बेंगलुरु। घरेलू कामगार के साथ दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व जनता दल (सेक्युलर) सांसद प्रज्वल रेवन्ना को कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से मोबाइल फोन उपलब्ध कराने के मामले में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान बनासवाड़ी निवासी नवीन के रूप में हुई है। प्रज्वल रेवन्ना वर्तमान में बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा केंद्रीय जेल में बंद हैं।

पुलिस के अनुसार, नवीन पर आरोप है कि उसने जेल में बंद प्रज्वल रेवन्ना तक गैर-कानूनी तरीके से मोबाइल फोन पहुंचाने में भूमिका निभाई। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने नवीन को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में जेल के भीतर मोबाइल फोन पहुंचने और इसके लिए कथित तौर पर हुए वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, नवीन पहले भी एक आपराधिक मामले में जेल जा चुका है। जेल में रहने के दौरान या उसके बाद उसके कुछ लोगों से संपर्क बने होने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, नवीन प्रताप राय नाम के व्यक्ति को जानता था। जेल से बाहर आने के बाद नवीन ने कथित तौर पर प्रताप राय के जरिए प्रज्वल रेवन्ना तक मोबाइल फोन पहुंचाने की व्यवस्था की।

पुलिस का दावा है कि मोबाइल फोन उपलब्ध कराने की इस प्रक्रिया में नवीन और प्रताप राय के बीच बड़े पैमाने पर पैसों का लेन-देन हुआ था। जांच एजेंसियां अब इस कथित वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटा रही हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि रकम किस माध्यम से दी गई तथा इस पूरी व्यवस्था में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

जेल के अंदर कैदियों के पास अनधिकृत मोबाइल फोन पहुंचना सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर मामला माना जाता है। मोबाइल फोन के जरिए जेल में बंद व्यक्ति बाहरी लोगों से संपर्क कर सकता है। ऐसे में किसी हाई-प्रोफाइल कैदी तक इस तरह की सुविधा पहुंचने के आरोप ने जेल सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर मोबाइल फोन जेल के अंदर किस तरीके से पहुंचाया गया। इसके लिए जेल परिसर में तैनात कर्मचारियों, बाहरी संपर्कों और मोबाइल फोन की आवाजाही से जुड़े संभावित रास्तों की भी जांच की जा सकती है। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल कब और किन लोगों से संपर्क करने के लिए किया गया।

मामले में कथित पैसों के लेन-देन को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, नवीन और प्रताप राय के बीच इस काम के लिए बड़ी रकम का लेन-देन हुआ था। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि रकम किसने दी और किसके निर्देश पर मोबाइल फोन जेल तक पहुंचाया गया।

प्रज्वल रेवन्ना पहले से ही गंभीर आपराधिक मामले में सजा काट रहे हैं। घरेलू कामगार के साथ दुष्कर्म के मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इसके बाद वे परप्पना अग्रहारा जेल में बंद हैं। ऐसे में जेल के भीतर कथित तौर पर मोबाइल फोन उपलब्ध कराए जाने की घटना ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

पुलिस जांच में नवीन की भूमिका सामने आने के बाद उसकी गिरफ्तारी की गई है। अधिकारियों द्वारा अब उसके संपर्कों और पिछले आपराधिक रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि क्या उसने इससे पहले भी किसी कैदी तक प्रतिबंधित सामान या मोबाइल फोन पहुंचाने में मदद की थी।

जांच में प्रताप राय की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस के मुताबिक, नवीन और प्रताप राय एक-दूसरे को जानते थे और नवीन के जेल से बाहर आने के बाद दोनों के बीच संपर्क बना रहा। आरोप है कि इसी संपर्क का इस्तेमाल प्रज्वल रेवन्ना तक मोबाइल फोन पहुंचाने के लिए किया गया। कथित वित्तीय लेन-देन की जांच से इस पूरी व्यवस्था के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। मोबाइल फोन कहां से खरीदा गया, उसे किसने उपलब्ध कराया, जेल तक पहुंचाने में किन लोगों ने मदद की और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया—इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

इस घटना ने जेलों में मोबाइल फोन की अवैध पहुंच रोकने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। खास तौर पर ऐसे कैदी, जो गंभीर अपराधों में सजा काट रहे हैं, उनके बाहरी संपर्कों की निगरानी को लेकर जेल प्रशासन के सामने अतिरिक्त चुनौती रहती है।

फिलहाल नवीन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। कथित पैसों के लेन-देन और मोबाइल फोन की आपूर्ति से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल थे और जेल के भीतर मोबाइल फोन पहुंचाने की व्यवस्था किस स्तर तक फैली हुई थी।

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