इंदौर। ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कई पुरानी इमारतें आज भी उपेक्षा का सामना कर रही हैं। इंदौर के प्रसिद्ध लालबाग पैलेस परिसर में भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। पुरातत्व विभाग ने पर्यटन विभाग के साथ मिलकर लालबाग पैलेस को नया रूप देने की योजना पर काम शुरू कर दिया है, लेकिन परिसर के अंदर और आसपास मौजूद कई महत्वपूर्ण हेरिटेज संरचनाएं अब भी संरक्षण की राह देख रही हैं।
लालबाग पैलेस केवल एक राजसी भवन नहीं, बल्कि शहर के इतिहास और संस्कृति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धरोहर है। इस परिसर में मौजूद चंपा बावड़ी और दो प्राचीन शिव मंदिर ऐतिहासिक महत्व रखते हैं। हालांकि, समय के साथ इन संरचनाओं की हालत खराब होती जा रही है। खराब रास्ते, टूटे हुए पत्थर, गंदगी और रखरखाव की कमी के कारण इनकी सुंदरता और मजबूती प्रभावित हो रही है।
चंपा बावड़ी की हालत खराब
लालबाग परिसर की पहचान मानी जाने वाली चंपा बावड़ी एक प्राचीन सीढ़ीदार कुआं है। पुराने समय में इसका उपयोग पानी संग्रहण के लिए किया जाता था। अपनी वास्तुकला और निर्माण शैली के कारण यह बावड़ी ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन लंबे समय से उचित संरक्षण नहीं मिलने के कारण इसकी स्थिति धीरे-धीरे खराब हो रही है।
बावड़ी तक पहुंचने वाले रास्ते की हालत भी ठीक नहीं है। कई जगह पत्थर टूट चुके हैं और आसपास गंदगी दिखाई देती है। परिसर की बाउंड्री वॉल टूटने के कारण बाहरी लोग आसानी से अंदर प्रवेश कर जाते हैं और यहां कचरा व धार्मिक सामग्री फेंक देते हैं। इससे इस प्राचीन संरचना को नुकसान पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चंपा बावड़ी जैसी ऐतिहासिक धरोहर को केवल सफाई अभियान से बचाया नहीं जा सकता। इसके लिए स्थायी संरक्षण योजना, सुरक्षा व्यवस्था और नियमित निगरानी की जरूरत है।
टूट रहे हैं पुराने पत्थर
चंपा बावड़ी के आसपास लगे कई पुराने पत्थर टूट चुके हैं। समय के साथ मौसम और मानवीय गतिविधियों के कारण संरचना कमजोर होती जा रही है। यदि जल्द ही मरम्मत और संरक्षण का काम शुरू नहीं किया गया तो आने वाले समय में इस धरोहर को और अधिक नुकसान पहुंच सकता है।
पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, ऐतिहासिक इमारतों में इस्तेमाल की गई सामग्री और निर्माण तकनीक को ध्यान में रखते हुए ही मरम्मत की जानी चाहिए। आधुनिक तरीके से की गई गलत मरम्मत कई बार मूल स्वरूप को नुकसान पहुंचा सकती है।
प्राचीन शिव मंदिर भी बदहाल
लालबाग परिसर में मौजूद दो प्राचीन शिव मंदिर भी संरक्षण की जरूरत महसूस कर रहे हैं। ये मंदिर धार्मिक महत्व के साथ-साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी अहम हैं। लेकिन इनके आसपास साफ-सफाई और रखरखाव की कमी दिखाई देती है।
मंदिरों तक पहुंचने वाले रास्तों की स्थिति खराब है। कई जगह अव्यवस्था और गंदगी के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों को परेशानी होती है। स्थानीय लोगों की मांग है कि मंदिरों और बावड़ी क्षेत्र को एक साथ विकसित किया जाए, ताकि यह स्थान पर्यटन के लिहाज से और बेहतर बन सके।
सफाई होती है लेकिन स्थायी समाधान जरूरी
विभाग की ओर से समय-समय पर लालबाग परिसर में सफाई अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन टूटे हुए हिस्सों और सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण समस्या दोबारा सामने आ जाती है। बाउंड्री वॉल की मरम्मत और परिसर की निगरानी व्यवस्था मजबूत करना बेहद जरूरी है।
इतिहासकारों का मानना है कि लालबाग पैलेस जैसे स्थान केवल पर्यटन स्थल नहीं होते, बल्कि वे शहर की पहचान और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा होते हैं। ऐसे में यहां मौजूद छोटी-बड़ी सभी ऐतिहासिक संरचनाओं का संरक्षण जरूरी है।
पर्यटन विकास के साथ संरक्षण की जरूरत
लालबाग पैलेस को नया रूप देने का काम शुरू होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। लेकिन केवल मुख्य भवन के विकास से उद्देश्य पूरा नहीं होगा। परिसर की अन्य ऐतिहासिक संरचनाओं को भी योजना में शामिल करना होगा।
चंपा बावड़ी और प्राचीन शिव मंदिरों का संरक्षण होने से लालबाग परिसर का ऐतिहासिक महत्व और बढ़ सकता है। इसके लिए विशेषज्ञों की निगरानी में मरम्मत, नियमित देखभाल और सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।
शहर की विरासत को बचाने के लिए अब जरूरत है कि इन उपेक्षित धरोहरों पर भी उतना ही ध्यान दिया जाए, जितना मुख्य ऐतिहासिक इमारतों पर दिया जा रहा है। यदि समय रहते कदम उठाए गए तो चंपा बावड़ी और प्राचीन शिव मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास की अनमोल निशानी बने रह सकते हैं।