Gwalior कोर्ट का बड़ा फैसला: तत्कालीन पुलिस अधिकारियों पर डकैती, लूट और साजिश का केस दर्ज
Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : ग्वालियर के स्पेशल सेशंस कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में तत्कालीन पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ डकैती, लूट और आपराधिक साजिश के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई उस शिकायत पर आधारित है जिसमें पुलिस पर गंभीर आर्थिक अनियमितताओं और अवैध वसूली के आरोप लगाए गए थे।
मामले में तत्कालीन पुलिस सुपरिटेंडेंट राजेश चंदेल, थाटीपुर थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह, सब इंस्पेक्टर अजय सिंह और कांस्टेबल संतोष वर्मा को आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता अनूप राणा ने अदालत में आरोप लगाया था कि पुलिस अधिकारियों ने उनके परिवार से लगभग 30 लाख रुपये की अवैध वसूली की।
यह मामला पिछले दो वर्षों से अदालत में लंबित था और सोमवार को इस पर आदेश सुनाया गया। अदालत के निर्णय के बाद मामले में नए सिरे से जांच और कानूनी कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।
शिकायतकर्ता पक्ष के वकील अशोक प्रजापति ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपों के अनुसार शुरुआत में पुलिस ने 5 लाख रुपये लिए और बाद में और धनराशि की मांग की जाने लगी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह के निर्देश पर कांस्टेबल संतोष वर्मा ने कार्रवाई की।
आरोपों के मुताबिक, कांस्टेबल संतोष वर्मा ने अनूप राणा के घर से 9.50 लाख रुपये और केस में आरोपी बताई गई एक महिला के घर से 15 लाख रुपये की वसूली की थी। यह पूरी रकम कथित रूप से गैर-कानूनी तरीके से ली गई।
कोर्ट में पेश दलीलों में यह भी कहा गया कि यह पूरा मामला एक संगठित तरीके से की गई कार्रवाई का हिस्सा था, जिसमें पुलिस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। अदालत ने प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया।
इस आदेश के बाद पुलिस विभाग में भी हलचल देखी जा रही है। हालांकि संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब आगे की जांच में सभी आरोपों की विस्तार से पड़ताल की जाएगी और यह देखा जाएगा कि वास्तव में वसूली और साजिश के आरोप कितने सही हैं।
यह केस अब कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में प्रवेश कर चुका है, जिसमें संबंधित अधिकारियों की भूमिका और कथित लेनदेन की जांच महत्वपूर्ण होगी।
कुल मिलाकर, ग्वालियर कोर्ट का यह फैसला पुलिस व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़े मामलों में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे आगे जांच प्रक्रिया और भी विस्तृत रूप में आगे बढ़ने की संभावना है।