इंदौर : अन्नपूर्णा इलाके में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है, जहां ठगों ने खुद को बिजली विभाग का अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग व्यक्ति से कथित तौर पर 1.44 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर ली। साइबर अपराधियों ने पीड़ित को बिजली कनेक्शन काटने की धमकी देकर विश्वास में लिया और फिर एक खतरनाक मोबाइल एप्लीकेशन (APK फाइल) इंस्टॉल करवाकर बैंक खाते से रकम निकाल ली।

पुलिस के अनुसार, अन्नपूर्णा क्षेत्र निवासी शांतनु नाइक ने इस मामले की शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि घटना 19 जुलाई को हुई थी। उनके पिता प्रमोद नाइक को एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सऐप पर संदेश मिला था। संदेश भेजने वाले व्यक्ति ने खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताया और दावा किया कि बिजली बिल अपडेट नहीं होने के कारण रात 9:30 बजे उनके घर की बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाएगी।

संदेश में यह भी कहा गया था कि यदि बिजली कटने से बचानी है तो तत्काल दिए गए दूसरे मोबाइल नंबर पर संपर्क करें। अचानक बिजली कनेक्शन कटने की बात सुनकर बुजुर्ग प्रमोद नाइक ने बताए गए नंबर पर संपर्क किया। कॉल रिसीव करने वाले व्यक्ति ने खुद को बिजली विभाग का अधिकारी बताते हुए उन्हें भरोसा दिलाया कि वह उनकी समस्या का समाधान कर सकता है।

ठग ने बातचीत के दौरान बताया कि विभाग के ऑनलाइन सिस्टम में बिजली बिल का भुगतान अपडेट नहीं दिख रहा है, जबकि उपभोक्ता की ओर से भुगतान किया जा चुका है। उसने कहा कि रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए एक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसी बहाने उसने पीड़ित को अपने जाल में फंसा लिया।

इसके बाद साइबर ठग ने प्रमोद नाइक के मोबाइल पर एक APK फाइल भेजी। आरोपी ने दावा किया कि यह बिजली विभाग का आधिकारिक एप्लीकेशन है, जिसे इंस्टॉल करने के बाद रिकॉर्ड अपडेट हो जाएगा। साथ ही उसने कहा कि प्रक्रिया पूरी करने के लिए केवल 12 रुपये का भुगतान करना होगा।

पुलिस के मुताबिक, ठगों का असली उद्देश्य मोबाइल में सेंध लगाना था। जैसे ही पीड़ित ने APK फाइल डाउनलोड कर इंस्टॉल की और बताए गए निर्देशों का पालन किया, साइबर अपराधियों को मोबाइल से जुड़ी जानकारी तक पहुंच मिल गई। इसके बाद उन्होंने बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 1.44 लाख रुपये निकाल लिए।

जब परिवार को खाते से रकम निकाले जाने की जानकारी मिली तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद शांतनु नाइक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की ठगी में अपराधी सरकारी विभागों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों में डर पैदा करते हैं। बिजली कनेक्शन काटने, बैंक खाता बंद करने, केवाईसी अपडेट करने या जुर्माना लगाने जैसी बातों का डर दिखाकर वे लोगों से निजी जानकारी और मोबाइल एक्सेस हासिल कर लेते हैं।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आए संदेश या कॉल पर भरोसा न करें। बिजली विभाग या अन्य सरकारी विभाग आमतौर पर भुगतान अपडेट या कनेक्शन संबंधी समस्या के लिए अनजान APK फाइल इंस्टॉल करने को नहीं कहते हैं। किसी भी तरह का एप्लीकेशन डाउनलोड करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करनी चाहिए।

अन्नपूर्णा पुलिस अब मामले में तकनीकी जांच कर रही है। पुलिस कॉल डिटेल, मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जानकारी जुटाकर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

यह घटना एक बार फिर लोगों को साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत बताती है। खासकर बुजुर्ग लोग ऐसे ठगों के आसान शिकार बन जाते हैं, क्योंकि अपराधी सरकारी अधिकारी बनकर भरोसा हासिल करने की कोशिश करते हैं।

पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि बिजली बिल, बैंकिंग या किसी भी सरकारी सेवा से जुड़े मामलों में केवल आधिकारिक वेबसाइट, ऐप या हेल्पलाइन नंबर का ही इस्तेमाल करें। अनजान लिंक, APK फाइल या संदिग्ध ऐप को मोबाइल में इंस्टॉल न करें।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और ठगों की पहचान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधों को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है, ताकि वे इस तरह की धोखाधड़ी से बच सकें।

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