भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। नीट पेपर लीक समेत देशभर में सामने आ रहे परीक्षा विवादों के बीच अब मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परीक्षाओं को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए एक सख्त कानून लाया जाएगा। इस कानून के जरिए पेपर लीक, नकल माफिया, सॉल्वर गैंग और संगठित परीक्षा अपराधों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों के साथ बैठक कर परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए काम कर रही है। सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए कठोर कानून बनाना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रस्तावित कानून में पेपर लीक करने वालों, परीक्षा में डिजिटल माध्यम से नकल कराने वालों, फर्जी पहचान के जरिए परीक्षा देने वालों और सॉल्वर गैंग से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया जाएगा। दोषियों पर कठोर दंड के साथ आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उनकी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी की जा सकेगी।
सरकार ने यह भी फैसला किया है कि परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच में तेजी लाई जाएगी। ऐसे मामलों को जल्द निपटाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की व्यवस्था की जाएगी। इससे दोषियों को जल्द सजा दिलाने और परीक्षा प्रणाली में अभ्यर्थियों का भरोसा बनाए रखने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा मध्य प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं के नियमों में भी बदलाव की तैयारी चल रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित परीक्षाओं की प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने के लिए नए नियमों का प्रारूप तैयार किया है। इन नियमों पर दावा-आपत्ति भी मांगी जा चुकी है और जल्द ही इन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत समान पात्रता वाले पदों के लिए एक समूह बनाया जाएगा। इसके बाद ऐसे पदों के लिए बार-बार अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित करने के बजाय वर्ष में एक ही परीक्षा कराने की योजना है। इससे अभ्यर्थियों को बार-बार आवेदन और परीक्षा प्रक्रिया से गुजरने की परेशानी कम होगी।
परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करेगी। प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा परिणाम जारी होने तक पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने की योजना है। इसके लिए डिजिटल एन्क्रिप्शन, सीसीटीवी निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, एआई तकनीक की मदद से परीक्षा के दौरान संदिग्ध गतिविधियों की पहचान की जाएगी। इससे नकल करने वाले गिरोहों और अनुचित तरीकों का इस्तेमाल करने वालों पर नजर रखी जा सकेगी। परीक्षा केंद्रों की निगरानी और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष व्यवस्था तैयार की जाएगी।
सरकार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक स्वतंत्र शिकायत निवारण प्रकोष्ठ बनाने की तैयारी में है। इसके माध्यम से अभ्यर्थी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकेंगे और अपनी शिकायत की स्थिति भी देख सकेंगे। शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। गंभीर मामलों में स्वतंत्र जांच की व्यवस्था भी की जाएगी।
मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम परीक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। हाल के वर्षों में पेपर लीक और नकल से जुड़े मामलों ने लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में सरकार का उद्देश्य एक ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना है, जिसमें पारदर्शिता, सुरक्षा और निष्पक्षता को प्राथमिकता मिले।
नए कानून के लागू होने के बाद परीक्षा माफिया और संगठित गिरोहों पर कार्रवाई का रास्ता और मजबूत होगा। सरकार का दावा है कि आधुनिक तकनीक और सख्त कानूनी प्रावधानों के जरिए मध्य प्रदेश में परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जाएगा।