इंदौर। CBSE के ऑनलाइन मूल्यांकन सिस्टम में सामने आई तकनीकी गड़बड़ियों के बाद देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) ने उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन की अपनी योजना को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। विश्वविद्यालय ने प्रस्तावित सिस्टम की दोबारा समीक्षा शुरू कर दी है, ताकि किसी भी तरह की तकनीकी समस्या से बचा जा सके।
डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था लागू करने से पहले DAVV हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को गठित समिति ने इस सेवा के लिए इच्छुक तीन एजेंसियों के प्रस्तावों की समीक्षा की।
समिति ने एजेंसियों के काम करने के तरीके और तकनीकी प्रक्रियाओं का अध्ययन किया। इसमें उत्तर पुस्तिकाओं की कोडिंग और डिकोडिंग प्रक्रिया, स्कैनिंग व्यवस्था और डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की तकनीक जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई।
विश्वविद्यालय का उद्देश्य उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और सुरक्षित बनाना है। हालांकि, CBSE के ऑनलाइन मूल्यांकन सिस्टम में आई समस्याओं को देखते हुए DAVV किसी भी जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहता।
समिति ने एजेंसियों से यह जानकारी लेने की कोशिश की कि डिजिटल मूल्यांकन के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता कैसे बनाए रखी जाएगी। इसके अलावा यह भी देखा गया कि स्कैन की गई कॉपियों को मूल्यांकनकर्ताओं तक सुरक्षित तरीके से कैसे पहुंचाया जाएगा।
DAVV की योजना के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल माध्यम से मूल्यांकनकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित है। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में तेजी आने और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण पहलू उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा और सही तरीके से मूल्यांकन सुनिश्चित करना है। इसलिए एजेंसियों की तकनीकी क्षमता और उनके सिस्टम की विश्वसनीयता की जांच की जा रही है।
समिति की अगली बैठक अगले सप्ताह आयोजित की जाएगी। इसमें यह विचार किया जाएगा कि स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं को ऑनलाइन मूल्यांकन के लिए परीक्षकों तक किस तरह उपलब्ध कराया जाएगा।
इसके बाद शॉर्टलिस्ट की गई एजेंसियों को प्रेजेंटेशन देने के लिए बुलाया जाएगा। साथ ही सिस्टम की कार्यप्रणाली को समझने के लिए ट्रायल भी कराया जा सकता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन लागू होने से परीक्षा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है। वर्तमान में उत्तर पुस्तिकाओं के भौतिक परिवहन और मैनुअल मूल्यांकन में अधिक समय लगता है।
हालांकि, डिजिटल व्यवस्था लागू करने से पहले तकनीकी खामियों को दूर करना जरूरी है। विश्वविद्यालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि नई प्रणाली से छात्रों के मूल्यांकन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित न हो।
CBSE ऑनलाइन मूल्यांकन सिस्टम से जुड़ी खबरों के बाद देशभर में डिजिटल परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्थाओं की सुरक्षा को लेकर चर्चा बढ़ी है। इसी को ध्यान में रखते हुए DAVV भी अपनी योजना को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है।
उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग, डेटा सुरक्षा, मूल्यांकनकर्ताओं की पहुंच और तकनीकी सहायता जैसे मुद्दे इस पूरी प्रक्रिया के अहम हिस्से होंगे। समिति इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है।
DAVV में डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था लागू होने के बाद विश्वविद्यालय से जुड़े हजारों छात्रों को इसका लाभ मिल सकता है। लेकिन अंतिम फैसला सभी तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा।
फिलहाल विश्वविद्यालय एजेंसियों के प्रस्तावों का अध्ययन कर रहा है और आने वाली बैठकों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य ऐसी डिजिटल प्रणाली तैयार करना है, जो सुरक्षित होने के साथ-साथ मूल्यांकन प्रक्रिया को भी अधिक प्रभावी बना सके।