सूखे से टांडा बेहाल, 5 हजार से ज्यादा लोगों का पलायन

Update: 2026-07-24 05:06 GMT

बेल्लारी/विजयनगर : कर्नाटक के बेल्लारी और विजयनगर जिलों में सूखे की बढ़ती समस्या ने बंजारा समुदाय की बस्तियों यानी ‘टांडा’ में रहने वाले लोगों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। लगातार बारिश की कमी, फसलों की बर्बादी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों में कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़कर रोजगार की तलाश में दूसरे जिलों और राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।

स्थानीय जानकारी के अनुसार, बेल्लारी और विजयनगर जिलों से इस साल 5 हजार से अधिक लोग रोजगार की तलाश में पड़ोसी जिलों और अन्य राज्यों की ओर जा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे परिवार शामिल हैं, जिनकी आजीविका खेती और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थी। सूखे के कारण खेती प्रभावित होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

बेल्लारी और विजयनगर जिलों में राज्य के सबसे अधिक संख्या में ‘टांडा’ स्थित हैं। इन बस्तियों में रहने वाला बंजारा समुदाय लंबे समय से कृषि, निर्माण कार्य और असंगठित क्षेत्र के रोजगार पर निर्भर रहा है। सामान्य परिस्थितियों में भी समुदाय के कई लोग हर साल मौसमी पलायन करते हैं, लेकिन इस बार सूखे की स्थिति ने पलायन की समस्या को और गंभीर बना दिया है।

समुदाय के नेताओं का कहना है कि इस वर्ष बारिश की कमी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। खेतों में पर्याप्त पानी नहीं मिलने से फसलें खराब हो गईं, जिससे किसानों और कृषि मजदूरों की आय का प्रमुख स्रोत खत्म हो गया। इसके बाद परिवारों को जीवनयापन के लिए दूसरे स्थानों पर काम तलाशने के लिए मजबूर होना पड़ा।

बंजारा समुदाय के कई परिवारों का कहना है कि गांवों में अब पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं है। खेती से आमदनी नहीं होने के कारण बच्चों और परिवार के साथ दूसरे राज्यों की ओर जाना उनकी मजबूरी बन गई है। कई लोग निर्माण स्थलों, ईंट भट्ठों और अन्य असंगठित क्षेत्रों में काम करने के लिए पलायन कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, सूखे का सबसे ज्यादा असर छोटे किसानों और भूमिहीन मजदूरों पर पड़ा है। जिन परिवारों के पास सीमित जमीन है, वे भी खेती से होने वाली आय पर निर्भर थे। लेकिन बारिश नहीं होने के कारण उनकी लागत तक निकलना मुश्किल हो गया है।

समुदाय के प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं और सूखे से प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर काम और आर्थिक सहायता मिले तो लोगों को मजबूरी में अपने घर छोड़कर नहीं जाना पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक सूखे की स्थिति रहने से केवल कृषि ही प्रभावित नहीं होती, बल्कि इससे रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं पर भी असर पड़ता है। परिवारों के पलायन के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने और सामाजिक समस्याएं बढ़ने की आशंका भी रहती है।

प्रशासन की ओर से सूखे की स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन प्रभावित लोगों का कहना है कि जमीनी स्तर पर राहत और रोजगार की जरूरत अधिक है। ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें तत्काल रोजगार उपलब्ध कराया जाए और जल संकट दूर करने के लिए स्थायी उपाय किए जाएं।

बेल्लारी और विजयनगर क्षेत्र पहले से ही पानी की कमी और अनियमित वर्षा जैसी समस्याओं का सामना करते रहे हैं। ऐसे में लगातार सूखे की स्थिति ने ग्रामीण परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कृषि आधारित समुदायों के लिए यह संकट रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डाल रहा है।

समुदाय के नेताओं का कहना है कि इस बार का पलायन सामान्य मौसमी पलायन से अलग है। पहले लोग कुछ समय के लिए काम की तलाश में जाते थे और वापस लौट आते थे, लेकिन इस बार फसल नुकसान और रोजगार संकट के कारण लंबे समय तक बाहर रहने की स्थिति बन रही है।

फिलहाल बड़ी संख्या में बंजारा परिवार रोजगार की तलाश में दूसरे क्षेत्रों में जा चुके हैं। स्थानीय प्रशासन और सरकार के सामने चुनौती है कि सूखे से प्रभावित लोगों को राहत देने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि लोगों को मजबूरी में पलायन न करना पड़े।

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