाले के निर्माण का प्रस्ताव पूर्व नगर आयुक्त के कार्यकाल के दौरान नरेला विधानसभा क्षेत्र के विधायक और मंत्री विश्वास सारंग के निर्देश पर तैयार किया गया था। परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना था।
इस नाला निर्माण परियोजना के लिए करीब 15 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई थी। प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद इसका टेंडर भी जारी कर दिया गया था। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन कुछ समय बाद काम रुक गया।
सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार ने परियोजना का कुछ हिस्सा पूरा करने के बाद काम बंद कर दिया। इसके बाद लंबे समय तक निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। अधूरे पड़े नाले के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी होती रही।
नगर निगम अधिकारियों ने मामले की समीक्षा के बाद जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की। जांच के बाद एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बृजेश कौशल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया।
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि विकास कार्यों में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। समय पर परियोजनाएं पूरी करना अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नाला निर्माण पूरा नहीं होने के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान पानी निकासी बाधित हो जाती है और कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन जाती है।
लोगों ने मांग की है कि अधूरे पड़े नाले का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कराया जाए, ताकि क्षेत्र की समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में नाला और जल निकासी परियोजनाएं बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। इनमें देरी होने से बारिश के समय बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं और लोगों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
भोपाल नगर निगम ने इससे पहले भी कई विकास कार्यों में देरी और लापरवाही को लेकर अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की है। प्रशासन का उद्देश्य समयसीमा के भीतर परियोजनाओं को पूरा कराना है।
अब इस मामले में आगे की कार्रवाई के तहत ठेकेदार की भूमिका की भी समीक्षा की जा सकती है। यदि निर्माण कार्य में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ भी कदम उठाए जा सकते हैं।
नरेला विधानसभा क्षेत्र में इस परियोजना को स्थानीय विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था। करीब 15 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना के अधूरे रहने से न केवल सरकारी धन का उपयोग प्रभावित हुआ, बल्कि लोगों को भी अपेक्षित सुविधा नहीं मिल सकी।
नगर निगम अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अधूरे काम को जल्द पूरा कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए नए सिरे से कार्य योजना तैयार की जा सकती है।
फिलहाल एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के निलंबन के बाद नगर निगम की कार्रवाई चर्चा में है। लोगों को उम्मीद है कि अब नाला निर्माण कार्य में तेजी आएगी और वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सकेगा।