बारासेल। ग्राम पंचायत बारासेल के अंतर्गत आने वाले बेट गांव में सरकारी स्कूल के कई दिनों से बंद रहने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में पदस्थ गेस्ट टीचर नियमित रूप से नहीं आते और महीने में केवल एक या दो बार ही कक्षाएं संचालित की जाती हैं। इससे गांव के बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
गांव के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित सरकारी स्कूल के नियमित रूप से नहीं खुलने से अभिभावकों में नाराजगी है। ग्रामीणों के अनुसार स्कूल कई दिनों तक बंद रहता है। बच्चे पढ़ाई की उम्मीद में स्कूल पहुंचते हैं, लेकिन शिक्षक के नहीं आने के कारण उन्हें वापस घर लौटना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में पढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रहे गेस्ट टीचर महीने में केवल एक या दो बार ही पहुंचते हैं। शिक्षक की अनुपस्थिति के कारण नियमित कक्षाएं नहीं लग पा रही हैं। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। अभिभावकों को चिंता है कि लंबे समय तक ऐसी स्थिति बनी रही तो बच्चों का शैक्षणिक स्तर प्रभावित हो सकता है।
गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने स्कूल की स्थिति को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई बार अवगत कराया है। स्कूल नियमित रूप से नहीं खुलने और शिक्षक की अनुपस्थिति की शिकायत की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
स्कूल के बंद रहने की समस्या स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है। ग्रामीणों के मुताबिक स्कूल की स्थिति को लेकर अखबारों में भी खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक ऐसी कार्रवाई नहीं की गई जिससे स्कूल नियमित रूप से खुल सके और बच्चों की पढ़ाई सामान्य हो सके।
सरकारी स्कूलों में बच्चों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी विद्यालय उन परिवारों के लिए शिक्षा का प्रमुख माध्यम होते हैं, जिनके लिए बच्चों को दूर के स्कूल या निजी शिक्षण संस्थानों में भेजना आसान नहीं होता। ऐसे में गांव का स्कूल नियमित रूप से बंद रहने से बच्चों के सामने शिक्षा का संकट खड़ा हो सकता है।
बेट गांव के अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता बच्चों की लगातार छूट रही पढ़ाई को लेकर है। स्कूल में नियमित कक्षाएं नहीं लगने से निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा करना मुश्किल हो सकता है। बच्चों को विषयों की बुनियादी समझ विकसित करने के लिए नियमित पढ़ाई और शिक्षक का मार्गदर्शन जरूरी होता है। लंबे अंतराल के बाद कभी-कभार कक्षा लगने से पढ़ाई की निरंतरता टूट जाती है।
ग्रामीण इलाकों में पहले ही विद्यार्थियों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। संसाधनों की कमी, दूरी और शिक्षकों की उपलब्धता जैसी समस्याएं बच्चों की शिक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में गांव में मौजूद सरकारी स्कूल का भी नियमित संचालन न होना अभिभावकों की परेशानी बढ़ा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे चाहते हैं कि शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूल का निरीक्षण करें और वास्तविक स्थिति की जांच करें। यदि गेस्ट टीचर नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं तो उनकी उपस्थिति की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही स्कूल में नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग भी की जा रही है।
इस मामले में शिक्षक की उपस्थिति से जुड़े रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। विभागीय स्तर पर यह जांच की जा सकती है कि स्कूल कितने दिनों से बंद रहा, गेस्ट टीचर ने कितने दिन उपस्थिति दर्ज कराई और विद्यार्थियों की कक्षाएं वास्तव में कितने दिन संचालित हुईं। इससे ग्रामीणों की शिकायतों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्कूल के लगातार बंद रहने से विद्यार्थियों की उपस्थिति पर भी असर पड़ने की आशंका है। यदि बच्चे बार-बार स्कूल पहुंचने के बाद उसे बंद पाते हैं तो धीरे-धीरे उनकी स्कूल जाने में रुचि कम हो सकती है। इससे ड्रॉपआउट जैसी समस्या का खतरा भी बढ़ सकता है। खासकर प्राथमिक स्तर पर बच्चों को नियमित रूप से स्कूल से जोड़कर रखना बेहद जरूरी होता है।
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल का नियमित खुलना उनकी पहली मांग है। उनका कहना है कि सरकार शिक्षा के विस्तार और बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर शिक्षक ही नियमित नहीं आएंगे तो इन प्रयासों का पूरा लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पाएगा।
ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से स्कूल की स्थिति पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल शिकायत दर्ज करने के बजाय जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर जांच करनी चाहिए। यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जाए और बच्चों के लिए नियमित शिक्षक की व्यवस्था की जाए।
मामले में प्रशासन या शिक्षा विभाग का पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल ग्रामीणों का आरोप है कि कई शिकायतों और अखबारों में मामला सामने आने के बावजूद स्कूल के नियमित संचालन के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
बेट गांव के सरकारी स्कूल की स्थिति अब बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल बन गई है। ग्रामीणों की मांग है कि स्कूल को तत्काल नियमित रूप से खोला जाए, शिक्षक की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और छूटी हुई पढ़ाई की भरपाई के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाए। अब देखना होगा कि लगातार शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।