बेंगलुरु। कर्नाटक हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के यशवंतपुर एपीएमसी (APMC) मार्केट दौरे की सराहना की है। मंगलवार को मुख्यमंत्री द्वारा बाजार का निरीक्षण कर मजदूरों और व्यापारियों की समस्याएं सुनने के कदम को कोर्ट ने बुधवार को सराहनीय बताया।

मजदूरों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति वी. श्रीशानंद की अध्यक्षता वाली एकल पीठ ने मुख्यमंत्री के दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग इसे केवल दिखावा बता सकते हैं, लेकिन वास्तव में यह एक सराहनीय पहल है।

कोर्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री का एपीएमसी मार्केट जाना और वहां काम करने वाले लोगों की समस्याएं सुनना महत्वपूर्ण कदम है। अदालत ने कहा कि ऐसे दौरे जमीनी स्तर की वास्तविक समस्याओं को समझने में मदद करते हैं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मुख्यमंत्री के दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि शिवकुमार ने बाजार में पहुंचकर प्याज, लहसुन और अदरक की गुणवत्ता और कीमतों की जानकारी ली। उन्होंने व्यापारियों और वहां काम करने वाली महिलाओं के साथ बैठकर उनकी परेशानियां सुनीं।

न्यायालय ने कहा कि मुख्यमंत्री का मजदूरों और छोटे व्यापारियों के साथ संवाद करना एक सकारात्मक पहल है। कोर्ट ने इसे मानवीय दृष्टिकोण वाला कदम बताते हुए कहा कि इससे जमीनी स्तर के लोगों की समस्याओं को समझने में मदद मिलती है।

हालांकि, इसी दौरान हाई कोर्ट ने एपीएमसी व्यवस्था और मजदूरों की स्थिति को लेकर चिंता भी जताई। अदालत ने कहा कि वर्तमान समय में कई जगहों पर एपीएमसी की दुकानों की स्थिति बदल गई है और कई दुकानें वास्तविक व्यापारियों के बजाय अन्य लोगों के नियंत्रण में किराए पर चल रही हैं।

बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि शहरों में एपीएमसी व्यवस्था लगभग कमजोर हो चुकी है। अदालत ने कहा कि बाजार व्यवस्था को मजबूत करने और छोटे व्यापारियों तथा मजदूरों के हितों की रक्षा करने की जरूरत है।

मजदूरों के अधिकारों पर जोर देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि श्रमिकों को पूंजीपतियों के दबाव से बचाया जाना चाहिए। मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए कानूनों को सख्ती से लागू करना जरूरी है।

कोर्ट ने न्यूनतम मजदूरी के मुद्दे पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि हर मजदूर को कम से कम तय न्यूनतम मजदूरी मिलनी चाहिए और इसे लागू करने में किसी तरह की तकनीकी परेशानी नहीं होनी चाहिए।

न्यायालय ने कहा कि कानून का सम्मान करने वालों की सुरक्षा भी कानून ही करता है। मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए बने नियमों का पालन सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मजदूरों की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि श्रमिक वर्ग समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनकी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार को यशवंतपुर एपीएमसी मार्केट का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद मजदूरों, व्यापारियों और अन्य लोगों से बातचीत की थी। उन्होंने बाजार की स्थिति, कीमतों और काम करने वालों की परेशानियों को समझने का प्रयास किया।

मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा हुई। जहां कुछ लोगों ने इसे जनसंपर्क अभियान बताया, वहीं हाई कोर्ट ने इसे जमीनी समस्याओं को समझने वाला सकारात्मक कदम बताया।

एपीएमसी बाजार कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री के लिए महत्वपूर्ण केंद्र माने जाते हैं। यहां किसान, व्यापारी, मजदूर और छोटे कारोबारी बड़ी संख्या में जुड़े होते हैं। ऐसे में बाजार की व्यवस्था और वहां काम करने वालों की सुविधाएं महत्वपूर्ण विषय हैं।

हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब मजदूरों के अधिकार, न्यूनतम मजदूरी और एपीएमसी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि श्रमिकों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

फिलहाल मुख्यमंत्री के दौरे और हाई कोर्ट की टिप्पणी ने कर्नाटक में मजदूरों और एपीएमसी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को फिर से सामने ला दिया है। आने वाले समय में सरकार और संबंधित विभागों की ओर से इस दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

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