मध्य प्रदेश

नर्मदापुरम में विकास का अजब हाल, 308 मीटर लंबा पुल तैयार, अप्रोच रोड अब तक नहीं

Kavita2
29 Oct 2026 2:09 PM IST
नर्मदापुरम में विकास का अजब हाल, 308 मीटर लंबा पुल तैयार, अप्रोच रोड अब तक नहीं
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नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश में सरकारी विकास कार्यों की योजना और क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। नर्मदापुरम और नरसिंहपुर जिलों को जोड़ने के उद्देश्य से उमरधा गांव के पास दुधी नदी पर करीब 8.86 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया पुल पिछले तीन वर्षों से लगभग अनुपयोगी पड़ा है। इसकी सबसे बड़ी वजह पुल के दोनों ओर आवश्यक पहुंच मार्ग यानी अप्रोच रोड की व्यवस्था नहीं होना बताई जा रही है। करीब 308 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण 40 से 50 गांवों के लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन ग्रामीणों को अब तक इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने के बावजूद रास्ता नहीं होने से उन्हें खेतों से होकर आवाजाही करनी पड़ रही है। इस समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ है। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी परियोजना का उपयोग नहीं हो पाने से निर्माण कार्य की योजना और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

8.86 करोड़ रुपये खर्च, फिर भी पुल का लाभ नहीं

उमरधा गांव के पास दुधी नदी पर बने इस पुल की लागत करीब 8 करोड़ 86 लाख रुपये बताई गई है।

पुल की कुल लंबाई 308 मीटर है। इसे दोनों जिलों के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।

निर्माण के बाद उम्मीद थी कि आसपास के गांवों के लोगों को आवागमन में आसानी होगी।

लेकिन अप्रोच रोड नहीं बनने के कारण पुल का सामान्य उपयोग संभव नहीं हो पा रहा है।

इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है और वे निर्माण कार्य को पूरी तरह उपयोगी बनाने की मांग कर रहे हैं।

तीन साल से अधूरा है संपर्क मार्ग

जानकारी के अनुसार, पुल पिछले करीब तीन वर्षों से पहुंच मार्ग के अभाव में लगभग बेकार पड़ा है।

पुल का निर्माण होने के बावजूद उससे जुड़ने वाली सड़क की व्यवस्था पूरी नहीं होने से लोगों को परेशानी हो रही है।

किसी भी पुल का वास्तविक लाभ तभी मिलता है, जब उसके दोनों सिरों पर सुरक्षित और सुगम सड़क संपर्क उपलब्ध हो।

उमरधा के पास बनी इस परियोजना में यही महत्वपूर्ण सुविधा उपलब्ध नहीं होने से इसका उद्देश्य अधूरा रह गया है।

हालांकि, अप्रोच रोड का निर्माण किस कारण रुका हुआ है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

40 से 50 गांवों को जोड़ने की थी योजना

दुधी नदी पर बनाए गए इस पुल का उद्देश्य नर्मदापुरम और नरसिंहपुर जिलों के लगभग 40 से 50 गांवों के बीच संपर्क बेहतर करना था।

इन गांवों के निवासियों को रोजमर्रा के कामों के लिए आसपास के क्षेत्रों में आना-जाना पड़ता है।

पुल के माध्यम से दोनों जिलों के बीच आवागमन को सुविधाजनक बनाने की योजना थी।

लेकिन पहुंच मार्ग के अभाव में ग्रामीणों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है।

इससे परियोजना की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं।

खेतों से होकर गुजरने को मजबूर ग्रामीण

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पुल तक पहुंचने के लिए व्यवस्थित सड़क नहीं होने से लोगों को खेतों से होकर गुजरना पड़ता है।

यह स्थिति सामान्य आवागमन के लिए असुविधाजनक है।

खासकर बारिश के दौरान कच्चे रास्तों और खेतों से होकर निकलना अधिक कठिन हो सकता है।

ऐसी परिस्थितियों में दोपहिया वाहन और अन्य साधनों से आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि अप्रोच रोड बना दिया जाए, तो पुल का उपयोग आसान हो जाएगा।

हालांकि, वर्तमान में कितने लोग प्रतिदिन इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं, इसका आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

बार-बार शिकायत के बाद भी समाधान नहीं

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने अप्रोच रोड की समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है।

इसके बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि पुल को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण जल्द पूरा किया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर पुल बनाने का फायदा तभी होगा, जब वहां तक पहुंचने के लिए उचित रास्ता उपलब्ध कराया जाएगा।

हालांकि, शिकायतों पर संबंधित विभाग ने क्या जवाब दिया है, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

परियोजना की योजना पर उठ रहे सवाल

दुधी नदी पर पुल बनने के बावजूद अप्रोच रोड नहीं होने से परियोजना की योजना और क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं।

आमतौर पर पुल निर्माण की परियोजनाओं में संपर्क मार्ग महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

यदि पुल तैयार हो जाए, लेकिन उससे जुड़ने वाली सड़क न बने, तो पूरी परियोजना का लाभ सीमित हो जाता है।

इस मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि अप्रोच रोड का निर्माण मूल परियोजना में शामिल था या इसके लिए अलग व्यवस्था की गई थी।

साथ ही यह भी जांच का विषय है कि निर्माण कार्य में देरी किस स्तर पर हुई।

क्या जमीन की समस्या बनी बाधा?

कई सड़क और पुल परियोजनाओं में भूमि उपलब्धता, तकनीकी स्वीकृति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण देरी हो सकती है।

हालांकि, उमरधा के पास बने इस पुल के मामले में अप्रोच रोड नहीं बनने की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है।

यह कहना कि सड़क निर्माण भूमि विवाद या किसी विशेष विभागीय लापरवाही के कारण रुका है, बिना आधिकारिक पुष्टि के उचित नहीं होगा।

संबंधित विभाग की ओर से परियोजना की वर्तमान स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद ही देरी के वास्तविक कारण सामने आ सकेंगे।

ग्रामीणों के रोजमर्रा के जीवन पर असर

पुल का निर्माण आसपास के गांवों के लोगों की आवाजाही आसान बनाने के लिए किया गया था।

लेकिन सड़क संपर्क अधूरा होने से ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क और पुल की सुविधा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि और स्थानीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होती है।

किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने और विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों तक जाने के लिए सुगम परिवहन की आवश्यकता होती है।

ऐसे में पुल का उपयोग नहीं हो पाने से क्षेत्र के लोगों की उम्मीदें अधूरी रह गई हैं।

बारिश के मौसम में बढ़ सकती है परेशानी

दुधी नदी के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बरसात के दौरान सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।

कच्चे रास्तों पर पानी और कीचड़ होने से लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

यदि पुल तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है, तो बारिश के दौरान उसका उपयोग और मुश्किल हो सकता है।

इसी वजह से ग्रामीण संपर्क मार्ग का निर्माण जल्द पूरा कराने की मांग कर रहे हैं।

हालांकि, इस स्थान पर बारिश के दौरान किसी विशेष दुर्घटना की पुष्टि नहीं हुई है।

करोड़ों के निवेश की उपयोगिता पर सवाल

करीब 8.86 करोड़ रुपये की लागत से तैयार पुल का तीन वर्षों तक लगभग अनुपयोगी रहना सार्वजनिक धन के प्रभावी उपयोग को लेकर चिंता पैदा करता है।

सरकारी परियोजनाओं का उद्देश्य केवल निर्माण पूरा करना नहीं, बल्कि जनता को निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध कराना भी होता है।

यदि निर्माण के बाद आवश्यक संपर्क मार्ग नहीं बनता, तो परियोजना पर खर्च की गई राशि से मिलने वाला वास्तविक लाभ प्रभावित होता है।

ऐसे में निर्माण कार्य की समीक्षा और अधूरे हिस्सों को पूरा करने की समयसीमा तय करना महत्वपूर्ण हो सकता है।

प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग

उमरधा गांव और आसपास के क्षेत्रों के लोगों की प्रमुख मांग अप्रोच रोड का निर्माण पूरा कराना है।

ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित विभाग इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले।

इसके लिए पुल के दोनों ओर आवश्यक सड़क संपर्क उपलब्ध कराना जरूरी है।

हालांकि, अप्रोच रोड के निर्माण को लेकर किसी नई समयसीमा या स्वीकृत कार्ययोजना की पुष्टि नहीं हुई है।

इसलिए ग्रामीणों को अभी प्रशासनिक निर्णय का इंतजार है।

कब मिलेगा 50 गांवों को पुल का लाभ?

नर्मदापुरम और नरसिंहपुर जिलों के बीच संपर्क बेहतर बनाने के लिए बनाया गया दुधी नदी का पुल अभी अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रहा है।

308 मीटर लंबे पुल पर करीब 8.86 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन अप्रोच रोड के अभाव में पिछले तीन वर्षों से इसका अपेक्षित उपयोग नहीं हो रहा है।

ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से नाराजगी बनी हुई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि संबंधित विभाग कब तक पहुंच मार्ग का निर्माण पूरा कराएगा और 40 से 50 गांवों के लोगों को इस परियोजना का वास्तविक लाभ कब मिलेगा।

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