बेंगलुरु। देश में मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कर्नाटक के विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का बचाव किया। भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित किए जा चुके यतनाल ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त पारदर्शी तरीके से काम कर रहे हैं और SIR की प्रक्रिया मतदाता सूची से कथित फर्जी, डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम हटाने में मदद कर रही है। दूसरी ओर कांग्रेस सहित विपक्ष के कई नेता SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
पत्रकारों से बातचीत में यतनाल ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करने वाले मुख्य रूप से कांग्रेस और विपक्षी दलों से जुड़े लोग हैं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के कामकाज का समर्थन करते हुए दावा किया कि चुनाव आयोग देशभर में मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की दिशा में काम कर रहा है।यतनाल ने कहा, "जो लोग मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वे कांग्रेस पार्टी के हैं। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पूरे देश में बहुत पारदर्शी तरीके से काम कर रहे हैं।" इसके साथ उन्होंने बांग्लादेशी, रोहिंग्या और पश्चिम बंगाल के कथित फर्जी मतदाताओं को लेकर भी दावे किए। हालांकि इन विशिष्ट दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है और इन्हें यतनाल के राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।
यतनाल का यह बयान ऐसे समय आया है जब SIR को लेकर देश में राजनीतिक टकराव तेज है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने SIR को तत्काल रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को शामिल करना और अपात्र या गलत प्रविष्टियों को हटाना है।
यतनाल ने SIR का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता सूची में डुप्लीकेट नाम, मृत व्यक्तियों के नाम या दूसरी संदिग्ध प्रविष्टियां मौजूद नहीं रहनी चाहिए। उनके मुताबिक, मतदाता सूची को साफ और सही रखना निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया के लिए आवश्यक है।हालांकि कर्नाटक में खुद यतनाल से जुड़े मतदाता सूची के कुछ दावों पर विवाद भी सामने आया है। विजयपुरा में आठ मतदाताओं ने उन दावों को चुनौती दी जिनमें उनके नामों को संदिग्ध या मृत मतदाताओं से संबंधित बताया गया था। बेंगलुरु में SIR के दौरान कथित रूप से गलत Form-7 आवेदन जमा किए जाने को लेकर एक अलग FIR भी दर्ज हुई है। इससे राज्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद और बढ़ा है।
इससे पहले यतनाल ने कहा था कि उनकी टीम ने विजयपुरा में 28,300 से ज्यादा संदिग्ध मतदाताओं को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनका दावा था कि उनकी ओर से चुनाव पंजीकरण अधिकारियों को मृत्यु प्रमाणपत्र, डुप्लीकेट EPIC कार्ड की प्रतियां, मतदाता सूची के विवरण और स्थान बदलने वाले मतदाताओं से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि इन आपत्तियों की जांच करना संबंधित चुनाव अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
दूसरी ओर कांग्रेस का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। पार्टी ने इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए देशव्यापी विरोध कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं। विपक्षी दलों के प्रदर्शनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की समीक्षा की मांग प्रमुख रही है। चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।मामला न्यायिक स्तर पर भी पहुंच चुका है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR से संबंधित फैसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और केंद्र से एक याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।
SIR का मुद्दा अब केवल मतदाता सूची के तकनीकी पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। एक तरफ विपक्ष मतदाताओं के नाम हटाए जाने और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, वहीं इसके समर्थक इसे मतदाता सूची में गलत और अपात्र प्रविष्टियों को हटाने के लिए जरूरी प्रक्रिया बता रहे हैं।इसी राजनीतिक बहस के बीच बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पक्ष में खुलकर बयान दिया है। उनका कहना है कि मतदाता सूची में फर्जी, डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं से संबंधित प्रविष्टियों की पहचान जरूरी है और SIR इसी दिशा में काम कर रहा है। फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और इससे जुड़े कई सवाल अदालत तथा चुनाव आयोग के सामने भी विचाराधीन हैं।
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