बेंगलुरु। कर्नाटक में बारिश की कमी और सूखे जैसे हालात के बीच राज्य सरकार ने क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश कराने की तकनीक) को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को कहा कि क्लाउड सीडिंग की प्रक्रिया में कुछ प्रगति हुई है और जैसे ही अनुकूल बादल बनने की जानकारी मिलेगी, नियुक्त संस्था संबंधित क्षेत्र में जाकर इस प्रक्रिया को शुरू करेगी।

डीके शिवकुमार ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि राज्य सरकार क्लाउड सीडिंग को लेकर पहले ही मंजूरी दे चुकी है। इसके तहत कुछ क्षेत्रों में परीक्षण भी किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि मौसम की परिस्थितियां अनुकूल होने पर ही इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्लाउड सीडिंग के तहत बादलों में विशेष प्रकार के कण छोड़े जाते हैं, जिससे बारिश की संभावना बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, यह पूरी तरह मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करता है और इसके परिणाम बादलों की स्थिति, नमी और अन्य प्राकृतिक कारकों से प्रभावित होते हैं।

राज्य में मौजूदा सूखे की स्थिति को देखते हुए सरकार इस तकनीक को एक संभावित विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। किसानों और जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों को राहत देने के उद्देश्य से इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि क्लाउड सीडिंग के लिए नियुक्त संस्था मौसम संबंधी जानकारी के आधार पर काम करेगी। जैसे ही किसी क्षेत्र में बारिश के लिए उपयुक्त बादल बनने की संभावना होगी, टीम वहां पहुंचकर प्रक्रिया को अंजाम देगी।

वहीं, सूखे के हालात को देखते हुए फसल ऋण माफी की घोषणा को लेकर पूछे गए सवाल पर डीके शिवकुमार ने विपक्षी दल भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा सत्र में सूखे की स्थिति पर चर्चा होनी थी, लेकिन विपक्ष ने चर्चा में हिस्सा लेने के बजाय सदन की कार्यवाही बाधित करने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि सरकार किसानों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। इसी उद्देश्य से विधानसभा का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है।

जानकारी के अनुसार, विधानसभा का विशेष सत्र 21 से 23 सितंबर तक आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में पश्चिमी घाट से जुड़ी कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट, राज्य में सूखे की स्थिति और पीने के पानी के संकट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।

कर्नाटक में इस समय कई इलाकों में पानी की कमी और बारिश की अनिश्चितता को लेकर चिंता बनी हुई है। खेती पर निर्भर क्षेत्रों में किसान मौसम की स्थिति को लेकर परेशान हैं। ऐसे में सरकार की ओर से जल प्रबंधन और राहत उपायों पर जोर दिया जा रहा है।

कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट भी लंबे समय से राज्य में चर्चा का विषय रही है। पश्चिमी घाट क्षेत्र के संरक्षण और विकास से जुड़े इस मुद्दे पर अलग-अलग पक्षों की अपनी राय रही है। विशेष सत्र में इस रिपोर्ट पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

राज्य सरकार का कहना है कि सूखे और जल संकट से निपटने के लिए विभिन्न स्तरों पर कदम उठाए जा रहे हैं। इसमें जल संरक्षण, वैकल्पिक उपाय और मौसम आधारित योजनाएं शामिल हैं।

क्लाउड सीडिंग को लेकर सरकार की पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब कई क्षेत्रों में बारिश की कमी से कृषि गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि क्लाउड सीडिंग कोई स्थायी समाधान नहीं है और इसका प्रभाव मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

फिलहाल कर्नाटक सरकार की नजर मौसम की स्थिति और संभावित बादलों पर है। आने वाले दिनों में क्लाउड सीडिंग के वास्तविक परिणाम और विशेष सत्र में होने वाली चर्चा के बाद राज्य की आगे की रणनीति स्पष्ट हो सकती है।

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