नाबालिग छात्रा से यौन उत्पीड़न के मामले में शिक्षक को 25 साल की जेल 1 लाख जुर्माना
कलबुर्गी: कर्नाटक के कलबुर्गी की एक विशेष POCSO अदालत ने नाबालिग छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में एक निजी स्कूल के शिक्षक को दोषी ठहराते हुए 25 साल की जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
इस मामले की जानकारी विशेष सरकारी वकील शांतवीर तुप्पद ने गुरुवार को एक बयान जारी कर दी। उन्होंने बताया कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी शिक्षक को दोषी माना और उसके खिलाफ सख्त सजा सुनाई।
आरोपी शिक्षक की पहचान हाजीमलंग लॉ के रूप में हुई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी निजी स्कूल में शिक्षक था और नियमित कक्षाएं समाप्त होने के बाद भी कुछ छात्रों को ट्यूशन पढ़ाता था। आरोप है कि इसी दौरान वह कुछ छात्र-छात्राओं को रात में स्कूल परिसर में रोक लेता था।
मामले के अनुसार, मई 2024 में आरोपी ने पीड़ित नाबालिग छात्रा को स्कूल की इमारत में स्थित एक कमरे में बुलाया। आरोप है कि वहां उसने छात्रा का कई बार यौन शोषण किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी ने छात्रा को धमकी भी दी थी कि अगर उसने घटना के बारे में किसी को बताया तो वह उसे परीक्षा में पास नहीं होने देगा।
पीड़िता ने आरोपी की धमकी के बावजूद घटना की जानकारी दी, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य संबंधित साक्ष्यों को जुटाया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया।
POCSO यानी यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम के तहत नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों को गंभीर अपराध माना जाता है। इस कानून का उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण और अपराधों से सुरक्षा प्रदान करना है। कानून में ऐसे मामलों में कठोर सजा का प्रावधान किया गया है।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी शिक्षक ने अपने पद और भरोसे का गलत इस्तेमाल किया। शिक्षक और छात्र के बीच विश्वास का रिश्ता होता है, ऐसे में इस तरह का अपराध और भी गंभीर हो जाता है।
विशेष सरकारी वकील ने अदालत के सामने आरोपी के खिलाफ उपलब्ध सबूत पेश किए। सुनवाई के दौरान पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना गया। अदालत ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया।
अदालत ने अपने फैसले में आरोपी को 25 साल की कारावास की सजा सुनाई और 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। यह फैसला बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर न्याय व्यवस्था की सख्ती को दर्शाता है।
मामले के सामने आने के बाद शिक्षा संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था और शिकायत तंत्र होना जरूरी है।
अधिकारियों का कहना है कि शिक्षकों और संस्थानों की जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करें। किसी भी तरह के शोषण या अपराध की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस मामले में अदालत का फैसला पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, POCSO मामलों में अदालतें अब पीड़ितों की सुरक्षा और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए फैसले दे रही हैं।
फिलहाल आरोपी शिक्षक को अदालत के आदेश के अनुसार सजा भुगतनी होगी। इस मामले ने एक बार फिर बच्चों के खिलाफ अपराधों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत को सामने रखा है।