इंदौर। उच्च शिक्षा संस्थानों में केवल पढ़ाई और परीक्षा परिणामों तक सीमित रहने के बजाय ऐसा वातावरण तैयार करने की जरूरत है, जहां छात्र सीखने के साथ-साथ बदलती परिस्थितियों में खुद को ढाल सकें, आपसी जुड़ाव बढ़ा सकें और व्यक्तिगत व पेशेवर जीवन में आगे बढ़ सकें। इसी उद्देश्य को लेकर IIT इंदौर में दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला ‘संवर्धन: एकेडमिक एक्सीलेंस से सस्टेनेबल वेलनेस तक’ का आयोजन किया गया।
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के हायर एजुकेशन विभाग द्वारा संचालित मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम (MMTTP) के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य, छात्रों की भावनात्मक मजबूती और बेहतर कैंपस वातावरण को बढ़ावा देना है।
30 और 31 अगस्त को आयोजित इस सेंट्रल और वेस्ट रीजन कार्यक्रम में देश के कई राज्यों के उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसमें गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, पंजाब और मध्य प्रदेश के शिक्षकों, अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लेकर छात्र कल्याण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
शिक्षा के साथ जरूरी है मानसिक स्वास्थ्य
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान समय में छात्रों के सामने पढ़ाई के साथ कई तरह की मानसिक और सामाजिक चुनौतियां भी मौजूद हैं। प्रतिस्पर्धा, करियर का दबाव, बदलती जीवनशैली और व्यक्तिगत समस्याएं छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं।
ऐसे में उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें ऐसा माहौल भी तैयार करना चाहिए जहां छात्र अपनी समस्याओं को साझा कर सकें और उन्हें आवश्यक सहयोग मिल सके।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि एक स्वस्थ और सकारात्मक कैंपस वातावरण छात्रों की सीखने की क्षमता को बढ़ाता है। जब छात्र मानसिक रूप से मजबूत होते हैं, तो वे नई चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं।
छात्रों में विकसित हो लचीलापन
वर्कशॉप का एक प्रमुख विषय छात्रों में ‘रेजिलिएंस’ यानी कठिन परिस्थितियों से उबरने की क्षमता विकसित करना रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि जीवन में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए छात्रों में आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक सोच का होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि छात्रों को भविष्य की परिस्थितियों के लिए तैयार करना भी है। इसके लिए संस्थानों को ऐसे कार्यक्रम तैयार करने चाहिए, जिनसे छात्रों में नेतृत्व क्षमता, समस्या समाधान कौशल और सामाजिक जुड़ाव की भावना विकसित हो।
शिक्षकों की भूमिका अहम
कार्यशाला में शिक्षकों की भूमिका पर भी विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि शिक्षक केवल विषय ज्ञान देने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे छात्रों के मार्गदर्शक और प्रेरक भी होते हैं।
यदि शिक्षक छात्रों की मानसिक स्थिति, उनकी समस्याओं और जरूरतों को समझने का प्रयास करें, तो कई समस्याओं को शुरुआती स्तर पर ही हल किया जा सकता है। इसके लिए शिक्षकों को भी मानसिक स्वास्थ्य और छात्र व्यवहार से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है।
MMTTP का उद्देश्य
मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम का उद्देश्य उच्च शिक्षा में शिक्षकों की क्षमता बढ़ाना और शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। इसके तहत शिक्षकों को नई शिक्षण तकनीकों, नेतृत्व क्षमता, शोध और छात्र केंद्रित शिक्षा से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाता है।
‘संवर्धन’ कार्यशाला भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसमें उच्च शिक्षा संस्थानों को छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहतर रणनीतियां अपनाने पर चर्चा की गई।
बेहतर कैंपस संस्कृति पर जोर
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले समय में उच्च शिक्षा संस्थानों को केवल अकादमिक उपलब्धियों के आधार पर नहीं आंका जाएगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि वे छात्रों के लिए कितना बेहतर और सुरक्षित वातावरण तैयार कर रहे हैं।
एक ऐसा कैंपस जहां छात्र अपनी बात रख सकें, नए विचारों पर काम कर सकें और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें, वही शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य को पूरा करता है।
IIT इंदौर में आयोजित यह कार्यशाला उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक ऐसा मंच बनी, जहां छात्र कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य और बेहतर शैक्षणिक माहौल को लेकर अनुभव साझा किए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकता है।