बेंगलुरु: कर्नाटक में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगा फहराने की जिम्मेदारी को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मंत्री बी. जेड. जमीर अहमद खान का स्वतंत्रता दिवस पर झंडारोहण की जिम्मेदारी से छूट मांगना राष्ट्रीय सम्मान और संवैधानिक भावना के खिलाफ है।

आर. अशोक ने कहा कि कांग्रेस सरकार का यह कदम देश और मातृभूमि के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाता है। उन्होंने दावा किया कि मंत्री जमीर अहमद खान ने मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार को आधिकारिक पत्र लिखकर विजयनगर जिले में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान तिरंगा फहराने की जिम्मेदारी से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया है।

विपक्ष के नेता के मुताबिक, मंत्री ने अपने अनुरोध के पीछे व्यस्त राजनीतिक कार्यक्रमों का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि जमीर अहमद खान ने बताया है कि उन्हें स्थानीय निकाय चुनावों, आगामी विधानसभा उपचुनावों और पार्टी की आंतरिक राजनीतिक गतिविधियों पर ध्यान देना है, जिसके कारण वह स्वतंत्रता दिवस समारोह की जिम्मेदारी नहीं निभा पाएंगे।

आर. अशोक ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराना किसी भी मंत्री के लिए केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक है।

उन्होंने सवाल उठाया कि कोई भी मंत्री स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने जैसे पवित्र दायित्व से ज्यादा महत्व राजनीतिक गतिविधियों को कैसे दे सकता है। अशोक ने कहा कि राष्ट्रीय पर्वों से जुड़े कार्यक्रमों को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।

बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि मंत्री का यह कदम संविधान और देश की भावनाओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस करोड़ों भारतीयों के लिए गर्व और बलिदान की यादों से जुड़ा दिन है। ऐसे अवसर पर जिम्मेदारी से पीछे हटना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि मंत्री पद केवल सत्ता का हिस्सा नहीं बल्कि जनता और देश के प्रति जवाबदेही भी है। उन्होंने कांग्रेस सरकार से इस मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।

मंत्री बी. जेड. जमीर अहमद खान की ओर से इस मामले पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, उनके अनुरोध का कारण प्रशासनिक और राजनीतिक व्यस्तताओं को बताया गया है।

कर्नाटक में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान मंत्रियों को अलग-अलग जिलों में ध्वजारोहण की जिम्मेदारी दी जाती है। यह व्यवस्था राज्य सरकार की ओर से की जाती है ताकि सभी जिलों में आधिकारिक स्तर पर समारोह आयोजित हो सके।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रीय प्रतीकों और स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसरों से जुड़े मुद्दे अक्सर राजनीतिक बहस का कारण बनते हैं। विपक्ष ऐसे मामलों में सरकार पर सवाल उठाता है, जबकि सरकार अपने फैसलों को प्रशासनिक जरूरतों से जोड़कर देखती है।

इस मामले में बीजेपी ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान हर जनप्रतिनिधि की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

वहीं, कांग्रेस के लिए यह स्थिति असहज करने वाली हो सकती है क्योंकि मामला सीधे स्वतंत्रता दिवस समारोह और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा हुआ है। सरकार को अब यह स्पष्ट करना होगा कि मंत्री के अनुरोध पर क्या फैसला लिया जाएगा।

अगर मंत्री को जिम्मेदारी से छूट दी जाती है तो सरकार को इसके पीछे के कारणों को सार्वजनिक करना पड़ सकता है। वहीं, यदि जिम्मेदारी बरकरार रखी जाती है तो मंत्री को निर्धारित कार्यक्रम में शामिल होना होगा।

फिलहाल कर्नाटक में यह मामला राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया है। बीजेपी इसे राष्ट्र सम्मान से जोड़कर कांग्रेस पर हमला कर रही है, जबकि सरकार के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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