बेंगलुरु: कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (KPSC) में कथित घोटालों को लेकर चल रही जांच के बीच राज्य सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और गलत तरीकों पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने कर्नाटक पब्लिक एग्जामिनेशन (भर्ती में भ्रष्टाचार और गलत तरीकों को रोकने के उपाय) एक्ट, 2023 को लागू करने के लिए नियमों का ड्राफ्ट जारी कर दिया है।
इस कानून का उद्देश्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक, नकल, धोखाधड़ी तथा अन्य अनियमितताओं पर सख्ती से रोक लगाना है। सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने और योग्य उम्मीदवारों को न्याय दिलाने के लिए कड़े प्रावधान जरूरी हैं।
भर्ती भ्रष्टाचार रोकने के लिए सख्त कानून
कर्नाटक पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2023 को सितंबर 2024 में नोटिफाई किया गया था। इस कानून के तहत भर्ती परीक्षाओं में गलत तरीकों का इस्तेमाल करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
कानून के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार, अनुचित साधनों का इस्तेमाल या परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने के दोषी पाए जाने वाले लोगों को पांच साल से लेकर 12 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
इसके अलावा दोषियों पर आर्थिक जुर्माना लगाने का भी प्रावधान रखा गया है।
KPSC विवाद के बीच आया फैसला
राज्य सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की कुछ भर्तियों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की जा रही है।
हाल ही में KPSC भर्ती प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया है। विपक्षी दलों ने सरकार से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सरकार का कहना है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा।
नियमों के ड्राफ्ट में क्या है खास
सरकार की ओर से जारी ड्राफ्ट नियमों में भर्ती परीक्षाओं के संचालन, निगरानी और शिकायतों के निपटारे से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।
इन नियमों के जरिए परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं, अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।
अगर कोई व्यक्ति या समूह परीक्षा प्रक्रिया में बाधा डालने, उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुंचाने या गलत तरीके अपनाने में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।
पेपर लीक और नकल पर सख्ती
भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल जैसी समस्याएं लंबे समय से चुनौती बनी हुई हैं। कई राज्यों में ऐसी घटनाओं के कारण परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी हैं और उम्मीदवारों को परेशानी का सामना करना पड़ा है।
कर्नाटक सरकार का कहना है कि नया कानून ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद करेगा।
सरकार का उद्देश्य है कि मेहनत करने वाले उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर मिले और भर्ती प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा मजबूत हो।
दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
कानून में परीक्षा से जुड़े भ्रष्टाचार को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इसमें केवल उम्मीदवार ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, अगर वह गलत तरीके अपनाने में शामिल पाया जाता है।
इसमें अधिकारियों, कर्मचारियों, एजेंटों या अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।
युवाओं के हितों की सुरक्षा पर जोर
कर्नाटक में हर साल बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करते हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता उनके भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
सरकार का कहना है कि नए कानून से युवाओं के हितों की रक्षा होगी और योग्य उम्मीदवारों को बिना किसी भ्रष्टाचार के नौकरी पाने का अवसर मिलेगा।
आगे की प्रक्रिया
नियमों के ड्राफ्ट पर सुझाव और आपत्तियां मांगी जा सकती हैं। इसके बाद अंतिम नियम तैयार कर लागू किए जाएंगे।
सरकार का दावा है कि कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने के बाद भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।
कर्नाटक सरकार का यह कदम भर्ती प्रक्रिया में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। KPSC से जुड़े विवादों के बीच अब यह देखना अहम होगा कि नए कानून और नियमों के लागू होने के बाद परीक्षा व्यवस्था में कितना बदलाव आता है और भ्रष्टाचार पर कितनी प्रभावी रोक लग पाती है।