
बेंगलुरु। कर्नाटक की पराप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में मोबाइल फोन मिलने के मामले में कार्रवाई लगातार जारी है। जेल परिसर में मोबाइल फोन बरामद होने के बाद अब दो और जेल अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबित किए गए अधिकारियों में वह जेलर और वार्डर भी शामिल हैं, जिनकी जिम्मेदारी उस सेल की निगरानी से जुड़ी थी जहां पूर्व जेडीएस सांसद प्रज्वल रेवन्ना को रखा गया था।
जेल अधिकारियों के अनुसार, निलंबित किए गए कर्मचारियों की पहचान जेलर रमेश धर्मात्ती और वार्डर महेश सज्जन के रूप में हुई है। जेल महानिदेशक (DG Prisons) आलोक कुमार ने बताया कि दोनों अधिकारियों को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया है। मामले की जांच पूरी होने तक दोनों अधिकारी निलंबित रहेंगे।
DG Prisons आलोक कुमार ने कहा कि जेल में मोबाइल फोन जैसी प्रतिबंधित वस्तु का मिलना गंभीर मामला है। जेल प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी जाए और किसी भी कैदी तक प्रतिबंधित सामग्री न पहुंच सके। इसी को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
जानकारी के अनुसार, पराप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में मोबाइल फोन मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे थे। जेल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मोबाइल फोन जेल के अंदर कैसे पहुंचा और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या किसी कर्मचारी की लापरवाही या मिलीभगत के कारण जेल के अंदर मोबाइल पहुंचा। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पराप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल कर्नाटक की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण जेलों में से एक है। यहां कई हाई-प्रोफाइल कैदी बंद रह चुके हैं। ऐसे में जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरतता है।
मोबाइल फोन मिलने का मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि जेल के जिस हिस्से से संबंधित जांच चल रही है, वहां पूर्व जेडीएस सांसद प्रज्वल रेवन्ना को भी रखा गया था। हालांकि, अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि बरामद मोबाइल फोन का संबंध किसी विशेष कैदी से है या नहीं।
पुलिस और जेल प्रशासन अब मोबाइल फोन के इस्तेमाल, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल जानकारी की जांच कर रहा है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फोन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया था और इससे कौन-कौन लोग जुड़े थे।
जेलों में मोबाइल फोन और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती रही है। कई बार कैदियों तक मोबाइल फोन पहुंचने के मामले सामने आते रहे हैं, जिसके बाद जेल प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के कदम उठाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जेलों में सुरक्षा केवल कर्मचारियों की निगरानी तक सीमित नहीं होती, बल्कि नियमित जांच, तकनीकी निगरानी और सख्त प्रवेश व्यवस्था भी जरूरी होती है।
कर्नाटक जेल विभाग ने इस मामले के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जेल परिसर में नियमित जांच अभियान चलाया जाए और प्रतिबंधित वस्तुओं की रोकथाम के लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जाए।
इससे पहले भी पराप्पना अग्रहारा जेल से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें सुरक्षा और कैदियों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल उठे हैं। इस बार मोबाइल फोन मिलने के बाद प्रशासन ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कर सख्त संदेश देने की कोशिश की है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। जेल विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मोबाइल फोन जेल के अंदर कैसे पहुंचा और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
निलंबित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी की जा सकती है। अगर जांच में गंभीर लापरवाही या किसी तरह की मिलीभगत सामने आती है तो आगे और कार्रवाई की संभावना है।





