Mandya : 200 एकड़ सरकारी जमीन घोटाला उजागर, फर्जी दस्तावेजों से कब्जा, 9 गिरफ्तार

Update: 2026-07-04 10:03 GMT

Karnataka कर्नाटक: मांड्या जिले के श्रीरंगपटना तालुक स्थित महादेवपुरा गांव में एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है, जिसमें सर्वे नंबर 411 की लगभग 200 एकड़ सरकारी जमीन को फर्जी दस्तावेज तैयार कर अवैध रूप से हड़पने का मामला उजागर हुआ है। इस मामले ने राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है।

पुलिस के अनुसार, इस घोटाले में शामिल आरोपियों ने सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों को बदल दिया और गैरकानूनी तरीके से रिकॉर्ड तैयार किए। इस मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तालुक के असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ लैंड रिकॉर्ड्स (ADLR) मोहम्मद हुसैन अभी फरार बताए जा रहे हैं।

जांच में सामने आया है कि एक निजी व्यक्ति नितिन प्रेमानंद ने खुद को सरकारी कर्मचारी बताकर विभागीय सिस्टम में घुसपैठ की और सरकारी सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उसने विभाग का यूजर आईडी और पासवर्ड हासिल कर लिया और उन प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जो केवल अधिकृत सरकारी कर्मचारी ही कर सकते थे।

इस दौरान राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किए गए, भूमि से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर हुआ और गैरकानूनी तरीके से RTC (Record of Rights, Tenancy and Crops) और अन्य खरीद से संबंधित आदेश तैयार किए गए। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था।

सूत्रों के मुताबिक, इस घोटाले में कई स्तरों पर भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि तहसीलदार कार्यालय, ADLR कार्यालय और PDO कार्यालय के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है।

पुलिस का कहना है कि मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जीवाड़े में किन-किन लोगों की संलिप्तता है। साथ ही फरार ADLR मोहम्मद हुसैन की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह घोटाला केवल दस्तावेजी हेरफेर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संगठित तरीके से सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने की साजिश शामिल है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इस जमीन का उपयोग आगे किस उद्देश्य से किया जाना था।

घटना के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित रिकॉर्ड को सील कर दिया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही राजस्व विभाग की डिजिटल सुरक्षा प्रणाली की भी समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

स्थानीय लोगों ने इस मामले पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि सरकारी जमीन पर इस तरह का कब्जा गंभीर अपराध है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

कुल मिलाकर, मांड्या का यह जमीन घोटाला सरकारी तंत्र में डिजिटल सिस्टम के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है, जिसमें कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

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