नई दिल्ली: देश में मानसून को लेकर भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने नया अनुमान जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, सितंबर महीने में पूरे देश में औसत से कम बारिश होने की संभावना है। IMD ने अपने मासिक पूर्वानुमान में बताया है कि सितंबर में बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के 91 प्रतिशत से कम रह सकती है।

मौसम विभाग का यह अनुमान ऐसे समय में आया है, जब अगस्त का महीना देश के लिए रिकॉर्ड गर्म रहा। IMD के मुताबिक, 1901 के बाद अगस्त 2026 सबसे गर्म अगस्त दर्ज किया गया। इस दौरान देश का औसत तापमान 28.01 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

सितंबर में कमजोर रह सकता है मानसून

IMD के अनुसार, सितंबर में मानसून की गतिविधियां सामान्य से कमजोर रहने की संभावना है। पूरे देश में कुल बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया गया है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, सितंबर में बारिश का स्तर LPA के 91 प्रतिशत से नीचे रहने पर इसे सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में रखा जाता है। इससे खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां मानसून की बारिश पर कृषि निर्भर रहती है।

LPA क्या होता है?

मौसम विभाग बारिश का अनुमान लगाने के लिए लॉन्ग पीरियड एवरेज यानी LPA का इस्तेमाल करता है। किसी खास क्षेत्र में लंबे समय तक किसी महीने या मौसम में दर्ज की गई औसत बारिश को LPA कहा जाता है।

आमतौर पर इसके लिए 30 से 50 साल के मौसम संबंधी आंकड़ों का अध्ययन किया जाता है। IMD के अनुसार, 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर सितंबर महीने का लॉन्ग पीरियड एवरेज करीब 167.9 मिलीमीटर है।

अगर किसी महीने में बारिश LPA के आसपास रहती है तो उसे सामान्य बारिश माना जाता है, जबकि इससे कम या ज्यादा होने पर मौसम की स्थिति अलग-अलग श्रेणियों में रखी जाती है।

अगस्त ने तोड़ा गर्मी का रिकॉर्ड

मौसम विभाग के अनुसार, अगस्त 2026 में देश में गर्मी ने नया रिकॉर्ड बनाया। यह महीना 1901 के बाद सबसे गर्म अगस्त रहा।

इस दौरान औसत तापमान 28.01 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लगातार बढ़ते तापमान और कम बारिश के कारण कई क्षेत्रों में गर्मी का असर ज्यादा महसूस किया गया।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और मौसम में हो रहे बदलावों का असर अब मानसून के पैटर्न पर भी दिखाई दे रहा है।

सितंबर में तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना

IMD ने बारिश के साथ-साथ तापमान को लेकर भी अनुमान जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, सितंबर में देश के कई हिस्सों में औसत अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।

इसका मतलब है कि बारिश कम होने के साथ-साथ गर्मी का असर भी बना रह सकता है। लोगों को उमस और गर्म मौसम का सामना करना पड़ सकता है।

किसानों के लिए बढ़ सकती है चिंता

सितंबर की बारिश खरीफ फसलों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। धान समेत कई फसलों के लिए मानसून के अंतिम चरण की बारिश काफी मददगार होती है।

अगर सितंबर में बारिश कम रहती है तो कुछ क्षेत्रों में फसलों की सिंचाई और उत्पादन पर असर पड़ सकता है। हालांकि, जिन क्षेत्रों में पहले ही पर्याप्त बारिश हो चुकी है, वहां स्थिति ज्यादा चिंताजनक नहीं होगी।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखते हुए खेती से जुड़े फैसले लेने चाहिए।

जल संसाधनों पर भी पड़ेगा असर

मानसून के आखिरी चरण में होने वाली बारिश देश के जल स्रोतों को भरने में अहम भूमिका निभाती है। कम बारिश होने की स्थिति में बांधों, जलाशयों और भूजल स्तर पर असर पड़ सकता है।

कई राज्यों में पेयजल और सिंचाई के लिए मानसून की बारिश बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में सितंबर के बारिश के आंकड़े जल प्रबंधन के लिहाज से भी अहम रहेंगे।

मौसम पर नजर बनाए हुए है IMD

मौसम विभाग ने कहा है कि मानसून की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में मौसम के बदलाव के आधार पर नए अपडेट जारी किए जाएंगे।

फिलहाल IMD के अनुमान के मुताबिक सितंबर में बारिश कम और तापमान अधिक रहने की संभावना है। अगस्त में रिकॉर्ड गर्मी के बाद अब सितंबर के मौसम को लेकर भी लोगों और किसानों की नजरें मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर टिकी हुई हैं।

Tags: