इंदौर। देशभर से 400 से अधिक कंपनी सेक्रेटरी इंदौर में आयोजित इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) इंदौर चैप्टर की दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पहुंचे। निपानिया के पास एक होटल में आयोजित यह सम्मेलन 21 और 22 अगस्त को हो रहा है। इस दौरान कॉरपोरेट गवर्नेंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती भूमिका, इसके संभावित लाभ, चुनौतियों और जिम्मेदार इस्तेमाल पर विशेषज्ञ चर्चा कर रहे हैं।

इस साल कॉन्फ्रेंस का विषय “AI अनलॉक्ड: ट्रांसफॉर्मिंग द फ्यूचर ऑफ कॉरपोरेट गवर्नेंस” रखा गया है। सम्मेलन का उद्देश्य यह समझना है कि तेजी से विकसित हो रही AI तकनीक कॉरपोरेट क्षेत्र में निर्णय लेने, जोखिम प्रबंधन, अनुपालन और गवर्नेंस की प्रक्रियाओं को किस तरह बदल रही है।

कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कंपनी सेक्रेटरी, कॉरपोरेट क्षेत्र के विशेषज्ञ और अन्य पेशेवर हिस्सा ले रहे हैं। दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में AI से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श के साथ कंपनी सेक्रेटरी की बदलती भूमिका पर भी चर्चा हो रही है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और कंपनी सेक्रेटरी के लिए इस तकनीक की जानकारी रखना अब जरूरी होता जा रहा है। उन्होंने पेशेवरों से बदलती तकनीकी परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तैयार करने का आह्वान किया।

विजयवर्गीय ने कार्यक्रम के दौरान ICSI के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि सुपर कॉरिडोर पर ICSI को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इस घोषणा को संस्थान की भविष्य की गतिविधियों और इंदौर में उसके विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उन्होंने AI के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में तकनीक का इस्तेमाल कॉरपोरेट और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में और अधिक बढ़ेगा। ऐसे में पेशेवरों को AI के उपयोग की समझ विकसित करनी होगी। हालांकि, तकनीक का इस्तेमाल किस तरह और किन सीमाओं के भीतर किया जाए, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण विषय है।

ICSI के प्रेसिडेंट CS पवन चांडक ने कॉरपोरेट गवर्नेंस में AI की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और कंपनी सेक्रेटरी की जिम्मेदारी केवल तकनीक को अपनाने तक सीमित नहीं है। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि AI का इस्तेमाल नैतिक, पारदर्शी और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से किया जाए।

चांडक के मुताबिक, AI कॉरपोरेट गवर्नेंस के कई क्षेत्रों में बदलाव ला सकता है। इसका इस्तेमाल डेटा के विश्लेषण, अनुपालन से जुड़े कार्यों, जोखिम की पहचान और निर्णय लेने में सहायता के लिए किया जा सकता है। लेकिन इसके साथ डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं।

कॉरपोरेट क्षेत्र में कंपनियों के सामने लगातार बढ़ती नियामकीय जरूरतों के बीच कंपनी सेक्रेटरी की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। कंपनी कानूनों और नियमों के अनुपालन से लेकर बोर्ड स्तर पर गवर्नेंस को मजबूत करने तक, कंपनी सेक्रेटरी संस्थागत व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में AI जैसी तकनीक उनके काम को आसान बनाने के साथ-साथ उनकी भूमिका को भी बदल सकती है।

सम्मेलन में इसी बदलाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञ यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि कंपनी सेक्रेटरी किस तरह AI आधारित टूल्स का प्रभावी इस्तेमाल कर सकते हैं और साथ ही यह भी सुनिश्चित कर सकते हैं कि तकनीक के इस्तेमाल से कॉरपोरेट गवर्नेंस के मूल सिद्धांत प्रभावित न हों।

AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच डेटा की विश्वसनीयता भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। किसी भी AI प्रणाली द्वारा तैयार की गई जानकारी को बिना जांचे स्वीकार करना जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए पेशेवरों के लिए तकनीकी समझ के साथ मानवीय निगरानी और स्वतंत्र निर्णय क्षमता बनाए रखना जरूरी होगा।

कॉन्फ्रेंस में AI से पैदा होने वाले रोजगार और पेशेवर अवसरों पर भी चर्चा की जा रही है। जहां कुछ पारंपरिक कार्यों को AI के जरिए स्वचालित किया जा सकता है, वहीं नई तकनीकों के कारण नए प्रकार की विशेषज्ञता और कौशल की मांग भी बढ़ सकती है। कंपनी सेक्रेटरी के लिए AI और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकी क्षमताएं भविष्य में अतिरिक्त लाभ दे सकती हैं।

कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया जा रहा है कि AI को केवल लागत कम करने या काम को तेज करने वाली तकनीक के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसका इस्तेमाल कॉरपोरेट पारदर्शिता, बेहतर जोखिम प्रबंधन और मजबूत अनुपालन व्यवस्था बनाने के लिए भी किया जा सकता है।

हालांकि, AI से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। गलत डेटा, पक्षपाती एल्गोरिदम, संवेदनशील कॉरपोरेट जानकारी की सुरक्षा और निर्णयों की जवाबदेही जैसे मुद्दे कंपनी प्रबंधन के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। ऐसे में कंपनी सेक्रेटरी की भूमिका एक निगरानीकर्ता और सलाहकार के रूप में और महत्वपूर्ण हो सकती है।

इंदौर में हो रही यह दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस ऐसे समय में आयोजित की जा रही है जब AI का इस्तेमाल लगभग हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है। कॉरपोरेट जगत भी इस बदलाव से अछूता नहीं है। कंपनियां तकनीक के जरिए अपने कामकाज को अधिक तेज और प्रभावी बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन साथ ही उन्हें नियामकीय और नैतिक मानकों का पालन भी सुनिश्चित करना होगा।

कुल मिलाकर, ICSI की इस कॉन्फ्रेंस में AI और कॉरपोरेट गवर्नेंस के बीच बदलते संबंध पर व्यापक चर्चा हो रही है। 400 से अधिक कंपनी सेक्रेटरियों की मौजूदगी इस विषय में पेशेवर समुदाय की बढ़ती रुचि को दर्शाती है। सम्मेलन के दौरान तकनीक के अवसरों के साथ उससे जुड़ी जिम्मेदारियों और चुनौतियों पर विचार किया जा रहा है।

इंदौर में ICSI के लिए सुपर कॉरिडोर पर जमीन उपलब्ध कराने की घोषणा के साथ यह आयोजन संस्थान के लिए स्थानीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण साबित हुआ है। आने वाले समय में AI आधारित तकनीक और कॉरपोरेट गवर्नेंस के बीच तालमेल किस तरह विकसित होता है, इस पर पेशेवरों की भूमिका निर्णायक रहने की उम्मीद है।

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