उत्तराखंड-गुजरात-असम के बाद MP ने बढ़ाया कदम

Update: 2026-07-21 10:53 GMT

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को मंजूरी दे दी गई है। भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच यह बिल बहुमत से पारित हुआ। इसके साथ ही मध्य प्रदेश उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है। सरकार का दावा है कि UCC का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानून व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद प्रदेश में सभी धर्मों और वर्गों के लोगों के लिए एक समान नियम लागू होंगे। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण विषय पर कुछ लोग दोहरा रवैया अपना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान करना है।

विधानसभा में विधेयक पेश किए जाने के दौरान कांग्रेस विधायकों ने जमकर विरोध किया। सदन में नारेबाजी और हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने अपना वक्तव्य रखा। विपक्ष ने सरकार पर कई आरोप लगाए, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया। हंगामे के बावजूद विधानसभा में बहुमत के आधार पर विधेयक पारित कर दिया गया।

UCC विधेयक में विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप और अन्य व्यक्तिगत मामलों से जुड़े कई प्रावधान शामिल किए गए हैं। सरकार के अनुसार, कानून लागू होने के बाद प्रदेश में विवाह संबंधी नियम सभी नागरिकों के लिए समान होंगे। एक से अधिक विवाह करने पर भी नए नियम लागू होंगे और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में रहने वाले हर नागरिक को समान कानून के दायरे में लाने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें सामाजिक सुरक्षा देने के लिए UCC जरूरी है। सरकार का कहना है कि इससे भेदभाव खत्म होगा और न्याय व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी नए प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे ऐसे संबंधों में रहने वाले लोगों, खासकर महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

इसके अलावा तलाक के बाद दोबारा विवाह को लेकर भी प्रावधान शामिल किए गए हैं। विधेयक के अनुसार, तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा विवाह करने के लिए हलाला जैसी प्रथाओं को बढ़ावा देना या किसी व्यक्ति को इसके लिए मजबूर करना अपराध माना जाएगा। सरकार ने इसे महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया है।

मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि UCC लागू होने के बाद राज्य में व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान नागरिक कानून व्यवस्था लागू होगी। इससे विवाह, तलाक, संपत्ति और पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक जैसे नियम होंगे।

गौरतलब है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना था जिसने समान नागरिक संहिता कानून को लागू किया। इसके बाद गुजरात और असम ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया। अब मध्य प्रदेश भी उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जहां UCC को लेकर कानून बनाया गया है।

सरकार इसे सामाजिक सुधार और समानता की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष ने इसके प्रावधानों को लेकर सवाल उठाए हैं। आने वाले समय में विधेयक के लागू होने के बाद इसके प्रभाव और नियमों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।

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