बेंगलुरु। राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन नागलक्ष्मी ने पाराप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल का दौरा करने के बाद कन्नड़ अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा की मानसिक स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि जेल में पवित्रा गौड़ा मानसिक रूप से परेशान हैं और उनकी हालत बेहद दुखद है।

महिला आयोग की चेयरपर्सन ने कहा कि एक मां के नजरिए से हर महिला और हर बेटी समान होती है। उन्होंने कहा कि पवित्रा गौड़ा हों या कोई अन्य महिला कैदी, सभी के साथ मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने पवित्रा गौड़ा को भी अपनी बेटी जैसा बताया।

यह बयान उन्होंने जेल में महिला कैदियों की स्थिति, स्वास्थ्य और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लेने के बाद दिया।

जेल पहुंचकर महिला कैदियों से की बातचीत

नागलक्ष्मी ने बताया कि उन्होंने पाराप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में महिला कैदियों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना। इस दौरान उन्होंने पवित्रा गौड़ा से भी बातचीत की।

उन्होंने कहा कि जेल में रहने वाली महिलाओं की मानसिक स्थिति को समझना जरूरी है। कई बार किसी मामले को लेकर लगातार चर्चा होने से कैदियों पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है।

महिला आयोग की चेयरपर्सन ने कहा कि उन्होंने पवित्रा गौड़ा समेत अन्य महिला कैदियों से उनकी परेशानियों के बारे में जानकारी ली।

महिला बैरकों और सुविधाओं का किया निरीक्षण

जेल दौरे के दौरान नागलक्ष्मी ने महिला कैदियों के लिए बनाए गए बैरकों का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां साफ-सफाई, रहने की व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।

उन्होंने कैदियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता की भी जांच की। इसके अलावा साबुन, टूथपेस्ट और अन्य जरूरी सामानों की उपलब्धता को लेकर भी जानकारी जुटाई।

उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन की ओर से दी जाने वाली मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को समझना जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर सुधार किए जा सकें।

मच्छरों की समस्या की शिकायत

महिला कैदियों ने जेल में मच्छरों की समस्या को लेकर भी शिकायत की। नागलक्ष्मी ने बताया कि कई कैदियों ने मच्छरों की अधिक संख्या और उससे होने वाली परेशानी के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि कैदियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित अधिकारियों के सामने इन मुद्दों को रखा जाएगा।

पवित्रा गौड़ा को लेकर दी प्रतिक्रिया

पवित्रा गौड़ा की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर नागलक्ष्मी ने कहा कि उनकी हालत को लेकर ज्यादा चर्चा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह भी एक महिला हैं और उन्हें मानसिक दबाव से गुजरना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार जो प्रक्रिया होगी, वही आगे चलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं भावनात्मक रूप से ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं, इसलिए उनके मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है।

अन्य महिला कैदियों की समस्याएं भी सुनीं

नागलक्ष्मी ने कहा कि जेल में केवल पवित्रा गौड़ा ही नहीं, बल्कि कई अन्य महिला कैदियों से भी उन्होंने बातचीत की।

उन्होंने कहा कि सभी कैदियों की अपनी-अपनी समस्याएं हैं और उनकी बात सुनी जानी चाहिए। कई महिलाएं अपने मामलों और जेल की परिस्थितियों के कारण मानसिक तनाव से गुजरती हैं।

उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं ने गलतियां की हैं, उनके खिलाफ कानून अपना काम करेगा, लेकिन जेल में रहने के दौरान उनके साथ मानवीय व्यवहार भी जरूरी है।

मानसिक स्वास्थ्य पर जोर

महिला आयोग की चेयरपर्सन ने कहा कि जेल में बंद महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लगातार मीडिया चर्चा और सामाजिक दबाव के कारण कई बार कैदियों पर अतिरिक्त तनाव पड़ता है।

उन्होंने कहा कि जेल व्यवस्था में कैदियों को केवल सजा देना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि सुधार और मानसिक सहयोग की व्यवस्था भी होनी चाहिए।

पवित्रा गौड़ा मामला चर्चा में रहा

पवित्रा गौड़ा का नाम कन्नड़ अभिनेता दर्शन से जुड़े एक चर्चित मामले के कारण सुर्खियों में रहा है। इस मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

महिला आयोग की चेयरपर्सन के जेल दौरे के बाद अब एक बार फिर पवित्रा गौड़ा की स्थिति चर्चा में आ गई है।

फिलहाल कानून के तहत मामले की प्रक्रिया जारी है, वहीं महिला आयोग जेल में महिला कैदियों को मिलने वाली सुविधाओं और उनकी समस्याओं की समीक्षा कर रहा है।

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