बेंगलुरु। कर्नाटक के चामराजनगर जिले के हनूर जंगल में हुई गोलीबारी की घटना को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने सोमवार को मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार घटना में मारे गए लोगों की मौत से जुड़े तथ्यों को सामने आने से रोकने और मामले की सच्चाई दबाने की कोशिश कर रही है।

बीजेपी की ओर से एंथनी स्वामी, जॉनरोज पीटर और सेबेस्टियन डेविड कुमार की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सार्वजनिक की गई है। अधिकारियों की गोलीबारी में इन तीनों की मौत हुई थी। वहीं, सरकार और अधिकारियों की ओर से अब तक यह कहा गया है कि गोलीबारी आत्मरक्षा में की गई थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बढ़ा विवाद

मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य मैसूर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को बताया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीनों लोगों को गोलियां बहुत करीब से चलाई गई थीं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद बीजेपी ने सरकारी दावे पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि यदि गोलीबारी आत्मरक्षा में की गई थी तो इस बात की स्वतंत्र जांच जरूरी है कि तीनों लोगों को किस परिस्थिति में गोली लगी और अधिकारियों ने किस स्थिति में फायरिंग की।

विजयेंद्र ने इसी आधार पर मामले की जांच राज्य पुलिस के बजाय केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की है।

बीजेपी अध्यक्ष ने सरकार पर लगाए आरोप

बीवाई विजयेंद्र ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि घटना से जुड़े तथ्यों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि तीन लोगों की मौत हुई है और ऐसे मामले में जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।

बीजेपी नेता ने सवाल उठाया कि जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नजदीक से गोली चलने की बात सामने आ रही है तो घटना की परिस्थितियों की विस्तृत जांच क्यों नहीं कराई जा रही है। उनका कहना है कि मृतकों के परिवारों और आम लोगों को घटना की वास्तविक स्थिति जानने का अधिकार है।

बीजेपी ने मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच हो और गोलीबारी के दौरान मौजूद अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।

सरकार का दावा-आत्मरक्षा में चली गोलियां

दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि अधिकारियों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी। यानी अधिकारियों के मुताबिक, परिस्थितियां ऐसी थीं कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए फायरिंग करनी पड़ी।

सरकारी दावे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के बीच अंतर को लेकर अब विवाद बढ़ रहा है। बीजेपी इसी विरोधाभास को जांच का आधार बना रही है।

मामले में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि गोलीबारी से पहले क्या घटनाक्रम हुआ था, अधिकारियों को किस तरह का खतरा महसूस हुआ और फायरिंग की आवश्यकता किन परिस्थितियों में पड़ी। इसके अलावा यह भी जांच का विषय होगा कि गोली चलाने के दौरान निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं।

तीन लोगों की मौत ने उठाए सवाल

हनूर जंगल की घटना में एंथनी स्वामी, जॉनरोज पीटर और सेबेस्टियन डेविड कुमार की मौत हुई। अधिकारियों की गोलीबारी में तीनों के मारे जाने के बाद से ही घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली बहुत करीब से चलाए जाने की बात सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। बीजेपी का कहना है कि इस तथ्य की निष्पक्ष जांच जरूरी है, जबकि सरकार का रुख आत्मरक्षा में कार्रवाई किए जाने का है।

ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट जांच के लिए महत्वपूर्ण चिकित्सकीय साक्ष्य होती है। हालांकि, केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पूरी घटना का निष्कर्ष निकालना संभव नहीं होता। गोलीबारी की परिस्थितियों, घटनास्थल के साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अधिकारियों के रिकॉर्ड सहित अन्य पहलुओं की जांच भी जरूरी होती है।

CBI जांच की मांग क्यों?

बीजेपी का तर्क है कि चूंकि मामले में सरकारी अधिकारियों की कार्रवाई और तीन लोगों की मौत शामिल है, इसलिए जांच ऐसी एजेंसी से होनी चाहिए जिस पर किसी तरह का राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव न हो। इसी वजह से पार्टी ने CBI जांच की मांग उठाई है।

विजयेंद्र का आरोप है कि राज्य सरकार की जांच से पूरी सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसी से जांच होने पर घटना से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल की जा सकती है।

हालांकि, CBI जांच शुरू होने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। फिलहाल बीजेपी की मांग राजनीतिक रूप से इस मामले को और अधिक चर्चा में ले आई है।

विपक्ष को मिला सरकार पर हमला करने का मुद्दा

हनूर जंगल की घटना ने कर्नाटक की राजनीति में विपक्ष को सरकार पर हमला करने का नया मुद्दा दे दिया है। बीजेपी लगातार कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार को घेरती रही है। अब तीन लोगों की मौत और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पार्टी ने सरकार से जवाब मांगा है।

बीजेपी का कहना है कि मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए और मृतकों के परिवारों को पूरी जानकारी मिलनी चाहिए। पार्टी ने यह भी संकेत दिया है कि यदि सरकार CBI जांच की मांग स्वीकार नहीं करती है तो वह इस मुद्दे को आगे भी राजनीतिक और सार्वजनिक मंचों पर उठाएगी।

जांच के नतीजों पर टिकी नजर

फिलहाल इस मामले में सबसे अहम सवाल गोलीबारी की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर है। सरकार इसे आत्मरक्षा की कार्रवाई बता रही है, जबकि बीजेपी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर इस दावे पर सवाल उठा रही है।

मैसूर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग की रिपोर्ट में करीब से गोली चलने की बात सामने आने के बाद मामले की स्वतंत्र जांच की मांग और मजबूत हुई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या घटना की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाती है।

हनूर जंगल गोलीकांड में तीन लोगों की मौत के बाद उठे सवाल केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं हैं। घटना में अधिकारियों की कार्रवाई, आत्मरक्षा के दावे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के बीच संबंध की निष्पक्ष जांच जरूरी होगी। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और सरकार के फैसले से यह स्पष्ट हो सकता है कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।

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