Indore-बैतूल हाईवे बनेगा जल संरक्षण का मॉडल, बारिश की हर बूंद को जमीन में पहुंचाने की योजना

Update: 2026-06-15 06:25 GMT

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : इंदौर-बैतूल नेशनल हाईवे परियोजना को केवल एक परिवहन कॉरिडोर के रूप में ही नहीं, बल्कि एक बड़े जल संरक्षण मॉडल के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत बारिश के पानी को संरक्षित कर भूजल स्तर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

Indore–Betul National Highway को लगभग 300 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार किया जा रहा है। यह 26 किलोमीटर लंबा हाईवे न केवल यातायात सुविधा को बेहतर बनाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी एक नया उदाहरण पेश करेगा।

निरीक्षण के दौरान सांसद शंकर लालवानी ने इस परियोजना को एक संभावित राष्ट्रीय मॉडल बताया, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और पर्यावरणीय संतुलन को एक साथ जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस हाईवे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बारिश के पानी की हर बूंद को संरक्षित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

Shankar Lalwani ने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बारिश का पानी बहकर बर्बाद न हो, बल्कि उसे संरक्षित कर सीधे जमीन के अंदर पहुंचाया जाए ताकि भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके।

इस उद्देश्य के लिए हाईवे के दोनों ओर वैज्ञानिक जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की जा रही है। इसमें ड्रेनेज चैनल, भूजल रिचार्ज पॉइंट और स्टॉर्मवॉटर चैंबर शामिल हैं, जो बारिश के पानी को एकत्र कर उसे जमीन में पुनः प्रवेश कराने का काम करेंगे।

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, यह प्रणाली लंबे समय में क्षेत्र में जल संकट को कम करने में मददगार साबित होगी। साथ ही, यह सड़क के आसपास के क्षेत्रों में हरियाली और पर्यावरण संतुलन को भी बढ़ावा देगी।

निरीक्षण के दौरान सांसद ने सावर विधानसभा क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों का भी जायजा लिया और अधिकारियों को गुणवत्ता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजनाएं आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है, तो देशभर में हाईवे निर्माण के साथ जल संरक्षण को जोड़ने की नई दिशा मिल सकती है, जिससे जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलेगी।

कुल मिलाकर, इंदौर-बैतूल हाईवे परियोजना न केवल परिवहन व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आ रही है।

Tags:    

Similar News