बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में खाली प्लॉटों पर कचरा और निर्माण मलबा डाले जाने की समस्या को लेकर शहरी विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौडा ने नाराजगी जताई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे सभी खाली प्लॉटों की पहचान की जाए, जहां लगातार कचरा फेंका जा रहा है, और संबंधित मालिकों को नोटिस जारी कर सफाई सुनिश्चित कराई जाए।

मंत्री ने सोमवार को एक वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता करते हुए शहर के विभिन्न नगर निकाय क्षेत्रों में चल रहे ‘वेस्ट-फ्री कैंपेन’ की समीक्षा की। बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि खाली प्लॉटों की सफाई के लिए तय समय-सीमा के बावजूद केवल करीब 20 प्रतिशत मालिकों ने ही नियमों का पालन किया है। इस स्थिति पर मंत्री ने असंतोष जताते हुए अधिकारियों से अभियान को और प्रभावी बनाने को कहा।

22 अगस्त तक दी गई थी समय-सीमा

‘वेस्ट-फ्री कैंपेन’ के तहत खाली प्लॉटों के मालिकों को अपने परिसर में जमा कचरा और निर्माण मलबा हटाने के लिए 22 अगस्त तक का समय दिया गया था। अभियान का उद्देश्य शहर में खाली पड़ी जमीनों को कचरा फेंकने की जगह बनने से रोकना और सार्वजनिक स्वच्छता में सुधार करना है।

हालांकि, अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में 15 अगस्त की निर्धारित समय-सीमा तक केवल लगभग 20 प्रतिशत प्लॉट मालिकों ने सफाई का काम शुरू किया था। इससे स्पष्ट हुआ कि बड़ी संख्या में मालिकों ने प्रशासन के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केवल नोटिस जारी करने तक कार्रवाई सीमित न रखी जाए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित प्लॉट वास्तव में साफ हों।

मालिकों की जिम्मेदारी तय करने पर जोर

कृष्णा बायरे गौडा ने कहा कि खाली प्लॉटों के मालिकों की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। यदि किसी प्लॉट में कचरा जमा है या वहां निर्माण मलबा फेंका जा रहा है, तो स्थानीय निकायों को संबंधित मालिक को नोटिस जारी करना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नगर निकायों को ऐसे सभी खाली प्लॉटों की पहचान करनी चाहिए जहां कचरा फेंका जा रहा है। इसके बाद मालिकों को सफाई के लिए निर्देश दिए जाएं और अनुपालन की निगरानी की जाए।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि खाली जमीन का मालिक होना केवल संपत्ति पर अधिकार रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि परिसर की साफ-सफाई बनाए रखना भी मालिक की जिम्मेदारी है।

सफाई नहीं हुई तो BBMP खुद करेगा कार्रवाई

बैठक में मंत्री ने नगर निकाय अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगर नोटिस देने के बावजूद मालिक सफाई नहीं करते हैं तो प्रशासन को खुद सफाई का काम शुरू करना चाहिए। यानी कार्रवाई के लिए मालिकों की ओर से और इंतजार नहीं किया जाना चाहिए।

इसका उद्देश्य ऐसे प्लॉटों को कचरा जमा करने की जगह बनने से रोकना है। शहर के कई हिस्सों में खाली प्लॉटों का इस्तेमाल घरेलू कचरे, निर्माण सामग्री और मलबा फेंकने के लिए किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

ऐसी जगहों पर कचरा जमा होने से बदबू, मच्छर और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। साथ ही यह आसपास के इलाकों की स्वच्छता और पर्यावरण को भी प्रभावित करता है।

सफाई का खर्च संपत्ति कर से वसूला जाए

मंत्री ने यह सुझाव भी दिया कि जिन मामलों में नगर निकाय को खुद खाली प्लॉट की सफाई करनी पड़े, वहां सफाई पर होने वाला खर्च संबंधित संपत्ति मालिक से बाद में वसूला जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए संपत्ति कर व्यवस्था का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया।

इस व्यवस्था का उद्देश्य मालिकों को अपनी संपत्ति की सफाई के प्रति जिम्मेदार बनाना है। यदि नगर निकाय द्वारा सफाई कराए जाने पर उसका खर्च भी मालिक से वसूल किया जाता है तो इससे नियमों के पालन को प्रोत्साहन मिल सकता है।

मंत्री के मुताबिक, सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल निजी संपत्तियों की सफाई के लिए लगातार नहीं किया जा सकता। यदि मालिक अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाता है और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ता है, तो खर्च की वसूली की व्यवस्था होनी चाहिए।

कचरा प्रबंधन पर बढ़ रहा दबाव

बेंगलुरु तेजी से बढ़ता हुआ महानगर है और शहर में कचरा प्रबंधन लंबे समय से प्रमुख शहरी चुनौतियों में शामिल रहा है। बड़ी आबादी और लगातार बढ़ते निर्माण कार्यों के कारण घरेलू कचरे के साथ निर्माण एवं विध्वंस मलबे की मात्रा भी बढ़ती है।

खाली प्लॉट अक्सर ऐसे कचरे के लिए आसान जगह बन जाते हैं। एक बार किसी प्लॉट में कचरा जमा होना शुरू होने के बाद आसपास के लोग भी वहां कचरा डालने लगते हैं। इससे समस्या तेजी से बढ़ती है।

इसी कारण प्रशासन का जोर ऐसे स्थानों की जल्द पहचान करने और नियमित निगरानी पर है।

स्थानीय निकायों को जिम्मेदारी

वर्चुअल बैठक में मंत्री ने शहर के सभी म्युनिसिपल क्षेत्रों में स्थानीय निकायों की भूमिका पर भी जोर दिया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में खाली प्लॉटों की सूची तैयार करें और जहां कचरा डाला जा रहा है, वहां तत्काल कार्रवाई करें।

नोटिस जारी करने के बाद यह भी जांचने को कहा गया है कि मालिक ने सफाई कराई या नहीं। केवल कागजी कार्रवाई के बजाय जमीन पर सफाई सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी गई है।

अभियान की सफलता के लिए निगरानी जरूरी

खाली प्लॉटों की सफाई का अभियान तभी सफल हो सकता है जब सफाई के बाद भी वहां दोबारा कचरा न जमा होने दिया जाए। इसके लिए नियमित निरीक्षण और निगरानी की जरूरत होगी। स्थानीय निकायों को ऐसे स्थानों की पहचान के साथ-साथ कचरा फेंकने वालों पर भी कार्रवाई करनी होगी।

मंत्री की बैठक में सामने आया कि तय समय-सीमा के बावजूद बड़ी संख्या में प्लॉट मालिकों ने सफाई नहीं कराई है। ऐसे में अब नगर निकायों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

कुल मिलाकर, बेंगलुरु में खाली प्लॉटों को कचरा मुक्त बनाने के अभियान के तहत प्रशासन अब केवल नोटिस जारी करने के बजाय प्रत्यक्ष कार्रवाई की तैयारी में है। 20 प्रतिशत मालिकों के ही नियमों का पालन करने पर मंत्री की नाराजगी के बाद अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे बाकी प्लॉटों की पहचान कर सफाई सुनिश्चित करें। यदि मालिक खुद सफाई नहीं कराते हैं तो नगर निकाय सफाई कराएंगे और उसका खर्च संपत्ति कर के जरिए संबंधित मालिक से वसूलने की व्यवस्था पर काम किया जाएगा। इससे शहर में खाली प्लॉटों के इस्तेमाल और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नियमों के पालन को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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