बेंगलुरु। कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की महान कलाकार भारत रत्न एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती के अवसर पर बुधवार को बेंगलुरु में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भावुक हो गईं। कार्यक्रम के दौरान एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी से जुड़ी एक प्रस्तुति सुनते हुए उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। संगीत और आध्यात्मिक भावनाओं से जुड़े इस क्षण ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया।
एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी भारतीय शास्त्रीय संगीत की ऐसी कलाकार थीं, जिन्होंने अपनी आवाज और साधना के जरिए कर्नाटक संगीत को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाई। उनकी जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में संगीत जगत के कई लोगों ने उन्हें याद किया और उनके योगदान को नमन किया।
भक्ति को बताया कर्नाटक संगीत की आत्मा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि कर्नाटक संगीत की सबसे बड़ी ताकत उसकी आध्यात्मिक भावना और भक्ति परंपरा है। उन्होंने कहा कि भक्ति इस संगीत विरासत की "जीवंत आत्मा" है, जिसने सदियों से इस परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वित्त मंत्री ने कहा कि कर्नाटक संगीत केवल सुर और ताल का मेल नहीं है, बल्कि यह विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और आध्यात्मिक विचारों का संगम भी है। उन्होंने बताया कि इस संगीत परंपरा में अलग-अलग क्षेत्रों और भाषाओं की रचनाओं ने इसे और समृद्ध बनाया है।
भाषाओं और परंपराओं का अद्भुत संगम
निर्मला सीतारमण ने अपने संबोधन में कहा कि कर्नाटक संगीत में तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और संस्कृत जैसी कई भाषाओं की रचनाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाई और आध्यात्मिक परंपराएं एक ही मंच पर उसी तरह मिलती हैं, जैसे अलग-अलग नदियां समुद्र में जाकर एक हो जाती हैं।
उन्होंने कहा कि यही विविधता भारतीय शास्त्रीय संगीत की सबसे बड़ी विशेषता है। संगीत के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों की संस्कृति और भावनाएं एक-दूसरे से जुड़ती हैं।
एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी के योगदान को किया याद
कार्यक्रम में एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी के जीवन और संगीत यात्रा को भी याद किया गया। उन्होंने अपनी मधुर आवाज, अनुशासन और समर्पण से कर्नाटक संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी का जन्म 16 सितंबर 1916 को तमिलनाडु के मदुरै में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। अपनी प्रतिभा और कठिन साधना के बल पर उन्होंने भारतीय संगीत जगत में एक अलग स्थान बनाया।
उनके भक्ति गीतों और शास्त्रीय प्रस्तुतियों ने उन्हें देश-विदेश में लोकप्रिय बनाया। उनकी आवाज में आध्यात्मिकता और भावनाओं का ऐसा मेल था, जिसने हर वर्ग के लोगों को प्रभावित किया।
संगीत के जरिए एकता का संदेश
निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय संगीत परंपरा हमेशा से लोगों को जोड़ने का माध्यम रही है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक संगीत में अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों की मौजूदगी भारत की विविधता को दर्शाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज और आध्यात्मिक जीवन को जोड़ने वाली शक्ति भी है। एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी ने इसी भावना को अपनी कला के माध्यम से दुनिया तक पहुंचाया।
भावुक कर देने वाला रहा कार्यक्रम
कार्यक्रम के दौरान जब एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी की प्रस्तुति से जुड़ा गीत प्रस्तुत किया गया तो निर्मला सीतारमण भावुक हो गईं। उनकी आंखों में आंसू देखकर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी उस पल को बेहद भावनात्मक बताया।
उन्होंने कहा कि ऐसे कलाकारों की विरासत केवल संगीत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती है। एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी का जीवन संगीत, साधना और समर्पण का उदाहरण है।
कर्नाटक संगीत की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान
कार्यक्रम में कर्नाटक संगीत की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की विरासत को सुरक्षित रखना और युवाओं को इससे जोड़ना जरूरी है।
एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती का यह आयोजन न केवल एक महान कलाकार को श्रद्धांजलि देने का अवसर था, बल्कि भारतीय संगीत की विविधता और आध्यात्मिक शक्ति को याद करने का भी मंच बना।