इंदौर। गणेश चतुर्थी के अवसर पर जहां देशभर में भगवान गणेश की स्थापना और पूजा-अर्चना का दौर चल रहा है, वहीं इंदौर के एक व्यक्ति ने अपने दिवंगत पिता को श्रद्धांजलि देने का अनोखा तरीका चुना है। इंदौर निवासी प्रणय गुप्ता पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक आस्था को जोड़ते हुए देशभर के घरों तक शुद्ध गाय के गोबर से बनीं हजारों इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं पहुंचा रहे हैं।

इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में भी गणेश चतुर्थी का उत्सव पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। ढोल-ताशों की गूंज और रंग-बिरंगी रोशनी के बीच श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इसी धार्मिक माहौल के बीच प्रणय गुप्ता की पहल लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

प्रणय गुप्ता ने बताया कि उनके पिता कैलाश चंद गुप्ता के निधन को नौ साल हो चुके हैं, लेकिन उनकी यादों को जीवित रखने के लिए उन्होंने यह सेवा कार्य शुरू किया। उनका उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना भी है।

उन्होंने अपनी निजी खर्च से इस पहल को जारी रखा है। हर साल गणेश उत्सव के दौरान वह शुद्ध गाय के गोबर से तैयार की गई पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाएं लोगों तक पहुंचाते हैं।

प्रणय का मानना है कि धार्मिक परंपराओं के साथ प्रकृति की रक्षा करना भी जरूरी है। अक्सर प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियों के विसर्जन से जल स्रोतों पर असर पड़ता है। ऐसे में गोबर से बनी प्रतिमाएं पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं।

उन्होंने बताया कि गोबर से बनी गणेश प्रतिमाएं पूरी तरह प्राकृतिक होती हैं और इनके विसर्जन से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता। इस पहल के जरिए वह लोगों को पारंपरिक और पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।

प्रणय गुप्ता की यह पहल धीरे-धीरे लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग इन इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं को प्राप्त कर रहे हैं और गणेश उत्सव में इन्हें स्थापित कर रहे हैं।

उन्होंने अपने पिता की स्मृति को सामाजिक सेवा से जोड़ दिया है। उनका कहना है कि परिवार के किसी सदस्य की याद को केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित रखने के बजाय समाज के लिए उपयोगी कार्यों के माध्यम से भी सम्मान दिया जा सकता है।

गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है और कई दिनों तक पूजा-अर्चना के बाद विसर्जन किया जाता है। ऐसे में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं की मांग भी बढ़ रही है।

इंदौर में इस तरह की पहल को लेकर लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। कई लोग प्रणय गुप्ता के प्रयास की सराहना कर रहे हैं और इसे धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का बेहतर उदाहरण बता रहे हैं।

खजराना गणेश मंदिर में चल रहे उत्सव के बीच प्रणय गुप्ता की यह पहल एक अलग संदेश दे रही है। उनकी कोशिश है कि गणेश उत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रहे, बल्कि प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भी प्रतीक बने।

प्रणय गुप्ता की कहानी यह दिखाती है कि व्यक्तिगत भावनाओं को भी समाजहित से जोड़ा जा सकता है। पिता की स्मृति में शुरू किया गया उनका यह प्रयास आज हजारों लोगों तक पहुंच रहा है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है।

गणेश उत्सव के इस अवसर पर उनकी पहल श्रद्धा, परंपरा और पर्यावरण जागरूकता का अनोखा संगम बन गई है।

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