बेंगलुरु। कर्नाटक में नकली दवाओं के एक संदिग्ध रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA) के ड्रग विंग ने छापेमारी की है। अधिकारियों ने कार्रवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की है, जिसमें Pfizer जैसी बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियों के लेबल भी शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार, यह छापेमारी मंगलवार को मैसूरु रोड पर बिदादी इलाके में टोल गेट के पास स्थित एक जगह पर की गई। जांच एजेंसियों को शक है कि यहां नकली या संदिग्ध दवाओं की रीपैकेजिंग और रीलेबलिंग का काम किया जा रहा था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर दवाओं को दोबारा पैक कर उन पर प्रतिष्ठित कंपनियों के लेबल लगाए जा रहे थे, ताकि वे असली उत्पादों जैसी दिखाई दें और बाजार में आसानी से बेची जा सकें।
बड़ी कंपनियों के नाम का गलत इस्तेमाल करने का शक
FSDA अधिकारियों के मुताबिक, छापेमारी के दौरान मिले लेबल और अन्य सामग्री से आशंका जताई जा रही है कि कुछ लोग नामी फार्मा कंपनियों के ब्रांड का गलत इस्तेमाल कर रहे थे।
जांच एजेंसियों का मानना है कि नकली दवाओं को पहचानना आम लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है, क्योंकि पैकेजिंग और लेबलिंग को इस तरह तैयार किया जाता है कि वह असली उत्पाद जैसा लगे।
इस तरह की गतिविधियां न केवल कंपनियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
बिदादी में हुई कार्रवाई
अधिकारियों ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर ड्रग विंग की टीम ने बिदादी क्षेत्र में कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान टीम ने मौके से कई संदिग्ध सामग्री बरामद की।
जांच अधिकारियों ने जब्त किए गए सामान को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। बरामद दवाओं, पैकेजिंग सामग्री और लेबल की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था।
रीपैकेजिंग और रीलेबलिंग का खेल
अधिकारियों के अनुसार, नकली दवा कारोबार में अक्सर रीपैकेजिंग और रीलेबलिंग का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कम गुणवत्ता वाली या संदिग्ध दवाओं को नए पैकेट में डालकर उन पर किसी प्रतिष्ठित कंपनी का नाम या लेबल लगाया जा सकता है।
इस तरह की गतिविधियों से ग्राहकों को धोखा दिया जाता है और उन्हें यह विश्वास दिलाने की कोशिश की जाती है कि वे किसी भरोसेमंद कंपनी की दवा खरीद रहे हैं।
ड्रग विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और दवाओं की सप्लाई कहां-कहां की जा रही थी।
मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला
नकली दवाएं स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं। गलत दवा लेने से मरीज की बीमारी बढ़ सकती है या इलाज का असर कम हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं की गुणवत्ता और उनकी असली पहचान सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। खासकर गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं में किसी भी तरह की मिलावट या नकली उत्पाद मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।
कंपनियों के ब्रांड की सुरक्षा भी चुनौती
फार्मास्युटिकल कंपनियां लंबे समय से नकली उत्पादों की समस्या से जूझ रही हैं। नकली दवाओं के कारण कंपनियों की छवि प्रभावित होती है और ग्राहकों का भरोसा कमजोर पड़ता है।
इसी वजह से ड्रग रेगुलेटरी एजेंसियां समय-समय पर ऐसे मामलों में कार्रवाई करती हैं। FSDA की ताजा कार्रवाई को भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आगे की जांच जारी
फिलहाल FSDA का ड्रग विंग मामले की विस्तृत जांच कर रहा है। अधिकारियों ने जब्त किए गए सामान और दवाओं के नमूनों की जांच शुरू कर दी है।
जांच के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि नकली दवाओं का निर्माण या पैकेजिंग कहां से की जा रही थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ ड्रग कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
नकली दवाओं के खिलाफ अभियान तेज
ड्रग विभाग का कहना है कि राज्य में नकली और अवैध दवाओं के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि वे केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदें और संदिग्ध पैकेजिंग या कम कीमत में मिलने वाली दवाओं को लेकर सावधानी बरतें।
कर्नाटक में हुई यह कार्रवाई एक बार फिर बताती है कि नकली दवाओं का कारोबार स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब जांच के नतीजों से ही साफ होगा कि इस कथित रैकेट का नेटवर्क कितना बड़ा था।