प्रगतिशील किसान ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने के बाद मेहनत का पाया फल
प्रगतिशील किसान
Haveri हावेरी: किसान कई तरह के फल उगाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं रत्तीहल्ली तालुक के अंगारकट्टे के युवा किसान किरण कुमार कल्लिमनी ने अपनी जमीन पर दस अलग-अलग किस्म के फल उगाकर मिसाल कायम की है।कुछ साल पहले किरण कुमार भी कई दूसरे युवाओं की तरह बेंगलुरु चले गए थे। वहां उन्होंने एक निजी कंपनी में काम किया, जहां उन्हें कई हजार रुपये वेतन मिलता था और उनका लक्ष्य शहर में अपना जीवन संवारना था।
हालांकि, तीन-चार साल पहले कोविड-19 के आने से उनकी योजना बदल गई और उन्हें बेंगलुरु छोड़ना पड़ा। अपने सफ़र के बारे में बताते हुए युवा किसान किरण कुमार कल्लिमनी ने बताया, “कोविड काल में मैंने बेंगलुरु में अपनी निजी नौकरी को अलविदा कह दिया और फलों की खेती करने लगा। मेरे पास करीब आठ एकड़ ज़मीन है, जिसमें से मैंने दो एकड़ और पांच गुंटा पर फलों के पेड़ लगा रखे हैं। बेंगलुरु छोड़ने के बाद गांव में रहने वाले मेरे भाई प्रवीण मेरी मदद के लिए आगे आए।” 2022 में किरण कुमार ने अपने बगीचे में कई तरह के फल उगाए, जिनमें 2,000 ड्रैगन फ्रूट, 150 सेब, 50 संतरे, 11 थाई व्हाइट पोमेलो, 10 चक्कोटा, 1 मियाज़ाकी आम, 10 स्टार फ्रूट और 4 बटर फ्रूट शामिल हैं। इन आठ किस्म के फलों के पेड़ों को लगाने में उन्होंने करीब 10 लाख रुपये का निवेश किया और अब उन्हें अपनी मेहनत से आमदनी होने लगी है।“मैंने एक एकड़ में 500 खूंटे, हर खूंटे में चार पौधे, यानी कुल 2,000 पौधे लगाकर ड्रैगन फ्रूट उगाए हैं। हम प्रति एकड़ सात से आठ लाख रुपये कमा रहे हैं। सभी पौधे अच्छे से बढ़ रहे हैं, लेकिन सेब के पेड़ कमजोर हैं। हम फिलहाल इस बात पर शोध कर रहे हैं कि उन्हें कैसे ठीक किया जाए। हमारी ज्यादातर आमदनी ड्रैगन फ्रूट से ही हो रही है।”