बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार को मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वोयर परियोजना को लेकर तमिलनाडु की चिंताओं को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कर्नाटक प्रस्तावित मेकेदातु परियोजना से कावेरी के पानी का इस्तेमाल केवल पीने के उद्देश्य से करेगा और इसके लिए 5 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (TMC) पानी का ही उपयोग किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना के पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए नहीं किया जाएगा।
शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में तमिलनाडु को यह भरोसा दिया है कि मेकेदातु बांध में उपलब्ध पानी में से निर्धारित मात्रा पीने के लिए इस्तेमाल करने के बाद बाकी पानी तमिलनाडु की ओर छोड़ दिया जाएगा। उन्होंने तमिलनाडु और पुडुचेरी से परियोजना को लेकर आश्वस्त रहने की अपील भी की।
मुख्यमंत्री ने यह बयान अमित शाह की अध्यक्षता में हुई सदर्न जोनल काउंसिल की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया। बैठक में दक्षिण भारत से जुड़े कई अंतरराज्यीय मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें कावेरी जल और मेकेदातु परियोजना भी प्रमुख विषयों में शामिल रही।
तमिलनाडु लगातार कर रहा विरोध
मेकेदातु परियोजना को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। तमिलनाडु इस परियोजना का विरोध करता रहा है। कर्नाटक का प्रस्ताव है कि कावेरी नदी पर मेकेदातु में एक बैलेंसिंग रिजर्वोयर बनाया जाए। कर्नाटक सरकार का कहना है कि इससे बेंगलुरु की बढ़ती पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
कर्नाटक के प्रस्ताव के मुताबिक, परियोजना के जरिए बेंगलुरु के लिए करीब 4.75 TMC पानी का इस्तेमाल किया जा सकेगा। दूसरी ओर, तमिलनाडु को आशंका है कि इस तरह के रिजर्वोयर से कावेरी के पानी के प्रवाह और राज्य को मिलने वाले पानी पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से तमिलनाडु सरकार लंबे समय से परियोजना का विरोध कर रही है।
‘सिंचाई के लिए एक बूंद भी नहीं’
शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि मेकेदातु परियोजना का उद्देश्य सिंचाई के लिए पानी रोकना नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक परियोजना से सिंचाई के लिए पानी की एक बूंद भी इस्तेमाल नहीं करेगा। उनके मुताबिक, राज्य की प्राथमिकता बेंगलुरु की पेयजल जरूरत को पूरा करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी में उन्होंने यह आश्वासन दिया है कि पीने के लिए 5 TMC फीट पानी को छोड़कर बाकी पानी मेकेदातु बांध से तमिलनाडु की ओर छोड़ दिया जाएगा। उन्होंने इसे तमिलनाडु के हितों को ध्यान में रखने वाला आश्वासन बताया।
शिवकुमार ने कहा कि तमिलनाडु और पुडुचेरी को इस परियोजना को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि प्रस्तावित बांध का उद्देश्य उनके अनुसार बेंगलुरु की पेयजल जरूरतों को पूरा करना है, न कि तमिलनाडु के हिस्से के पानी को रोकना।
कावेरी जल विवाद का पुराना मुद्दा
कावेरी नदी का पानी कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच दशकों से विवाद का विषय रहा है। दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर कई बार राजनीतिक और कानूनी टकराव देखने को मिला है। बारिश और जलाशयों में पानी की उपलब्धता के आधार पर दोनों राज्यों की मांग और चिंताएं बदलती रहती हैं।
ऐसे में मेकेदातु परियोजना का मुद्दा भी केवल एक जलाशय के निर्माण तक सीमित नहीं है। यह कावेरी के जल प्रवाह, दोनों राज्यों की पेयजल और सिंचाई जरूरतों तथा भविष्य में पानी के बंटवारे से जुड़ा संवेदनशील विषय है।
कर्नाटक का तर्क है कि बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते महानगर की पेयजल जरूरत लगातार बढ़ रही है। राज्य सरकार मेकेदातु परियोजना को इसी जरूरत के समाधान के तौर पर देखती है। वहीं तमिलनाडु को आशंका है कि कर्नाटक में अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता बनने से नदी के प्राकृतिक प्रवाह और उसके हिस्से के पानी पर असर पड़ सकता है।
बेंगलुरु की पेयजल जरूरत पर जोर
शिवकुमार ने मेकेदातु परियोजना के पक्ष में बेंगलुरु की पेयजल जरूरत को प्रमुख आधार बनाया। बेंगलुरु की आबादी और शहरी क्षेत्र के विस्तार के साथ पेयजल की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त जल स्रोत और भंडारण क्षमता आवश्यक है।
मेकेदातु में प्रस्तावित बैलेंसिंग रिजर्वोयर को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कर्नाटक सरकार इसे बेंगलुरु के लिए पेयजल सुरक्षा मजबूत करने वाली परियोजना के रूप में प्रस्तुत करती रही है।
बैठक में भरोसा दिलाने की कोशिश
सदर्न जोनल काउंसिल की बैठक में शिवकुमार की ओर से दिया गया आश्वासन इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि कावेरी जल विवाद में दोनों राज्यों के बीच संवाद बनाए रखना जरूरी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दिए गए बयान से कर्नाटक सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि परियोजना का उद्देश्य तमिलनाडु के हिस्से के पानी को रोकना नहीं है।
हालांकि, मेकेदातु परियोजना पर अंतिम सहमति और इसके निर्माण की राह में कई कानूनी, तकनीकी और अंतरराज्यीय मुद्दे अब भी महत्वपूर्ण रहेंगे। तमिलनाडु का विरोध पहले से जारी है और परियोजना को लेकर दोनों राज्यों के बीच मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
फिलहाल शिवकुमार के बयान से कर्नाटक का रुख स्पष्ट है कि वह मेकेदातु परियोजना को बेंगलुरु की पेयजल जरूरत से जोड़कर आगे बढ़ाना चाहता है। मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु को भरोसा दिया है कि 5 TMC फीट पानी के अलावा बाकी पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ा जाएगा और सिंचाई के लिए परियोजना के पानी का इस्तेमाल नहीं होगा। अब इस आश्वासन पर तमिलनाडु की प्रतिक्रिया और परियोजना को लेकर आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।