कल्याण कर्नाटक में कुपोषण की चुनौती, रायचूर में आधे से ज्यादा बच्चे कम वजन के
रायचूर। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS 2023-24) के आंकड़ों ने कर्नाटक के कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में बच्चों के पोषण स्तर को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, रायचूर जिले में पांच साल से कम उम्र के करीब आधे बच्चे कम वजन की समस्या से जूझ रहे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, रायचूर जिले में आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 2,38,903 बच्चों में से 49.5 प्रतिशत बच्चे कम वजन वाले पाए गए हैं। यह आंकड़ा राज्य के औसत 27.8 प्रतिशत से काफी अधिक है।
रायचूर में कुपोषण की स्थिति गंभीर
NFHS 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार, रायचूर जिले में बच्चों के कुपोषण की स्थिति कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
पांच साल से कम उम्र के बच्चों में कम वजन की समस्या बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर डाल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती उम्र में पर्याप्त पोषण नहीं मिलने से बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता और सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
रिपोर्ट में रायचूर को कुपोषित बच्चों की संख्या के मामले में राज्य के प्रमुख प्रभावित जिलों में शामिल बताया गया है।
राज्य औसत से काफी ज्यादा आंकड़ा
कर्नाटक में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में कम वजन की राज्य औसत दर 27.8 प्रतिशत बताई गई है। इसके मुकाबले रायचूर का आंकड़ा 49.5 प्रतिशत है।
यह अंतर क्षेत्रीय असमानताओं को भी दिखाता है। कल्याण कर्नाटक क्षेत्र लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करता रहा है।
आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका अहम
बच्चों के पोषण सुधार में आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों को पोषण आहार, स्वास्थ्य जांच और शुरुआती शिक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
रायचूर में बड़ी संख्या में बच्चे आंगनवाड़ी व्यवस्था से जुड़े हैं। ऐसे में पोषण स्तर सुधारने के लिए इन केंद्रों की प्रभावी भूमिका जरूरी मानी जा रही है।
कल्याण कर्नाटक उत्सव के बीच सामने आए आंकड़े
भारतीय संघ में विलय के 79 साल पूरे होने के मौके पर गुरुवार को कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के सात जिलों में ‘कल्याण’ उत्सव मनाया गया।
इस अवसर पर क्षेत्र के विकास, इतिहास और उपलब्धियों पर चर्चा की गई। इसी दौरान सामने आए स्वास्थ्य और पोषण संबंधी आंकड़ों ने क्षेत्र की सामाजिक चुनौतियों की ओर भी ध्यान खींचा।
क्षेत्रीय विकास के साथ स्वास्थ्य पर जोर
कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में विकास से जुड़े कई मुद्दों पर लंबे समय से चर्चा होती रही है। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं प्रमुख हैं।
कुपोषण के आंकड़े सामने आने के बाद बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों ने पोषण सुधार पर दिया जोर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुपोषण केवल भोजन की कमी से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि इसका संबंध स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता, आर्थिक स्थिति और जागरूकता से भी होता है।
बच्चों में पोषण सुधार के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, मातृ स्वास्थ्य और जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करना जरूरी माना जाता है।
सरकारी योजनाओं की प्रभावी निगरानी जरूरी
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से बच्चों और महिलाओं के पोषण सुधार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें आंगनवाड़ी सेवाएं और पोषण से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और उनकी नियमित निगरानी करने से ही बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
आगे की चुनौती
रायचूर समेत कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के जिलों में कुपोषण की समस्या को कम करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
NFHS के आंकड़ों ने क्षेत्र में बच्चों के स्वास्थ्य की स्थिति पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित किया है। अब जरूरत है कि पोषण योजनाओं को और प्रभावी बनाया जाए, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य स्तर में सुधार लाया जा सके।