बेंगलुरु : केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक के ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज (RDPR) विभाग में ग्रेड-1 अधिकारियों की भर्ती को लेकर राज्य सरकार और मंत्री प्रियांक खड़गे पर फिर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के सचिव की ओर से पत्र भेजे जाने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया पर रोक क्यों नहीं लगाई गई, जबकि उस समय विभाग की जिम्मेदारी प्रियांक खड़गे के पास थी।
कुमारस्वामी ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ है और मामले में सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं।
KPSC भर्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल
एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (ग्रेड-1) पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया के दौरान कई गंभीर गलतियां हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन KPSC सचिव ने बार-बार नियमों का उल्लंघन किया।
उन्होंने कहा कि अंतिम चयन सूची तैयार करते समय निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। कुमारस्वामी के मुताबिक, मामले को KPSC के चेयरमैन और सदस्यों के सामने भी उचित तरीके से नहीं रखा गया और एकतरफा फैसला लिया गया।
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया से उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ, जिन्होंने मेहनत कर परीक्षा दी थी।
फोरेंसिक रिपोर्ट का दिया हवाला
कुमारस्वामी ने भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर फोरेंसिक रिपोर्ट का भी हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट में OMR शीट के साथ छेड़छाड़ और CCTV कैमरों से जुड़े डेटा को नष्ट किए जाने जैसी बातें सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि इन गंभीर आरोपों के बावजूद राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और हाई कोर्ट में भी उचित आपत्ति दर्ज नहीं कराई।
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर इन मुद्दों को नजरअंदाज किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।
प्रियांक खड़गे पर सीधा निशाना
केंद्रीय मंत्री ने सवाल उठाया कि जब RDPR विभाग से जुड़े मामले सामने आ रहे थे, तब विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्री प्रियांक खड़गे ने समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए।
उन्होंने कहा कि KPSC सचिव की ओर से जानकारी दिए जाने के बाद भी भर्ती प्रक्रिया को रोकने या जांच कराने की दिशा में कार्रवाई नहीं की गई।
कुमारस्वामी ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किन कारणों से इस मामले में देरी हुई और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
भर्ती में पारदर्शिता को लेकर बहस
कर्नाटक में सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दल कई बार भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार को घेरते रहे हैं।
कुमारस्वामी ने कहा कि सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए, क्योंकि लाखों युवा इन परीक्षाओं पर अपना भविष्य निर्भर करते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी होती है तो इसका सीधा असर योग्य उम्मीदवारों पर पड़ता है।
सरकार से जवाब की मांग
केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से पूरे मामले पर जवाब देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मामले को दबाने की कोशिश की और उम्मीदवारों के हितों की अनदेखी की।
राजनीतिक टकराव बढ़ा
KPSC भर्ती विवाद को लेकर कर्नाटक की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कुमारस्वामी के हमले के बाद अब सबकी नजर राज्य सरकार और मंत्री प्रियांक खड़गे की प्रतिक्रिया पर है।
फिलहाल, केंद्रीय मंत्री के आरोपों को लेकर सरकार की ओर से आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। वहीं, भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
कुमारस्वामी ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे को आगे भी उठाते रहेंगे और युवाओं के साथ कथित अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएंगे।