मैसूर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शनिवार को मैसूर दौरे से पहले पुलिस ने दलित संघर्ष समिति (दसाम्सा) के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। ये लोग प्रधानमंत्री के दौरे के विरोध में ‘गो बैक मोदी’ आंदोलन शुरू करने की योजना बना रहे थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मैसूर पहुंचे, जहां उन्होंने नारायण शास्त्री रोड स्थित विवेक मेमोरियल का उद्घाटन किया। उनके दौरे को देखते हुए शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। इसी दौरान विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे दसाम्सा कार्यकर्ताओं को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
मार्च निकालने की थी योजना
दसाम्सा नेताओं ने प्रधानमंत्री के दौरे के विरोध में मार्च निकालने की योजना बनाई थी। संगठन के अनुसार, यह मार्च मानसगंगोत्री स्थित क्लॉक टॉवर से शुरू होकर नारायण शास्त्री रोड पर बने विवेक मेमोरियल तक पहुंचना था।
कार्यकर्ताओं का उद्देश्य प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान अपना विरोध दर्ज कराना था। हालांकि, पुलिस ने प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही कार्रवाई करते हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
पुलिस ने क्लॉक टॉवर के पास मौजूद दसाम्सा नेताओं को हिरासत में लेकर वहां से हटा दिया।
सुरक्षा कारणों का हवाला
प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए मैसूर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। वीआईपी दौरे के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर निगरानी बढ़ाई थी।
अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए। इसी क्रम में विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे लोगों को हिरासत में लिया गया।
दसाम्सा ने जताया विरोध
दलित संघर्ष समिति के नेताओं ने प्रधानमंत्री के दौरे का विरोध करने का ऐलान किया था। संगठन का कहना था कि वे अपनी मांगों और मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना चाहते थे।
कार्यकर्ताओं ने ‘गो बैक मोदी’ अभियान के जरिए अपना विरोध दर्ज कराने की योजना बनाई थी। हालांकि, प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही पुलिस की कार्रवाई के कारण यह कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ सका।
मैसूर दौरे पर थे प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मैसूर दौरा पहले से निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा था। इस दौरान उन्होंने विवेक मेमोरियल का उद्घाटन किया।
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए शहर के प्रमुख इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किए गए थे ताकि कार्यक्रम सुचारू रूप से पूरा हो सके।
लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर उठे सवाल
दसाम्सा नेताओं की हिरासत के बाद संगठन ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है।
वहीं, पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और प्रधानमंत्री जैसे उच्च सुरक्षा वाले दौरे के दौरान किसी भी संभावित व्यवधान को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल हिरासत में लिए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं को लेकर पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं, दसाम्सा की ओर से भी आगे की रणनीति को लेकर कोई बड़ा ऐलान नहीं किया गया है।
प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन की योजना और पुलिस कार्रवाई ने एक बार फिर राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा और विरोध के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।