नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में स्वास्थ्य ढांचे, मेडिकल शिक्षा, विशेषज्ञ सेवाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, जेपी नड्डा ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और लोगों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने खासतौर पर स्वास्थ्य क्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के इस्तेमाल को लेकर राज्य की पहल की प्रशंसा की।
मेडिकल शिक्षा के विस्तार पर चर्चा
बैठक में मध्य प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार को प्रमुखता से रखा गया। राज्य में MBBS सीटों की संख्या बढ़ाई गई है।जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 में मध्य प्रदेश में MBBS सीटें 5,600 से बढ़कर 6,120 हो गई हैं। एक साल में 520 सीटों की बढ़ोतरी हुई है।इसके अलावा सुपर स्पेशियलिटी शिक्षा के क्षेत्र में भी विस्तार हुआ है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सीटें 63 से बढ़कर 73 हो गई हैं, जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों में यह संख्या 29 से बढ़कर 53 हो गई है।
PPP मॉडल से बनेंगे नए मेडिकल कॉलेज
जेपी नड्डा ने मध्य प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों के निर्माण में PPP मॉडल के इस्तेमाल की सराहना की।इस योजना के तहत धार, पन्ना, कटनी और बैतूल में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। इन संस्थानों को दिसंबर 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।सरकार का उद्देश्य मेडिकल शिक्षा का विस्तार करना और अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना है।
मातृ और शिशु स्वास्थ्य में सुधार
बैठक में राज्य के मातृ और शिशु स्वास्थ्य संकेतकों की भी समीक्षा की गई।जानकारी के अनुसार, सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) 2022-24 के आंकड़ों में मध्य प्रदेश का मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) घटकर 135 प्रति लाख जीवित जन्म रह गया है।वहीं, NFHS-6 के अनुसार गर्भवती महिलाओं में चार या उससे अधिक प्रसव पूर्व जांच (ANC) कराने का प्रतिशत 57.5 प्रतिशत से बढ़कर 69.5 प्रतिशत हो गया है।
शिशु मृत्यु दर में भी सुधार
राज्य में नवजात और शिशु स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों में भी सुधार दर्ज किया गया है।नवजात मृत्यु दर (Neonatal Mortality Rate) 27 से घटकर 26 प्रति हजार जीवित जन्म हो गई है। वहीं, शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate) 37 से घटकर 35 प्रति हजार जीवित जन्म दर्ज की गई है।
विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
मध्य प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं।राज्य के 52 जिलों में 70 हेमोडायलिसिस यूनिट संचालित हो रही हैं। इसके अलावा 52 कैंसर डे-केयर सेंटरों के माध्यम से कैंसर मरीजों को उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।इंदौर स्थित सरकारी महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में CAR-T सेल थेरेपी जैसी आधुनिक कैंसर उपचार सुविधा भी शुरू की गई है।
नए मेडिकल कॉलेजों पर काम जारी
राज्य में स्वास्थ्य शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण किया जा रहा है।छतरपुर, दमोह और बुधनी में मेडिकल कॉलेज भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं उज्जैन मेडिकल कॉलेज को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।इसके अलावा केंद्र सरकार की फेज-3 योजना के तहत राजगढ़ और मंडला में भी मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित हैं।
केंद्र और राज्य के सहयोग पर जोर
बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहयोग को स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।जेपी नड्डा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में आगे बढ़ रहा मध्य प्रदेश
बैठक के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विस्तार, मेडिकल शिक्षा बढ़ाने और नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया।मध्य प्रदेश सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करते हुए केंद्र सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में सहयोग जारी रखने की बात कही।