MP में आंगनवाड़ी पद खाली, सेवाएं प्रभावित

Update: 2026-07-03 04:15 GMT

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : आंगनवाड़ी सेवाओं को लेकर किए गए जिलेवार रिव्यू में एक बड़ी कमी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कई जिलों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (वर्कर) और सहायिका (हेल्पर) के पद बड़े पैमाने पर खाली पड़े हैं, जिससे जमीनी स्तर पर बच्चों और महिलाओं से जुड़ी सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

राज्य के इंदौर जिले में 12 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 19 सहायिका के पद खाली हैं। इसी तरह मंडला जिले में 19 कार्यकर्ता और 26 सहायिका के पद रिक्त हैं, जबकि सिवनी जिले में स्थिति और भी अधिक गंभीर है, जहां 20 कार्यकर्ता और 48 सहायिका के पद खाली बताए गए हैं। नर्मदापुरम में 13 कार्यकर्ता और 21 सहायिका के पद रिक्त हैं, वहीं बैतूल जिले में 20 कार्यकर्ता और 71 सहायिका के पद खाली पड़े हैं। हरदा जिले में सात कार्यकर्ता और 17 सहायिका के पद खाली होने की जानकारी सामने आई है।

राजधानी भोपाल जिले में भी आंगनवाड़ी व्यवस्था पूरी तरह संतुलित नहीं है। यहां 10 कार्यकर्ता और 29 सहायिका के पद खाली हैं। राजगढ़ जिले में 19 कार्यकर्ता और 70 सहायिका की वैकेंसी दर्ज की गई है, जबकि रायसेन जिले में 14 कार्यकर्ता और 29 सहायिका के पद रिक्त हैं। विदिशा जिले में स्थिति और अधिक चिंताजनक है, जहां 19 कार्यकर्ता और 73 सहायिका की वैकेंसी सामने आई है। सीहोर जिले में 14 कार्यकर्ता और 28 सहायिका के पद खाली हैं।

मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। मैहर जिले में सात कार्यकर्ता और 14 सहायिका के पद खाली हैं। मऊगंज जिले में कार्यकर्ता के सभी पद भरे हुए हैं, लेकिन चार सहायिका की वैकेंसी अभी भी मौजूद है। रीवा जिले में नौ कार्यकर्ता और 31 सहायिका के पद खाली हैं। सतना में 11 कार्यकर्ता और 30 सहायिका के पद रिक्त हैं, जबकि सिंगरौली जिले में दो कार्यकर्ता और आठ सहायिका की वैकेंसी दर्ज की गई है। सीधी जिले में पांच कार्यकर्ता और 12 सहायिका के पद खाली पड़े हैं।

आंगनवाड़ी व्यवस्था ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बच्चों के पोषण, टीकाकरण, प्रारंभिक शिक्षा और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में बड़ी संख्या में पद खाली होने से इन सेवाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की कमी के कारण कई केंद्रों पर नियमित सेवाएं प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका का सीधा संबंध ग्रामीण और कमजोर वर्ग की महिलाओं और बच्चों से होता है। ऐसे में यदि पद लंबे समय तक खाली रहते हैं तो पोषण योजनाओं, स्वास्थ्य जांच और बाल विकास कार्यक्रमों की पहुंच प्रभावित हो सकती है।

जिलेवार आंकड़े बताते हैं कि कई क्षेत्रों में सहायिका के पद अपेक्षाकृत अधिक खाली हैं, जिससे कार्यकर्ताओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। बैतूल, विदिशा और राजगढ़ जैसे जिलों में सहायिका की संख्या में अधिक रिक्तियां विशेष रूप से चिंता का विषय मानी जा रही हैं।

सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आंगनवाड़ी नेटवर्क की भूमिका अहम होती है। बच्चों में कुपोषण की रोकथाम, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में यह व्यवस्था आधारभूत मानी जाती है।

हालांकि सरकार की ओर से समय-समय पर भर्ती प्रक्रिया चलाने की बात कही जाती रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर रिक्त पदों की संख्या अभी भी अधिक बनी हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि भर्ती प्रक्रिया और नियुक्तियों की गति में सुधार की आवश्यकता है।

इन खाली पदों के कारण कई केंद्रों पर एक ही कर्मचारी पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ रही है, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है, जहां पहले से ही संसाधनों की कमी रहती है।

कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश के जिलेवार आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि आंगनवाड़ी प्रणाली में स्टाफ की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसे समय पर भरना राज्य में पोषण और बाल विकास योजनाओं की सफलता के लिए बेहद जरूरी है।

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