तेंदुआ शिकार मामले का खुलासा, कूनो और जंगल से शिकार करने वाले 7 आरोपी गिरफ्तार
श्योपुर तेंदुआ शिकार कांड में बढ़ी कार्रवाई, सात नए आरोपित गिरफ्तार
श्योपुर : मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में वन्यजीव शिकार के एक मामले में वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। जांच के दौरान सामने आया है कि स्थानीय शिकारियों ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान और आसपास के जंगल क्षेत्रों में तेंदुओं का शिकार किया था। मामले में कार्रवाई करते हुए सात अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
वन विभाग और जांच एजेंसियों के अनुसार, तेंदुओं के अवैध शिकार से जुड़े इस मामले में लंबे समय से जांच चल रही थी। जांच के दौरान मिले सुरागों और पूछताछ के आधार पर शिकारियों की भूमिका सामने आई। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर शिकार के नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी जंगलों में वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखते थे और मौका मिलने पर उनका शिकार करते थे। तेंदुए जैसे संरक्षित वन्यजीवों का शिकार वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत गंभीर अपराध है, जिसमें कड़ी सजा का प्रावधान है।
वन विभाग ने आरोपियों के पास से शिकार में इस्तेमाल होने वाले कुछ सामान और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने की भी जानकारी दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और यदि इसमें अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
कूनो क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां चीतों के संरक्षण और पुनर्स्थापना परियोजना के कारण भी देश-दुनिया का ध्यान केंद्रित है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों का शिकार वन संरक्षण के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि तेंदुए पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका अवैध शिकार जंगल के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे मामलों में केवल शिकारियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है।
वन विभाग ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि जंगलों में किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत विभाग को दें। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए निगरानी और गश्त को और मजबूत किया जा रहा है।
गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि तेंदुओं के शिकार का उद्देश्य क्या था और क्या इसके पीछे किसी बड़े अवैध वन्यजीव व्यापार गिरोह का हाथ है।