शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां बुधवार को दो अलग-अलग घटनाओं में दो सगी बहनों और उनके चार बच्चों समेत कुल छह लोगों की मौत हो गई। पहले बैराड़ थाना क्षेत्र के गूंगरगांव में एक महिला और उसके छह वर्षीय बेटे की मौत हुई। इसके कुछ ही घंटों बाद कोलारस थाना क्षेत्र में उसकी बड़ी बहन और तीन बच्चों के शव कुएं से बरामद किए गए। दोनों घटनाओं को शुरुआती जांच में आत्महत्या से जोड़कर देखा जा रहा है। सबसे दुखद बात यह है कि पहली घटना में जान गंवाने वाली महिला आठ महीने की गर्भवती थी। एक ही दिन में हुई छह मौतों ने दोनों परिवारों और आसपास के गांवों को गहरे सदमे में डाल दिया है। पुलिस दोनों मामलों की अलग-अलग जांच कर रही है।
पहले छोटी बहन ने छह साल के बेटे के साथ दी जान
जानकारी के अनुसार, पहली घटना बुधवार दोपहर करीब एक बजे बैराड़ थाना क्षेत्र के गूंगरगांव में हुई। यहां रहने वाली 35 वर्षीय अंजलि रावत की अपने छह वर्षीय बेटे प्रशांत के साथ कुएं में गिरने से मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि अंजलि अपने बेटे और तीन बेटियों के साथ खेत की ओर गई थीं। इसी दौरान वह बेटे के साथ कुएं में कूद गईं। घटना के समय मौजूद उनकी बड़ी बेटी मोनिका ने सूझबूझ दिखाते हुए खुद को और अपनी दोनों छोटी बहनों को बचा लिया।इसके बाद मोनिका ने घर पहुंचकर परिवार के अन्य सदस्यों को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और अंजलि तथा प्रशांत को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी।इस घटना के बाद गांव में शोक का माहौल बन गया।
आठ महीने की गर्भवती थी अंजलि
इस घटना का एक और दुखद पहलू सामने आया है। अंजलि रावत आठ महीने की गर्भवती थीं। उनकी मृत्यु के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की भी जान चली गई।स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, अंजलि के पति धरमवीर रावत की करीब एक महीने पहले सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। पति की असमय मृत्यु के बाद परिवार कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था।कुछ स्थानीय रिपोर्टों में बताया गया है कि अंजलि पति के निधन के बाद से परेशान थीं। हालांकि, उनके इस कदम के पीछे वास्तविक कारण क्या थे, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।पुलिस पारिवारिक परिस्थितियों और अन्य संभावित कारणों की जांच कर रही है।
कुछ घंटों बाद बड़ी बहन और तीन बच्चों की भी मौत
पहली घटना के बाद परिवार के लोग संभल भी नहीं पाए थे कि बुधवार शाम एक और दुखद घटना सामने आ गई।अंजलि की बड़ी बहन 40 वर्षीय सीता रावत अपने तीन बच्चों के साथ कोलारस थाना क्षेत्र के खोंकर गांव स्थित खेत पर गई थीं।जब शाम करीब छह बजे तक सीता और बच्चे घर वापस नहीं लौटे, तो परिवार के सदस्यों ने उनकी तलाश शुरू की।परिजन उन्हें खोजते हुए खेत तक पहुंचे। वहां कुएं में एक बच्चे का शव दिखाई देने पर तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।कोलारस पुलिस मौके पर पहुंची और बचाव दल की सहायता से शवों को बाहर निकालने की कार्रवाई शुरू की गई।बुधवार रात करीब 11 बजे तक सीता और उनके तीनों बच्चों के शव कुएं से निकाल लिए गए।
दो बेटियों और एक बेटे की भी गई जान
दूसरी घटना में सीता रावत के साथ उनकी 14 वर्षीय बेटी राखी, 11 वर्षीय बेटी प्रियंका और छह वर्षीय बेटे श्लोक की मौत हो गई।तीनों बच्चों की मौत से परिवार में शोक का माहौल है। एक ही दिन में दो बहनों और चार बच्चों की जान जाने की खबर फैलते ही आसपास के गांवों में भी लोग स्तब्ध रह गए।सीता के परिजनों ने आशंका जताई है कि छोटी बहन अंजलि की मौत की खबर से वह गहरे सदमे में थीं। हालांकि, यह केवल परिवार की ओर से जताई गई आशंका है। पुलिस ने अभी दोनों घटनाओं के बीच किसी प्रत्यक्ष कारणात्मक संबंध की पुष्टि नहीं की है।
दोनों बहनों के बीच था गहरा लगाव
परिजनों के मुताबिक, अंजलि और सीता के बीच गहरा पारिवारिक लगाव था। दोनों बहनें एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ रहती थीं।पहले छोटी बहन की मौत और फिर उसी दिन बड़ी बहन तथा उसके बच्चों की मृत्यु से परिवार को भारी आघात पहुंचा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटना की उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी।ग्रामीणों के बीच दोनों घटनाओं को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन पुलिस ने लोगों से अपुष्ट जानकारियों और अफवाहों पर विश्वास नहीं करने की अपील की है।
पुलिस ने शुरू की दोनों मामलों की जांच
घटना की जानकारी मिलने के बाद बैराड़ और कोलारस थाना पुलिस ने अपने-अपने क्षेत्रों में जांच शुरू कर दी।बैराड़ थाना प्रभारी रवि चौहान के अनुसार, पुलिस ने सूचना मिलने पर तत्काल घटनास्थल पहुंचकर बचाव की कोशिश की, लेकिन महिला और उसके बेटे को बचाया नहीं जा सका।पुलिस दोनों घटनाओं की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए परिजनों और अन्य संबंधित लोगों से जानकारी जुटा रही है।सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। चिकित्सकीय रिपोर्ट और पुलिस जांच से मौतों की परिस्थितियों के बारे में अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है।जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या परिवार में किसी तरह की परेशानी, विवाद या अन्य परिस्थितियों ने इन घटनाओं में भूमिका निभाई थी।फिलहाल पुलिस किसी एक कारण को अंतिम रूप से जिम्मेदार नहीं मान रही है।
दो गांवों में पसरा मातम
गूंगरगांव और खोंकर गांव में हुई इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।एक ही परिवार की दो बेटियों और उनके चार बच्चों की मौत ने रिश्तेदारों और परिचितों को गहरा आघात पहुंचाया है।परिवार के सदस्यों के लिए सबसे मुश्किल स्थिति उन बच्चों की देखभाल को लेकर भी है, जो पहली घटना में बच गए।परिजनों के सामने अब बच्चों को भावनात्मक सहारा देने और उनके भविष्य की जिम्मेदारी संभालने की चुनौती है।स्थानीय लोगों ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहयोग देने की आवश्यकता जताई है।
आखिर क्यों हुईं ये छह मौतें?
शिवपुरी जिले की इन दोनों घटनाओं ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या छोटी बहन की मौत के सदमे से बड़ी बहन प्रभावित हुई थी? क्या परिवार में पहले से कोई परेशानी चल रही थी? दोनों घटनाओं के पीछे अलग-अलग कारण थे या कोई समान परिस्थिति थी?इन सभी सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।अधिकारियों का कहना है कि दोनों घटनाओं की जांच अलग-अलग की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
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