कलबुर्गी। कर्नाटक के कलबुर्गी में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की मूर्ति लगाने को लेकर विवाद सामने आया है। कल्याण कर्नाटक उत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के शहर में मौजूद रहने के बीच समर्थकों ने रातों-रात हाई कोर्ट सर्कल के पास सिद्धारमैया की 9 फीट ऊंची मूर्ति स्थापित कर दी। हालांकि, यह मूर्ति बिना किसी आधिकारिक अनुमति के लगाई गई थी, जिसके बाद कलबुर्गी नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए इसे हटा दिया।

मामले की जानकारी मिलते ही नगर निगम के अधिकारी सक्रिय हुए और पुलिस बल की मौजूदगी में मूर्ति हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों के अनुसार, सार्वजनिक स्थान पर बिना अनुमति मूर्ति स्थापित करना नियमों का उल्लंघन है, इसलिए यह कार्रवाई की गई।

हाई कोर्ट सर्कल के पास लगाई गई थी मूर्ति

जानकारी के मुताबिक, सिद्धारमैया की मूर्ति हाई कोर्ट क्रॉस के पास उस स्थान पर लगाई गई थी, जिसे पहले ‘सिद्धारमैया सर्कल’ के नाम से जाना जाता था। समर्थकों ने रात के समय अचानक मूर्ति स्थापित कर दी।

मूर्ति लगाए जाने की जानकारी सुबह सामने आई, जिसके बाद इलाके में राजनीतिक हलचल बढ़ गई। बड़ी संख्या में लोग इस घटनाक्रम पर चर्चा करने लगे।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार का था कलबुर्गी दौरा

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार कल्याण कर्नाटक उत्सव में शामिल होने के लिए कलबुर्गी में मौजूद थे।

बताया गया कि मुख्यमंत्री को इसी सर्कल से होकर अफजलपुर जाना था। ऐसे में प्रशासन की नजर भी इस स्थान पर गई और बिना अनुमति लगाए गए ढांचे को लेकर अधिकारियों ने कार्रवाई की।

नगर निगम ने बताया नियमों का उल्लंघन

कलबुर्गी नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक स्थान पर प्रतिमा लगाने के लिए संबंधित विभाग से अनुमति लेना जरूरी होता है। बिना अनुमति के मूर्ति स्थापित किए जाने के कारण निगम ने इसे हटाने का फैसला लिया।

अधिकारियों ने पुलिस की मौजूदगी में अभियान चलाकर मूर्ति को वहां से हटा दिया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।

समर्थकों में नाराजगी, प्रशासन ने की कार्रवाई

मूर्ति हटाए जाने के बाद सिद्धारमैया समर्थकों में नाराजगी देखी गई। समर्थकों का कहना था कि पूर्व मुख्यमंत्री का क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और इसी सम्मान में मूर्ति लगाई गई थी।

वहीं प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं थी, बल्कि नियमों के पालन के तहत की गई है। सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी तरह के निर्माण या स्थापना के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।

राजनीतिक चर्चा तेज

कर्नाटक में सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार दोनों कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। ऐसे समय में यह घटनाक्रम सामने आया जब राज्य में कल्याण कर्नाटक उत्सव आयोजित किया जा रहा था।

मूर्ति लगाने और फिर हटाने की घटना को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अधिकारियों ने इसे पूरी तरह प्रशासनिक कार्रवाई बताया है।

बिना अनुमति मूर्ति लगाने के मामलों पर प्रशासन सख्त

देश के कई हिस्सों में सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक व्यक्तियों की मूर्तियां लगाने के मामले सामने आते रहे हैं। प्रशासन आमतौर पर ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई करता है।

कलबुर्गी नगर निगम ने भी इसी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी बदलाव से पहले अनुमति लेना आवश्यक है।

आगे की स्थिति पर नजर

फिलहाल सिद्धारमैया की मूर्ति हटाए जाने के बाद प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। पुलिस और नगर निगम अधिकारियों ने इलाके में शांति बनाए रखने के लिए कदम उठाए हैं।

घटना के बाद अब यह देखना होगा कि समर्थकों की ओर से इस मामले में आगे कोई प्रतिक्रिया दी जाती है या नहीं। वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन होने पर इसी तरह कार्रवाई की जाएगी।

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